लखन पटेल से छीना पशुपालन विभाग, क्या MP मंत्रिमंडल फेरबदल का हुआ आगाज?

Ramanand Tiwari | Jul 15, 2026, 12:38 IST
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मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस ले लिया है। अब लखन पटेल के पास आनंद विभाग की जिम्मेदारी रहेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिया गया है।
  • उन्हें आनंद विभाग दिया गया है।
  • फैसले से एमपी में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
  • दतिया उपचुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना और मजबूत मानी जा रही है।
  • कई मंत्रियों के विभाग बदलने और नए चेहरों को मौका मिलने की अटकलें तेज हैं।
  • विभाग बदलने के कारणों पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चल रही मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। डॉ. मोहन यादव सरकार ने लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस ले लिया है। अब उन्हें आनंद विभाग दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार और बड़े फेरबदल की पहली औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।



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क्या अब शुरू होगा बड़ा मंत्रिमंडल फेरबदल?

कई महीनों से मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के पुनर्वितरण की चर्चा चल रही थी। ऐसे में लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी जैसा अहम विभाग वापस लेना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार अब बड़े फेरबदल की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।



नागर सिंह चौहान जैसा दोहराया गया घटनाक्रम

प्रदेश में इससे पहले भी ऐसा फैसला लिया जा चुका है। पूर्व वन मंत्री नागर सिंह चौहान से वन विभाग हटाकर उन्हें अनुसूचित जाति कल्याण विभाग सौंपा गया था। अब पशुपालन मंत्री लखन पटेल के मामले को भी उसी राजनीतिक क्रम की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।



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क्या प्रतिमा बागरी प्रकरण बना वजह?

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद के दौरान मंत्री लखन पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा था। सत्ता के गलियारों में यह भी चर्चा है कि इसी घटनाक्रम के बाद उनके विभाग में बदलाव की जमीन तैयार हुई। हालांकि, इस संबंध में सरकार ने कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है।



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दतिया उपचुनाव के बाद और बढ़ सकती है हलचल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला अकेला नहीं है। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार, नए चेहरों की एंट्री और कुछ मंत्रियों की विदाई जैसे फैसले भी सामने आ सकते हैं। इसलिए लखन पटेल का विभाग बदलना बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।



राजनीतिक मायने

लखन पटेल से बड़ा विभाग वापस लिया जाना केवल एक विभागीय बदलाव नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकार इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नई रणनीति और आगामी मंत्रिमंडल विस्तार की भूमिका के रूप में देख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगला फैसला किस मंत्री पर होता है और मंत्रिमंडल में किन नए चेहरों को जगह मिलती है।



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लखन पटेल से क्यों लिया गया बड़ा विभाग?

सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई दिल्ली की नाराजगी के बाद हुई। फोन पर कहा गया कि तत्काल पटेल को पशुपालन विभाग से हटाया जाए। फोन आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों को तलब कर चर्चा की। लखन पटेल को मंत्री पद वापस लेने को कहा। तब अफसरों ने कहा पटेल अभी तो दो ही तरह से हटाए जा सकते हैं। पहला ये कि इनसे इस्तीफा लिया जाए और दूसरा उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त किया जाए।



सूत्र बताते हैं कि सीएम ने कहा तत्काल हटाना है, इसलिए बीच का रास्ता निकाला गया कि अभी सिर्फ विभाग बदल दो। इस पर अफसरों ने सुझाव दिया कि पटेल को पशुपालन से हटाकर नाममात्र का विभाग दिया जा सकता है। इसके बाद उन्हें आनंद विभाग का मंत्री बनाने को कहा।



सीएम के आदेश के तत्काल बाद देर रात नोटिफ़िकेशन जारी किया गया। बताया जा रहा है की आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में पटेल को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। अब पशुपालन विभाग खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है।



डिमोशन की तीन थ्योरी

Thesootr को मिली जानकारी के अनुसार इस एपिसोड को पीछे तीन कारण बताए जा रहे हैं।



  • 1- गौशालाओं के लेकर संघ की नाराजगी
  • 2- नेशलन डेयरी डवलपमेंट बोर्ड के मामले को लेकर
  • 3- पटेल को लेकर बेहद गंभीर किस्म की शिकायतें जिनके कारण दिल्ली तक सरकार की किरकिरी हो सकती थी।

बता दें कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नाराजगी सिर्फ एक मुद्दे पर नहीं थी।



प्रदेश की गौशालाओं से लगातार शिकायतें आ रही थीं। इस पर CM पहले से नाखुश थे। साथ ही अमूल डेयरी से जुड़ा एक मामला भी दिल्ली में देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पटेल को लेकर कुल मिलाकर कई मुद्दों पर सवाल उठ रहे थे। हालांकि सरकार ने अभी तक इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।



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