एमपी में 2400 बस मालिकों को नोटिस; RTO पर भी होगी कार्रवाई, जानें मामला

Jitendra Shrivastava | Jul 20, 2026, 17:13 IST
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एमपी में 2400 बस मालिकों को नोटिस
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. मध्य प्रदेश में 2400 बसों की बॉडी की जांच हो रही है। सेफ्टी सर्टिफिकेट न होने पर बस मालिकों को नोटिस मिला। आरटीओ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • 2400 बसों की जांच शुरू, नहीं है सेफ्टी सर्टिफिकेट।
  • सेफ्टी सर्टिफिकेट न होने पर बस मालिकों को नोटिस।
  • आरटीओ अधिकारियों पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार।
  • बस मालिकों ने केंद्र को लिखा विरोध पत्र।
  • फार्म 22 ए-2 अपलोड करना अब जरूरी हुआ।
मध्य प्रदेश में 2400 बसों की बॉडी की जांच हो रही है। केंद्रीय पोर्टल पर सेफ्टी सर्टिफिकेट अपलोड न होने पर यह कार्रवाई शुरू हुई है। बस मालिकों को नोटिस भेजे गए हैं। बिना प्रमाण पत्र पंजीयन करने वाले आरटीओ अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। बस मालिकों ने केंद्र को पत्र लिखकर विरोध जताया है।

नियम क्या कहता है

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने फार्म 22 ए-2 को अनिवार्य किया है। यह फार्म बस बॉडी निर्माताओं को खुद अपलोड करना होगा। पहले बॉडी बनाने वालों को फार्म 22-बी में घोषणा पत्र देना होता था। अब यह प्रक्रिया बदल दी गई है।

मंत्रालय ने मध्य प्रदेश परिवहन विभाग को 2400 बसों की सूची सौंपी है। एक महीने बाद भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। इसी वजह से अब जांच और नोटिस की प्रक्रिया शुरू हुई है।

प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है

यह प्रमाण पत्र बस बॉडी की गुणवत्ता की गारंटी देता है। यह सुनिश्चित करता है कि बॉडी में सही सामग्री इस्तेमाल हुई है। फायर सेफ्टी मापदंड भी इसी में जांचे जाते हैं। प्रदूषण निवारण अधिनियम का पालन भी देखा जाता है।

हाल के समय में बसों में आगजनी की घटनाएं बढ़ी हैं। दुर्घटनाओं में भी इजाफा देखा गया है। इन्हीं वजहों से यह प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है। सुरक्षा को लेकर यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों की राय अलग

मध्य प्रदेश के अधिकारियों का कहना है कि आंकड़ा सही नहीं लगता। उनके अनुसार 1600 बसें सीधे कंपनी से बनकर आई हैं। इन बसों के पास पहले से प्रमाण पत्र होता है। बाकी बॉडी मेकर डीलरों को अधिकृत कंपनियों से प्रमाण पत्र लेना होता है।

इसका मतलब है कि सभी 2400 बसें एक जैसी श्रेणी में नहीं आतीं। अधिकारी इस सूची पर सवाल उठा रहे हैं। फिर भी जांच और नोटिस की प्रक्रिया जारी है।

किन पर होगी कार्रवाई

जो बॉडी मेकर प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करेंगे, उनकी बसों का पंजीयन रद्द हो सकता है। सिर्फ प्रमाण पत्र वाले बॉडी मेकर्स की बसें ही वैध मानी जाएंगी। इसके अलावा आरटीओ अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं। बिना प्रमाण पत्र पंजीयन करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

बस मालिकों ने जताया विरोध

बस मालिकों ने इस नोटिस का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है। उनका सवाल है कि बिना प्रमाण पत्र आरटीओ ने पंजीयन क्यों किया। यह सवाल अब विभाग के लिए भी असहज बन गया है।

बस मालिकों का कहना है कि सितंबर 2025 के बाद यह नियम अनिवार्य हुआ। तब तक कई बसों की बॉडी बनाने का काम शुरू हो चुका था। ऐसे में पुराने काम पर नया नियम लागू करना उन्हें गलत लगता है।

फार्म 22 ए-2 का महत्व

फार्म 22 ए-2 दरअसल बस बॉडी की तकनीकी जांच का प्रमाण है। इसे बॉडी निर्माता खुद केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करता है। इससे पहले यह जिम्मेदारी घोषणा पत्र के रूप में सीमित थी। नया नियम इसे ज्यादा पारदर्शी और सत्यापन योग्य बनाता है। इससे हर बस की बॉडी की गुणवत्ता का रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज रहेगा।

आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने पिछले महीने एक आदेश दिया था। इसमें बिना प्रमाण पत्र बसों का पंजीयन रद्द करने की बात थी। इसी आदेश के बाद विभाग ने बस मालिकों को नोटिस भेजे। यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ। कई बस संचालकों के लिए यह नोटिस अचानक आया झटका साबित हुआ।

राहत की भी संभावना

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भी एक बात मानी है। केंद्र ने सभी राज्यों के लिए यह प्रमाण पत्र अनिवार्य किया था। लेकिन जिन बसों का काम पहले से शुरू था, उन्हें छूट मिल सकती है। मध्य प्रदेश के बस मालिकों को भी यह राहत मिलने की संभावना है। हालांकि अभी तक इस पर कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।

यह मुद्दा क्यों अहम है

मध्य प्रदेश में हजारों बसें रोजाना यात्रियों को लेकर सड़कों पर चलती हैं। बसों की बॉडी की गुणवत्ता सीधे यात्री सुरक्षा से जुड़ी होती है। कमजोर या अप्रमाणित बॉडी दुर्घटना की स्थिति में जोखिम बढ़ा सकती है।

इसी वजह से केंद्र सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का फैसला किया। बस मालिकों और प्रशासन के बीच यह टकराव आगे भी जारी रह सकता है।

आगे क्या हो सकता है

अब यह मामला और आगे बढ़ सकता है। विभाग को सूची की दोबारा जांच करनी पड़ सकती है। कुछ बसों को छूट मिल सकती है, कुछ पर कार्रवाई हो सकती है।

आरटीओ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। केंद्र सरकार के जवाब पर भी सबकी नजर रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले पर और स्पष्टता आ सकती है।

FAQ

  1. मध्य प्रदेश में कितनी बसों की जांच हो रही है?
    मध्य प्रदेश में कुल 2400 बसों की बॉडी की जांच हो रही है। केंद्रीय पोर्टल पर सेफ्टी सर्टिफिकेट न होने पर यह कार्रवाई शुरू हुई। बस मालिकों को इसे लेकर नोटिस भी भेजे गए हैं।
  2. फार्म 22 ए-2 क्या है?
    फार्म 22 ए-2 बस बॉडी की तकनीकी और सेफ्टी जांच का प्रमाण पत्र है। इसे बॉडी निर्माता को खुद केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना होता है। बिना इसके बस का पंजीयन रद्द हो सकता है।
  3. बस मालिकों को क्या आपत्ति है?
    बस मालिकों का कहना है कि नियम लागू होने से पहले ही बसों की बॉडी बनना शुरू हो गई थी। उनका सवाल है कि बिना प्रमाण पत्र आरटीओ ने पंजीयन क्यों किया। उन्होंने इस बारे में केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है।
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