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BHOPAL. मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी पहल सामने आई। कांग्रेस विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने ‘सार्वभौम निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा’ विधेयक पेश किया। उनका प्रस्ताव है कि प्रदेश के हर नागरिक को 15 लाख तक मुफ्त इलाज का अधिकार मिले। यह अधिकार जाति, वर्ग या आय की शर्तों के बिना होगा।
क्या है यह निजी सदस्य विधेयक?
यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 196 और मध्यप्रदेश विधानसभा के स्थायी आदेश 25(1) के तहत प्रस्तुत किया गया है। आमतौर पर कानून सरकार के मंत्री पेश करते हैं। संविधान किसी भी विधायक को निजी सदस्य के रूप में विधेयक पेश करने का अधिकार देता है। एमपी विधानसभा के इतिहास में ऐसे विधेयक बहुत कम देखने को मिले हैं।
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‘इलाज का अधिकार’ क्यों जरूरी बताया गया?
डॉ. सिंह का तर्क है कि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का मौलिक अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का दायरा सीमित है। 5 लाख का कवरेज कई गंभीर बीमारियों के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका सवाल था, "जब 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को आयुष्मान का लाभ मिलता है, तो बाकी नागरिकों को क्यों नहीं?"
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किसको फायदा
मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत प्रति परिवार 5 लाख तक इलाज की सुविधा है। लेकिन पात्रता शर्तें जैसे गरीबी रेखा में नाम, राशन कार्ड, संबल योजना, मजदूर पंजीयन के कारण 52% परिवार ही लाभ ले पा रहे हैं। 48% परिवार अभी भी इस दायरे से बाहर हैं। यह असमानता खत्म करने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया है।
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प्रस्तावित विधेयक की मुख्य बातें
योजना का लाभ अमीर-गरीब, किसान, व्यापारी, कर्मचारी, श्रमिक, जनप्रतिनिधि सभी को मिले। अपात्र सिर्फ वे होंगे, जिनके पास बेहतर निजी स्वास्थ्य बीमा है। प्रति परिवार 15 लाख तक मुफ्त इलाज का प्रस्ताव है। इसमें सामान्य बीमारियों से लेकर बड़ी सर्जरी तक का इलाज शामिल होगा। गंभीर बीमारियों के लिए कवरेज 25 लाख तक करने की मांग की गई है। तर्क यह है कि 5 लाख की सीमा गंभीर बीमारियों के लिए पर्याप्त नहीं है। डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को मुफ्त इलाज मिलता है, तो आम जनता को क्यों नहीं? उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के नारे का उल्लेख किया।
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कितना खर्च आएगा?
डॉ. सिंह के मुताबिक इस योजना पर सालाना लगभग 8 से 9 हजार करोड़ का खर्च का अनुमान है। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय बीमा कंपनियों की भागीदारी से योजना चलाई जा सकती है। इसे आयुष्मान भारत से जोड़ा जा सकता है। जरूरत पड़े तो सरकार जनहित में ऋण लेकर भी इसे लागू करे। उन्होंने कहा कि जब अन्य योजनाओं पर हजारों करोड़ खर्च हो सकते हैं, तो जनता की जान बचाने के लिए खर्च से पीछे नहीं हटना चाहिए।
क्या होगा आगे?
यह एक निजी सदस्य विधेयक है, इसलिए इसे कानून बनने के लिए सरकार की स्वीकृति जरूरी होगी। अगर सरकार इसे अपनाती है, तो मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदल सकती हैं। यह प्रस्ताव आय, जाति या वर्ग आधारित भेदभाव को खत्म करने का बड़ा कदम है।
क्या एमपी बनेगा हेल्थ सिक्योरिटी मॉडल?
डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह का प्रस्ताव स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की मांग है। अब सरकार पर नजर है। क्या यह पहल चर्चा तक सीमित रहेगी? या हर परिवार को 15 लाख तक मुफ्त इलाज का अधिकार मिलेगा? अगर यह लागू होता है, तो मध्यप्रदेश नया मॉडल पेश कर सकता है।
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