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Photograph: (thesootr)
News In Short
- तीन दिन के मंथन से कांग्रेस संगठन में बदलाव की उम्मीद।
- बैठक में समय की कमी से अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाई।
- नियुक्तियों के लिए स्पष्ट समय सीमा तय करने पर सहमति बनी।
- कार्यकर्ताओं में पदों को लेकर असंतोष और अपेक्षाएं बनी रही।
- बीजेपी सरकार पर आक्रामक हमले की रणनीति बनाई गई।
News In Dedtail
मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के नेतृत्व में इंदिरा भवन में लगातार बैठकें हो रही हैं, लेकिन अंदरूनी खींचतान और पदों को लेकर असंतोष अब भी साफ झलक रहा है। तीन दिन के इस संगठनात्मक मंथन से कार्यकर्ताओं को बड़ी उम्मीदें हैं, मगर जमीनी हकीकत अभी भी चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।
तय समय पर नहीं शुरू हुई अहम बैठक
सूत्रों के मुताबिक, इंदिरा भवन में एंड्रोमैट की बैठक सुबह 10 बजे शुरू होना तय थी, लेकिन प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के 1:30 बजे पहुंचने के बाद ही बैठक शुरू हो सकी। समय की कमी के चलते आज एजेंडे में शामिल कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई, जिन्हें अब कल की बैठक में उठाया जाएगा। इसे लेकर अंदरखाने असहजता भी देखी गई।
नियुक्तियों पर बनी सहमति
शनिवार को हुई बैठक में संगठन के भविष्य को लेकर एक अहम सहमति बनी। तय किया गया कि प्रदेश और जिला स्तर पर जो भी नियुक्तियाँ होंगी, उनके लिए स्पष्ट समय सीमा तय की जाएगी और उसी समय सीमा में उन्हें पूरा किया जाएगा।
नेतृत्व का मानना है कि नियुक्तियों में देरी ही असंतोष और गुटबाजी की सबसे बड़ी वजह बनती है। इसी मुद्दे पर कल भी विस्तार से चर्चा होगी।
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शिकायत या सिर्फ पद की मांग?
जब संगठन के महामंत्री संजय कांबले से पूछा गया कि क्या कुछ लोग शिकायतें लेकर आए थे, तो उन्होंने साफ कहा कि कोई स्पेसिफिक या औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है। अलग-अलग जगह से जो लोग आए थे, उन्होंने अपनी-अपनी बातें रखीं।
कहीं कोई ब्लॉक अध्यक्ष बनना चाहता है, कहीं किसी को किसी पद की अपेक्षा है। किसी ने कहा कि उसे यह पोस्ट नहीं मिली। फिलहाल इसी तरह की बातें सामने आई हैं। इस बयान से साफ है कि बैठक में असंतोष से ज्यादा पद और जिम्मेदारियों को लेकर अपेक्षाएं सामने आईं।
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गुट अलग-अलग, अपेक्षाएं अलग-अलग
पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही खींचतान अब बैठकों के दौरान खुलकर महसूस की जा रही है। हर स्तर पर कार्यकर्ता और नेताअपनी-अपनी दावेदारी रख रहे हैं।
हालांकि, नेतृत्व इसे संगठनात्मक संवाद बता रहा है, लेकिन बार-बार उठ रहे पदों के सवाल इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कलह अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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पंचायत से वार्ड तक संगठन पर फोकस
बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाली चुनौतियों को देखते हुए BLA-2, पंचायत और वार्ड स्तर पर संगठन के गठन को तेज किया जाएगा। संजय कांबले के मुताबिक, अब प्राथमिकता यह है कि बूथ से लेकर पंचायत तक संगठन समय पर और सक्रिय रूप से खड़ा हो, ताकि चुनावी तैयारी में कोई खालीपन न रहे।
जीतू पटवारी के सख्त तेवर
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन को सिर्फ बैठकों और फाइलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि बूथ, पंचायत और वार्ड स्तर तक संगठनात्मक ढांचा जल्द पूरा हो और जनता से सीधा संवाद बढ़ाया जाए।
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बीजेपी सरकार पर हमले की रणनीति
बैठकों में यह भी तय किया गया कि बीजेपी सरकार की नीतियों और योजनाओं की खामियों को आक्रामक तरीके से जनता के सामने रखा जाएगा। इसके लिए संगठनात्मक अभियानों को और धार देने की रणनीति बनाई जा रही है।
बैठकें बहुत हुईं, बदलाव कब दिखेगा?
कांग्रेस ने संगठन को धार देने के लिए भोपाल से बड़ा अभियान जरूर शुरू किया है, लेकिन पदों की खींचतान, देरी और अंदरूनी असंतोष अब भी चुनौती बने हुए हैं। अब देखना यह है कि यह तीन दिन का मंथन वाकई संगठन को नई दिशा देता है या फिर कांग्रेस की नूरा-कुश्ती पहले की तरह जारी रहती है।
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