टैलेंट हंट से पहले ही एमपी कांग्रेस का प्रोग्राम हंट! अंदरूनी खींचतान उजागर

मध्य प्रदेश कांग्रेस का टैलेंट हंट प्रोग्राम विवादों में उलझा, संगठनात्मक खींचतान बढ़ी। मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता के बीच टकराव से कार्यक्रम की गति रुकी।

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Ramanand Tiwari
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Even before the talent hunt, MP Congress program hunt! internal conflicts exposed

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस का टैलेंट हंट कार्यक्रम विवादों में फंसा। पार्टी के अंदरूनी मतभेदों ने कार्यक्रम को धीमा किया।
  • मीडिया प्रभारी अभय तिवारी और प्रवक्ता अभिनव बरौलिया को हटाए जाने की खबरें आईं, समन्वय पर सवाल उठे।
  • मीडिया विभाग में वर्चस्व की लड़ाई ने कार्यक्रम की गति को रोक दिया, दो सूचियां तैयार होने से टकराव बढ़ा।
  • अन्य राज्यों में कांग्रेस का टैलेंट हंट पहले से शुरू हो चुका है। मध्य प्रदेश में आंतरिक विवादों के कारण अटका।
  • कांग्रेस का यह कार्यक्रम भाजपा के प्रचार तंत्र से मुकाबला करने के लिए था, लेकिन विवादों में फंसा रहा। 

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. मध्य प्रदेश कांग्रेस का बहुप्रचारित नेशनल टैलेंट हंट प्रोग्राम शुरू होने से पहले ही विवादों में उलझ गया है। यह अभियान पार्टी को मजबूत करने और नए प्रतिभाशाली युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से लाया गया था। लेकिन, शुरू होने से पहले ही अंदरूनी खींचतान ने इसे संकट में डाल दिया है।

मीडिया विभाग में मचा बवाल

कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष का ताजा मामला तब सामने आया, जब मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी (कम्युनिकेशन हेड) अभय तिवारी और पार्टी प्रवक्ता अभिनव बरौलिया के नाम ऑफिशियल मीडिया ग्रुप से हटाए जाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इस घटनाक्रम ने संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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वर्चस्व की लड़ाई बनी रोड़ा

नेशनल टैलेंट हंट के तहत प्रवक्ताओं और मीडिया से जुड़े चेहरों की सूची तैयार की जानी थी। मीडिया प्रभारी अभय तिवारी द्वारा तैयार की गई सूची में मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का नाम शामिल नहीं था। मामला प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी तक पहुंचा, जहां स्थिति संभालने की कोशिश की गई।

दो सूचियों ने बढ़ाया टकराव

इसके बाद मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक द्वारा अलग से सूची बनाए जाने की बात सामने आई। यह सूची मीडिया प्रभारी के पास पहुंची, जहां इसे प्रक्रिया के अनुरूप न मानते हुए स्वीकार नहीं किया गया। यहीं से टकराव और गहरा गया और टैलेंट हंट कार्यक्रम ठहराव की स्थिति में पहुंच गया।

अन्य राज्यों से पीछे रह गई एमपी कांग्रेस

देश के कई राज्यों में कांग्रेस का टैलेंट हंट अभियान शुरू हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश में आपसी मतभेदों के चलते यह कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ पाया। संगठन को मजबूती देने की मंशा, अंदरूनी राजनीति में उलझती दिख रही है।

ऑफिशियल ग्रुप में भी अविश्वास

स्थिति यहां तक पहुंच गई कि कांग्रेस के ऑफिशियल मीडिया ग्रुप में ही जिम्मेदार पदाधिकारी एक-दूसरे की भूमिका पर सवाल उठाने लगे। यहां तक कि ग्रुप में बाहरी विचारधारा से जुड़े लोगों की मौजूदगी को लेकर भी आरोप सामने आए, जिससे पार्टी की आंतरिक असहजता उजागर हुई।

पुराना इतिहास, नया विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब प्रदेश कांग्रेस इस तरह की अंदरूनी रस्साकशी में फंसी हो। इससे पहले भी वर्चस्व की लड़ाइयों ने संगठन को नुकसान पहुंचाया है। मौजूदा विवाद को उसी सिलसिले की अगली कड़ी माना जा रहा है।

क्या है नेशनल टैलेंट हंट का मकसद

कांग्रेस पार्टी देशभर में तकनीकी रूप से दक्ष, वैचारिक रूप से मजबूत और समर्पित युवाओं को संगठन से जोड़ना चाहती है। चयनित प्रतिभाओं को प्रवक्ता, मीडिया पैनलिस्ट, रिसर्च कोऑर्डिनेटर और प्रचार कोऑर्डिनेटर जैसे दायित्व सौंपे जाने हैं।

भाजपा के प्रचार मॉडल से मुकाबले की रणनीति

भाजपा के आक्रामक प्रचार तंत्र का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने यह रणनीति तैयार की है। सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया तक पार्टी की बात प्रभावी ढंग से रखने के लिए यह अभियान अहम माना जा रहा है।

विचारों में सामंजस्य न बैठने के कारण हटाया

अभिनव बरौलिया प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि “संभव है कि विचारों के सामंजस्य न बैठने के कारण मुझे और अभय तिवारी को ऑफिशियल ग्रुप से हटाया गया हो। लेकिन हमारा उद्देश्य पार्टी की बात मजबूती से रखना है और हम संगठन के हित में काम करते रहेंगे।”

इधर मुकेश नायक, प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि “अभय तिवारी को ऑफिशियल मीडिया ग्रुप से रिमूव किए जाने की बात तथ्यात्मक नहीं है। संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत संवाद और समन्वय बना हुआ है। 

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सवाल वही-कब थमेगा कांग्रेस का घमासान?

नेशनल टैलेंट हंट जैसे अहम कार्यक्रम का विवादों में फंसना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या कांग्रेस पहले अपने अंदरूनी मतभेदों से उबर पाएगी। जब तक यह रस्साकशी खत्म नहीं होती, तब तक संगठन को मजबूत करने की कोशिशें कागजों तक सीमित नजर आती हैं।

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