छोटे नेता से पद छीना, हजारों कारों से सड़कें जाम करने वाले बड़े नेताओं को क्या हटाएगी बीजेपी?
Amresh Kushwaha | May 14, 2026, 14:55 IST
mp bjp convoy double standard sajjan barkhasat bade neta
मध्यप्रदेश बीजेपी ने किसान मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को पद से हटा दिया है। नेताजी का दोष यह था कि उन्होंने कारों के बड़े काफिले के साथ जुलूस निकाला था। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना और कार्रवाई कर दी है। सवाल है कि क्या बड़े नेताओं पर कार्रवाई होगी?
मध्यप्रदेश बीजेपी में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है और वो सवाल यह है कि क्या नियम सिर्फ छोटे नेताओं के लिए बने हैं? भिंड में 100 गाड़ियों का काफिला निकालने पर भाजपा किसान मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव की पद से छुट्टी कर दी गई है। वहीं, प्रदेश के कई बड़े नेता इससे कहीं बड़े काफिले निकालते रहे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब यही मामला बीजेपी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल खड़े कर रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से सात अहम अपीलें की थीं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, विदेश यात्राएं कम करने और सादगी से जीवन जीने की बात कही थी।
वैश्विक ऊर्जा संकट और इजराइल-ईरान युद्ध का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश को अब संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की आदत डालनी होगी। वहीं, प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद मध्यप्रदेश में नेताओं के बड़े-बड़े काफिले सड़कों पर दिखाई दिए।
भाजपा किसान मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव ने 13 मई 2026 को भिंड में करीब 100 गाड़ियों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन किया था। समर्थक नारे लगाते हुए और हॉर्न बजाते हुए शहर से निकले थे। नेशनल हाईवे-719 समेत कई रास्तों पर लंबा जाम लग गया था। आम लोग परेशान हुए और देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
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मामला बढ़ा तो बीजेपी संगठन हरकत में आया। सज्जन सिंह यादव से जवाब मांगा गया था। उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने किसी को बुलाया नहीं था, लोग खुद उत्साह में जुड़ते चले गए। भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया ने भी कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान कर रहा है।
प्रदेश संगठन इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। मामले को अनुशासनहीनता माना गया और 14 मई 2026 को भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने आधिकारिक पत्र जारी कर सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी। पत्र में साफ लिखा गया कि यह कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर की गई है।
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यहीं से सवाल शुरू हो गया है कि क्या यही नियम सभी नेताओं पर लागू होगा?
प्रधानमंत्री की अपील के सिर्फ दो दिन बाद मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन से सैकड़ों गाड़ियों का काफिला लेकर भोपाल पहुंचे। रास्तेभर स्वागत हुआ, हाईवे पर भीड़ लगी और कई जगह जाम जैसे हालात बने। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए।
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जब मीडिया ने सवाल पूछा तो सौभाग्य सिंह ठाकुर ने कहा कि शुरुआत में उनके साथ सिर्फ 25 गाड़ियां थीं, बाद में समर्थक जुड़ते गए और उन्हें अंदाजा ही नहीं लगा कि काफिला इतना बड़ा हो गया। यही दलील पहले सज्जन सिंह यादव ने भी दी थी। फर्क सिर्फ इतना रहा कि एक की कुर्सी चली गई और दूसरे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
गुना के पूर्व सांसद केपी यादव जब राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष बनने के बाद भोपाल पहुंचे, तब उनके साथ करीब 500 गाड़ियों का काफिला था। पूरे रास्ते शक्ति प्रदर्शन हुआ, लेकिन संगठन की तरफ से कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
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शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी भी इस विवाद में चर्चा में आए। वे पिछोर से करेरा तक करीब 300 गाड़ियों के काफिले के साथ निकले। मामला मंदिर विवाद से जुड़े दौरे का था। वीडियो वायरल हुए और राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा पहुंची।
इसके बाद खबरें यह भी आईं कि उनके बेटे का करीब 400 गाड़ियों का काफिला भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। प्रीतम लोधी पहले भी आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ को धमकाने वाले विवाद को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं।
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खंडवा के प्रभारी मंत्री (संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी) भी भारी काफिले और सायरन के साथ जिला समीक्षा बैठक में पहुंचे थे। सवाल उठे तो उन्होंने खुद माना कि इतने बड़े काफिले की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का पालन होना चाहिए और इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां साथ लेकर चलने का कोई औचित्य नहीं है।
