एमपी के आठ शहरों में सांस लेना भी मुश्किल, इंदौर-सागर में हवा बनी जहर
Aman Vaishnav | Apr 19, 2026, 15:46 IST
mp air pollution ncap non attainment cities
एमपी के आठ बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गई है। मतलब कि यहां कि हवा में ऐसे छोटे-छोटे कण हैं, जो सीधा हमारे गले तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इन कणों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या आप जानते हैं कि आपके शहर की हवा अब आपको बीमार कर रही है? मध्य प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की रिपोर्ट ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत प्रदेश के आठ शहरों को नॉन-अटेनमेंट सिटी के रूप में रखा गया है। इसका मतलब है कि यहां वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
जानकारी के अनुसार इंदौर और सागर में 2025 तक पीएम-10 का स्तर घटने की बजाय और बढ़ गया है। एनजीटी की ओर से बनाई गई एक समिति इन शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए काम कर रही है।
ये आठ शहर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, सिंगरौली और देवास हैं।
समिति का सबसे ज्यादा ध्यान सड़कों की धूल और वाहनों के प्रदूषण को कम करने पर है। अब सड़कों की सफाई ब्लोअर से नहीं, बल्कि सक्शन वाली स्वीपिंग मशीनों से की जाएगी।
एनजीटी ने राशिद नूर खान की याचिका पर नगरीय विकास, परिवहन और पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल कर एक समिति बनाई थी। इस समिति ने कई जगहों का दौरा किया और अपनी सिफारिशें एनजीटी को भेजी हैं।
भोपाल में पुणे के सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी संस्थान के विशेषज्ञों की मदद भी ली गई है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत पीएम-10 के स्तर में 40% तक कमी लाने का वार्षिक का लक्ष्य रखा गया है।
पीएम 10: ये कण ऐसे होते हैं जिनका आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटा होता है। ये धूल, मिट्टी, सीमेंट आदि से बनते हैं और ये आसानी से नाक और गले तक पहुंच सकते हैं।
पीएम 2.5: ऐसे कण जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटा होता है। ये बहुत ही छोटे होते हैं। ये कण फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
ये कण हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इनसे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही अस्थमा व एलर्जी जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा ये कण दिल और फेफड़ों की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। अगर लंबे समय तक इन कणों के संपर्क में रहें तो कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
यह खबर आपके लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि वायु प्रदूषण खासकर पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इन कणों से सांस लेने में परेशानी, अस्थमा, एलर्जी, दिल और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
अगर आप इन प्रदूषित इलाकों में रहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है, ताकि आप अपनी सेहत का ख्याल रखें और प्रदूषण से बचने के उपाय करें।
खासकर अगर आप इन समस्याओं से पहले ही जूझ रहे हैं, तो यह खबर आपको इससे बचने के लिए सचेत करती है।
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एमपी की आठ नॉन-अटेनमेंट सिटी
जानकारी के अनुसार इंदौर और सागर में 2025 तक पीएम-10 का स्तर घटने की बजाय और बढ़ गया है। एनजीटी की ओर से बनाई गई एक समिति इन शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए काम कर रही है।
ये आठ शहर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, सिंगरौली और देवास हैं।
स्वीपिंग मशीनों से होगी सड़कों की सफाई
एनजीटी ने राशिद नूर खान की याचिका पर नगरीय विकास, परिवहन और पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल कर एक समिति बनाई थी। इस समिति ने कई जगहों का दौरा किया और अपनी सिफारिशें एनजीटी को भेजी हैं।
भोपाल में पुणे के सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी संस्थान के विशेषज्ञों की मदद भी ली गई है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत पीएम-10 के स्तर में 40% तक कमी लाने का वार्षिक का लक्ष्य रखा गया है।
समिति ने दिए सुझाव
- रोड डस्ट और वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए नगरीय प्रशासन और परिवहन विभाग को सख्ती से काम करना चाहिए।
- भोपाल की सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी में जो 21 हॉट स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, उनका जल्द से जल्द निरीक्षण किया जाए।
- सड़कों की सफाई आउटर लेन पर की जाए। फुटपाथ और किनारों पर एंड-टू-एंड पेविंग ब्लॉक लगाए जाएं।
- सड़क के दोनों तरफ फुटपाथों पर एक तय चौड़ाई तक पेवर्स ब्लॉक लगाए जाएं।
- इसके अलावा उनकी आधी चौड़ाई में घास और ऐसे पौधे लगाए जाएं जिनकी छांव घनी हो और बायोमास ज्यादा हो।
- शहरों में वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए मॉनीटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाए।
- शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान एक्शन प्लान तैयार किए जाएंगे।
पीएम 10: ये कण ऐसे होते हैं जिनका आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटा होता है। ये धूल, मिट्टी, सीमेंट आदि से बनते हैं और ये आसानी से नाक और गले तक पहुंच सकते हैं।
पीएम 2.5: ऐसे कण जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटा होता है। ये बहुत ही छोटे होते हैं। ये कण फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
बढ़ सकता है कैंसर का खतरा
इसके अलावा ये कण दिल और फेफड़ों की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। अगर लंबे समय तक इन कणों के संपर्क में रहें तो कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
ये खबर क्यों जरूरी है?
अगर आप इन प्रदूषित इलाकों में रहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है, ताकि आप अपनी सेहत का ख्याल रखें और प्रदूषण से बचने के उपाय करें।
खासकर अगर आप इन समस्याओं से पहले ही जूझ रहे हैं, तो यह खबर आपको इससे बचने के लिए सचेत करती है।
ये खबरें भी पढ़िए...
NGT ने माना पूरे MP में जन स्वास्थ्य आपातकाल, इंदौर ही नहीं भोपाल-ग्वालियर जैसे शहर भी खतरे में
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