एमपी पुलिस का डिजिटल तैयारी पर जोर, हर थाने में डिजिटल रजिस्टर बनाने का सुझाव
Ramanand Tiwari | Jun 28, 2026, 22:16 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश में डिजिटल पुलिसिंग मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। हर थाने में डिजिटल रजिस्टर, सुरक्षित डिजिटल साक्ष्य और चार्जशीट के साथ रिकॉर्ड कोर्ट भेजने का सुझाव दिया गया है।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- हर थाने में डिजिटल रजिस्टर तैयार करने का सुझाव।
- चार्जशीट के साथ डिजिटल रिकॉर्ड कोर्ट भेजने पर जोर।
- डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।
- ऑनलाइन समन, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बढ़ते उपयोग का उल्लेख।
- मध्य प्रदेश में डिजिटल पुलिसिंग के प्रयासों की सराहना भी की गई।
जस्टिस संजीव का कहना था कि यदि आरोपी और साक्ष्यों का डिजिटल चार्जशीट के साथ रिकॉर्ड कोर्ट तक पहुंचे तो समन और वारंट जैसी कानूनी प्रक्रियाएं पहले से अधिक तेज और प्रभावी हो सकती हैं।
भोपाल में पुलिस अधिकारियों के बीच रखे सुझाव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जस्टिस संजीव एस. कालगांवकर ने कहा कि मध्य प्रदेश ने डिजिटल पुलिसिंग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, लेकिन अभी भी कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।
कालगांवकर ने ऑनलाइन एफआईआर और ऑनलाइन चार्जशीट से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की वास्तविक क्षमता इससे कहीं अधिक है और सभी विभागों को मिलकर इस दिशा में लगातार काम करना होगा।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने पर उठाया सवाल
कालगांवकर ने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत और व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करना समय की जरूरत है। केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
हर थाने में डिजिटल रिकॉर्ड रखने की सलाह
यदि यही रिकॉर्ड चार्जशीट के साथ न्यायालय तक पहुंचे तो कोर्ट सीधे संबंधित व्यक्ति को समन और वारंट जारी करने की प्रक्रिया को और तेज बना सकेगा।
मोबाइल तकनीक से आसान हो रही न्यायिक प्रक्रिया
ऑनलाइन सेवाओं के आंकड़े भी साझा किए
अधिकारियों के अनुसार डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से दस्तावेजों के आदान-प्रदान में तेजी आई है और बड़ी मात्रा में कागज की बचत भी हुई है।
कार्यक्रम में रखे गए सुझाव यह संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश में पुलिस और न्यायिक व्यवस्था को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ साक्ष्यों की सुरक्षित स्टोरेज और मजबूत तकनीकी ढांचा विकसित करना भी उतना ही जरूरी होगा।
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