इस पूरे विवाद के बीच भोपाल में 12 मई को जो तस्वीर सामने आई, उसने राजनीति के प्रतीकवाद पर भी सवाल खड़े कर दिए। उस दिन कई नवनियुक्त अध्यक्ष पदभार ग्रहण करने बीजेपी कार्यालय पहुंचे थे। मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह, मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी और मध्यप्रदेश कुश समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रभु दयाल कुशवाहा समर्थकों और लंबे काफिलों के साथ राजधानी पहुंचे।
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बीजेपी कार्यालय के बाहर लग्जरी गाड़ियों और एसयूवी की लंबी कतारें लगी थीं। लिंक रोड पर करीब दो घंटे तक जाम जैसे हालात रहे। पेट्रोल और डीजल फूंकते काफिले सड़क पर खड़े रहे। जैसे ही कैमरे ऑन हुए, नेताओं ने बीजेपी दफ्तर के गेट से अंदर तक करीब 50 से 80 मीटर का रास्ता ई-रिक्शा से तय किया।
बाद में मीडिया के सामने कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील का सम्मान करते हुए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया गया है। बाहर सड़क पर सैकड़ों गाड़ियां खड़ी थीं और अंदर सादगी का संदेश दिया जा रहा था। यही तस्वीर अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है।
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दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से सात अहम अपीलें की थीं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, विदेश यात्राएं कम करने और सादगी से जीवन जीने की बात कही थी।
वैश्विक ऊर्जा संकट और इजराइल-ईरान युद्ध का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश को अब संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की आदत डालनी होगी। वहीं, प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद मध्यप्रदेश में नेताओं के बड़े-बड़े काफिले सड़कों पर दिखाई दिए।
100 गाड़ियों का काफिला और चली गई कुर्सी
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मामला बढ़ा तो बीजेपी संगठन हरकत में आया। सज्जन सिंह यादव से जवाब मांगा गया था। उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने किसी को बुलाया नहीं था, लोग खुद उत्साह में जुड़ते चले गए। भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया ने भी कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान कर रहा है।
प्रदेश संगठन इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। मामले को अनुशासनहीनता माना गया और 14 मई 2026 को भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने आधिकारिक पत्र जारी कर सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी। पत्र में साफ लिखा गया कि यह कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर की गई है।
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यहीं से सवाल शुरू हो गया है कि क्या यही नियम सभी नेताओं पर लागू होगा?
बड़े नेताओं के बड़े काफिले... लेकिन कार्रवाई नहीं
सौभाग्य सिंह का शक्ति प्रदर्शन
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जब मीडिया ने सवाल पूछा तो सौभाग्य सिंह ठाकुर ने कहा कि शुरुआत में उनके साथ सिर्फ 25 गाड़ियां थीं, बाद में समर्थक जुड़ते गए और उन्हें अंदाजा ही नहीं लगा कि काफिला इतना बड़ा हो गया। यही दलील पहले सज्जन सिंह यादव ने भी दी थी। फर्क सिर्फ इतना रहा कि एक की कुर्सी चली गई और दूसरे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रीतम लोधी और 300 गाड़ियों का काफिला
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शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी भी इस विवाद में चर्चा में आए। वे पिछोर से करेरा तक करीब 300 गाड़ियों के काफिले के साथ निकले। मामला मंदिर विवाद से जुड़े दौरे का था। वीडियो वायरल हुए और राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा पहुंची।
इसके बाद खबरें यह भी आईं कि उनके बेटे का करीब 400 गाड़ियों का काफिला भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। प्रीतम लोधी पहले भी आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ को धमकाने वाले विवाद को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं।
मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने खुद माना- जरूरत नहीं थी
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खंडवा के प्रभारी मंत्री (संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी) भी भारी काफिले और सायरन के साथ जिला समीक्षा बैठक में पहुंचे थे। सवाल उठे तो उन्होंने खुद माना कि इतने बड़े काफिले की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का पालन होना चाहिए और इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां साथ लेकर चलने का कोई औचित्य नहीं है।
भोपाल में ई-रिक्शा वाली सादगी झूठी
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बीजेपी कार्यालय के बाहर लग्जरी गाड़ियों और एसयूवी की लंबी कतारें लगी थीं। लिंक रोड पर करीब दो घंटे तक जाम जैसे हालात रहे। पेट्रोल और डीजल फूंकते काफिले सड़क पर खड़े रहे। जैसे ही कैमरे ऑन हुए, नेताओं ने बीजेपी दफ्तर के गेट से अंदर तक करीब 50 से 80 मीटर का रास्ता ई-रिक्शा से तय किया।
बाद में मीडिया के सामने कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील का सम्मान करते हुए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया गया है। बाहर सड़क पर सैकड़ों गाड़ियां खड़ी थीं और अंदर सादगी का संदेश दिया जा रहा था। यही तस्वीर अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है।
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