असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की मांग लेकर पहुंचे मंत्रालय, छात्रों की कमी बताकर लौटाया

मध्य प्रदेश में दर्शन शास्त्र, गृह विज्ञान, संगीत और लाइब्रेरी साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती नहीं हो रही है। युवा परेशान हैं वहीं, विभाग के पास डेटा नहीं है।

author-image
Sanjay Sharma
New Update
Ministry reached with demand for recruitment of Assistant Professor, returned saying lack of students

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News in Short

  • प्रदेश के कॉलेजों में फिलॉसफी, होम साइंस, म्युजिक और लाइब्रेरी साइंस में शिक्षकों की कमी है।
  • इन विषयों को पढ़ाने के लिए दो साल से असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती नहीं हो रही है। 
  • उच्च शिक्षा विभाग का कहना है इन विषयों में छात्रों की रुचि नहीं है और संख्या कम है। 
  • कॉलेजों में छात्र नहीं होने से इन विषयों की कक्षाएं खाली है और इसी वजह से भर्ती नहीं आ रही हैं।
  • असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने अधिकारियों को भर्ती के संबंध में पत्र सौंपा है। 

BHOPAL. असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे युवाओं ने दो साल से दर्शन शास्त्र, गृह विज्ञान, संगीत और लाइब्रेरियन के पदों पर भर्ती न आने की शिकायत की है। अलग- अलग जिलों से पहुंचे युवाओं ने उच्च शिक्षा विभाग के एसीएस से मुलाकात कर कॉलेजों में इन विषयों के खाली पदों का हवाला देते हुए भर्ती की मांग की है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इन विषयों में विद्यार्थियों की कम संख्या को भर्ती न आने की वजह बताया है। 

यह खबरें भी पढ़ें..

द सूत्र के खुलासे के बाद एमपी में खेल संघों की वसूली पर विभाग सख्त, संबद्धता की अनिवार्यता नहीं

मोहन कैबिनेट: एमपी के एक लाख टीचर्स का बढ़ेगा वेतन, ग्वालियर-उज्जैन व्यापार मेले में गाड़ी खरीद पर 50% टैक्स छूट

News Detail

मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 19 विषयों में खाली असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर भर्ती की जा रही है। इसके लिए एमपीपीएससी के माध्यम से भर्ती परीक्षाओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

वहीं विभाग ने दर्शन शास्त्र, होम साइंस, संगीत और लाइब्रेरी साइंस में खाली पदों पर भर्ती नहीं निकाली है। इसके कारण इन विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे युवा निराश हैं।

ये युवा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए NET, SET और UGC- NET के साथ ही पीएचडी भी कर चुके हैं। युवाओं का कहना है चारों विषयों में खाली पदों पर भर्ती नहीं आ रही है।

वे दो साल से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रदेश के कई कॉलेजों में इन विषयों के प्राध्यापक नहीं हैं। इस वजह से इन कॉलेजों में छात्रों को अपने स्तर पर पढ़ाई करनी पड़ रही है। 

Document

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी छात्र संख्या कम होने की सफाई दे रहे हैं। इसके विपरीत विभाग द्वारा साल 2025 में प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में खाली पदों की संख्या जारी की गई थी।

इसमें प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेजों में विषयवार खाली संख्या का उल्लेख किया गया है। विभाग ने मई 2025 को खाली पदों की कॉलेजवार सूची भी जारी की थी। सूचना के अधिकार के माध्यम से युवाओं को जो जानकारी दी गई है उसमें भी खाली पदों की संख्या स्पष्ट है। 

कमी से टेंशन में छात्र 

मंगलवार को युवाओं के एक समूह ने उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को चारों विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के संबंध में मांग पत्र सौंपा है। वहीं विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार को भी दो साल से भर्ती न आने और कॉलेजों में इन विषयों की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति से अवगत कराया है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिक्षक न होने के कारण कॉलेजों में सिलेबस अधूरे हैं और छात्रों को अध्ययन करने में कठिनाई हो रही है। इसका असर इन विषयों के छात्रों के वार्षिक परिणाम पर भी पड़ रहा है। 

विषयों में खाली पद :

दर्शन शास्त्र :    34
गृह विज्ञान   :    76
संगीत         :     34
लाइब्रेरियन  :    313 

यह खबरें भी पढ़ें..

20 साल से अटका आईपीएस कैडर रिव्यू, कैट ने एमपी और केंद्र सरकार से मांगा जवाब

लेजर शो व म्यूजिक के साथ होगा खेलो एमपी यूथ गेम्स का आगाज, 1.50 लाख खिलाड़ी लेंगे भाग

विभाग की जानकारी में भी अंतर 

उच्च शिक्षाा विभाग द्वारा मई 2025 को खाली पदों के संबंध में जो सूची जारी की गई थी उसमें गृह विभाग यानी होम साइंस के खाली पदों की संख्या 76 है। वहीं सूचना के अधिकार के तहत इसी महीने में आवेदक शुभम शर्मा द्वारा भर्ती के संबंध में मांगी गई जानकारी में विभाग द्वारा गृह विज्ञान में खाली पद 69 बताए हैं। यानी विभाग के पास कॉलेजों में खाली पदों की संख्या का वास्तविक डेटा ही मौजूद नहीं है।

एमपीपीएससी उच्च शिक्षा विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर मंत्री इंदर सिंह परमार असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती शिक्षकों की कमी
Advertisment