MP में सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त पर बवाल, CM ने नियम खारिज किया
Pawan Modiya | Jun 09, 2026, 22:27 IST
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मध्य प्रदेश सरकार ने 65 साल बाद सिविल सेवा नियम बदलने की कोशिश की। नए ड्राफ्ट में दो बच्चों की पुरानी शर्त बरकरार रखी गई। विवाद बढ़ा तो CM यादव ने प्रारूप रद्द कर दिया। 15 जून की डेडलाइन से पहले ही लिंक हटा दी गई। द सूत्र की खबर पर सीएम ने लिया संज्ञान।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश सरकार ने 65 साल बाद सिविल सेवा नियम बदलने का ड्राफ्ट जारी किया
- नए ड्राफ्ट में 2001 से चली आ रही दो बच्चों की शर्त फिर बरकरार रखी गई
- सामान्य प्रशासन विभाग ने 15 जून तक सुझाव मांगे थे, लेकिन पहले ही लिंक हटा दी
- CM डॉ. मोहन यादव ने दो बच्चों वाला प्रावधान हटाकर नया ड्राफ्ट जारी करने के आदेश दिए
- द सूत्र ने प्रमुखता से उठाया था यह मुद्दा, इसके बाद हरकत में आई राज्य सरकार
65 साल बाद बदलने की थी तैयारी
इसी को देखते हुए सरकार ने फैसला किया कि नए सिरे से मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम बनाए जाएं। जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने 4 जून 2026 को एक सार्वजनिक सूचना जारी की। इसमें बताया गया कि 'मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026' का मसौदा तैयार किया गया है। 15 जून 2026 तक नागरिक और कर्मचारी संगठन अपने सुझाव व आपत्तियां sogad1@mp.gov.in पर या gad.mp.gov.in पर भेज सकते थे।
एमपी सिविल सेवा आदेश
एमपी सिविल सेवा पोर्टल
ड्राफ्ट में क्या नया, क्या पुराना?
वरिष्ठता यानी सीनियरिटी (Seniority) तय करने का फॉर्मूला भी बदला। अब वरिष्ठता पदभार ग्रहण की तारीख से नहीं बल्कि चयन सूची में क्रम के अनुसार तय होगी। हर साल 1 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List - वरिष्ठता सूची) अपडेट होगी। एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा और पदोन्नति तीनों से आए लोगों में सीधी भर्ती वाले सबसे पहले माने जाएंगे।
पुराना नियम बरकरार, यहीं से शुरू हुआ विवाद
पिछले साल खुद जीएडी ने इस शर्त को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। CM की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। लेकिन नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई थी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ऐसा नियम हटाया जा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर 2025 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS - Sample Registration System) बुलेटिन 2023 के अनुसार मध्यप्रदेश की सकल प्रजनन दर 2.4 है, जो राष्ट्रीय दर 1.9 से अधिक है। इस आधार पर नियम हटाने की माँग उठती रही है।
FIR वाले नियम पर भी कर्मचारी संघ की आपत्ति
9 जून को ही पोर्टल से लिंक गायब
एमपी सिविल सेवा ड्राफ्ट पोर्टल
CM यादव ने दिया दखल, ड्राफ्ट किया रद्द
ड्राफ्ट में और क्या था?
अब आगे क्या?
जरूरी FAQ
मध्यप्रदेश सरकार ने 4 जून 2026 को सिविल सेवा नियम 2026 का नया ड्राफ्ट जारी किया था। इसमें प्रोबेशन खत्म होने के छह महीने में फैसला न होने पर कर्मचारी को स्वतः स्थायी मानने का प्रावधान था। सीनियरिटी पदभार की जगह चयन सूची के क्रम से तय होनी थी। लेकिन मुख्य विवाद 2001 से चली आ रही दो बच्चों की शर्त को बरकरार रखने और एफआईआर लंबित होने पर जॉइनिंग रोकने के प्रावधान को लेकर हुआ। इन दोनों बातों पर व्यापक विरोध हुआ।
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त अब लागू रहेगी या हटेगी?
CM डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद इस शर्त को नए ड्राफ्ट से हटाया जाएगा। मौजूदा प्रारूप रद्द कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग एक संशोधित ड्राफ्ट तैयार करेगा जिसमें दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को अपात्र मानने का प्रावधान नहीं होगा। यह संशोधित प्रारूप पोर्टल पर दोबारा प्रकाशित किया जाएगा। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पहले ही यह नियम हटाया जा चुका है।
15 जून की डेडलाइन से पहले पोर्टल लिंक क्यों हटाई गई और अब नागरिकों को दोबारा सुझाव देने का मौका मिलेगा?
CM के निर्देश के बाद मौजूदा विवादित ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाया गया। यही कारण था कि 15 जून की डेडलाइन से पहले ही लिंक बंद हो गई और दिनभर युवा व कर्मचारी फॉर्म नहीं भर पाए। हालाँकि नागरिकों को पहले से इसकी कोई सूचना नहीं दी गई जो एक बड़ी चूक थी। जब संशोधित ड्राफ्ट पोर्टल पर आएगा तब नागरिकों को दोबारा सुझाव देने का अवसर मिलेगा।
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