एमपी की अदालतों में मुकदमों का अंबार, 66 जजों पर एक लाख से ज्यादा केस पेंडिंग, हर पांचवें केस में 3 माह बाद की तारीख

Aman Vaishnav | Oct 04, 2026, 08:35 IST
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<br>भोपाल जिला अदालत में 66 जजों पर 1.48 लाख मुकदमों का भारी बोझ।
भोपाल जिला अदालत में 66 जजों पर 1.48 लाख मुकदमों का भारी बोझ।

मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में मुकदमों का भारी बोझ बढ़ गया है। भोपाल कोर्ट में 66 जजों के पास एक लाख 48 हजार केस पेंडिंग हैं। यहां हर पांचवें केस में तीन महीने से लंबी तारीख मिल रही है। पूरे प्रदेश में ऐसे मुकदमों की कुल संख्या दो लाख 72 हजार पहुंच चुकी है। लंबी तारीखों वाले इन मामलों को एक्सेसिव डेट केस कहा जाता है।

प्रदेश की जिला अदालतों में लंबित मामलों का दबाव

मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में 21 लाख से अधिक केस पेंडिंग हैं। इनमें 2 लाख 72 हजार 435 मामले अत्यधिक लंबी तारीख वाले हैं। ऐसे मामलों में अगली सुनवाई तीन महीने से ज्यादा बाद तय होती है। इस व्यवस्था को न्यायिक भाषा में एक्सेसिव डेट केस (Excessive Date Case) कहा जाता है। पक्षकार अदालत आकर केवल अगली लंबी तारीख लेकर लौट रहे हैं।

एक्सेसिव डेट मामलों में पहले स्थान पर इंदौर

लंबी तारीख वाले मामलों में पूरे प्रदेश में इंदौर पहले नंबर पर है। इंदौर में 67 हजार 108 मामलों में तीन महीने से अधिक की तारीख दी गई। इस सूची में 26 हजार 611 मामलों के साथ भोपाल दूसरे स्थान पर आता है। भोपाल जिला अदालत में कुल एक लाख 48 हजार केस अभी लंबित पड़े हैं। यानी यहां हर पांचवें केस में तीन महीने बाद की तारीख मिलती है।

मध्यप्रदेश की जमीन का केस छत्तीसगढ़ में क्यों चलेगा? हाई कोर्ट ने CPC धारा 17 के तहत दिया फैसला | Why will the case of land in Madhya Pradesh be heard in Chhattisgarh? High Court gave decision under CPC Section 17
मध्यप्रदेश की जमीन का केस छत्तीसगढ़ में क्यों चलेगा? हाई कोर्ट ने CPC धारा 17 के तहत दिया फैसला
01 Oct 2026 ,
By Umeshwari Baghel
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर एक ही विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग राज्यों या अदालतों की सीमा में आती है तो मुकदमा उस अदालत में भी चल सकता है जहां संबंधित संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो।
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर एक ही विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग राज्यों या अदालतों की सीमा में आती है तो मुकदमा उस अदालत में भी चल सकता है जहां संबंधित संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो।

जजों के खाली पद बने सुस्त न्याय व्यवस्था की वजह

मुकदमों के भारी अनुपात में जजों की गंभीर कमी बड़ी वजह बन चुकी है। भोपाल जिला न्यायालय में कुल 112 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं। इसके विपरीत वर्तमान समय में यहां केवल 66 जज ही पदस्थ हैं। कोर्ट में जजों के 46 पद पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं। हर अदालत पर औसतन 4 से 6 हजार मुकदमों का बोझ है। करीब 20 प्रतिशत मामले पांच साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं।

मध्य प्रदेश के टॉप-5 जिले जहां पेंडिंग केसों की भरमार

जिलाकुल पेंडेंसीएक्सेसिव डेट केसफीसदी
इंदौर2 लाख 47 हजार 56067 हजार 18027%
भोपाल1 लाख 48 हजार 92826 हजार 61118%
रीवा1 लाख 1 हजार 1917 हजार 90118%
जबलपुर1 लाख 47 हजार 75612 हजार 4598%
ग्वालियर93 हजार 3354 हजार 3495%

भोपाल की टॉप 5 कोर्ट जहां मिल रही लंबी तारीखें

भोपाल की कई अदालतों में लंबी तारीखों वाले मुकदमों की संख्या काफी अधिक है। सिविल जज सीनियर डिवीजन शरद जायसवाल की कोर्ट में 2188 ऐसे केस हैं। सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय पाठक की कोर्ट में 1924 मामले दर्ज हैं।

वहीं पलक मनीष राय की कोर्ट में यह संख्या 1647 दर्ज की गई। सिविल जज जूनियर डिवीजन आकांक्षा उछारिया की अदालत में 1541 मामले हैं। सिविल जज प्रियंक दुबे की अदालत में 1404 ऐसे केस लंबित हैं।

उच्च अदालतें करती हैं एक्सेसिव डेट मामलों की निगरानी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस दीपक अग्रवाल ने नियम स्पष्ट किए हैं। यदि अगली सुनवाई तीन माह बाद तय हो तो सिस्टम दर्ज करता है। कंप्यूटर सिस्टम ऐसे मामलों को खुद एक्सेसिव डेट केस श्रेणी में डालता है। जिस जिले में यह संख्या अधिक हो वहां न्याय धीमा माना जाता है। हाई कोर्ट इसी डेटा के आधार पर निचली अदालतों की निगरानी करता है।

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FAQ

  1. मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में कितने मामले लंबित हैं?
    मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में 21 लाख से अधिक मामले पेंडिंग हैं।
  2. एक्सेसिव डेट केस का क्या अर्थ है?
    एक्सेसिव डेट केस वह मामले होते हैं जिनकी अगली सुनवाई की तारीख तीन महीने से अधिक की होती है।
  3. भोपाल की अदालतों में लंबी तारीखों वाले मामलों की संख्या कितनी है?
    भोपाल की जिला अदालत में कुल एक लाख 48 हजार केस लंबित हैं, जिनमें से 26 हजार 611 मामलों में लंबी तारीख दी गई है।
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