बैतूल में बोले शिक्षामंत्री उदय प्रताप, शिक्षकों को लगानी होगी ई-अटेंडेंस

Sanjay Dhiman | Jul 05, 2026, 21:45 IST
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Photograph: (the sootr)

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बैतूल में कहा, ई-अटेंडेंस में कोई ढील नहीं मिलेगी। टीईटी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन होगा। चेक पोस्ट भी फिर शुरू हो सकते हैं।

बैतूल में रविवार को स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह एक कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने ई-अटेंडेंस को लेकर सख्त रुख दिखाया। मंत्री ने कहा कि टीईटी का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। नेटवर्क समस्या वाले गांवों के शिक्षकों को राहत दी जा रही है। परिवहन विभाग के चेक पोस्ट भी दोबारा शुरू हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इसी बीच रविवार को बैतूल में एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कई अहम मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने शिक्षकों की पात्रता परीक्षा, ई-अटेंडेंस व्यवस्था और परिवहन विभाग के चेक पोस्ट, तीनों विषयों पर खुलकर बात की।

टीईटी पर मंत्री का पक्ष

मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की पात्रता परीक्षा यानी टीईटी (TET – Teacher Eligibility Test) का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने साफ किया कि कोर्ट जो भी निर्देश देगा, सरकार उसका पूरी तरह पालन करेगी। विभाग इसके लिए पहले से तैयारी कर रहा है।

उन्होंने बताया कि शिक्षकों की मुख्य चिंता यह है कि नियुक्ति के समय जो मापदंड लागू थे, अब नए मापदंड क्यों लाए जा रहे हैं। मंत्री के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। सॉलिसिटर जनरल के जरिए कोर्ट को बताया गया कि शिक्षकों का चयन उसी समय के नियमों के अनुसार हुआ था। इसके बावजूद अगर कोर्ट परीक्षा कराने को कहता है, तो सरकार वह भी मानेगी।

ई-अटेंडेंस में सख्ती बरकरार

ई-अटेंडेंस को लेकर मंत्री का रुख सबसे स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक को तय समय पर स्कूल पहुंचकर हाजिरी दर्ज करनी होगी। सुबह स्कूल आना और शाम तक जिम्मेदारी निभाना, यह सभी के लिए जरूरी है। मंत्री ने यह भी कहा कि ई-अटेंडेंस का पालन ईमानदारी से होना चाहिए।

आंकड़े बताते हैं कि करीब 98 प्रतिशत अतिथि शिक्षक और 90 प्रतिशत नियमित शिक्षक पहले से ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों की वजह से पूरी व्यवस्था नहीं रोकी जा सकती। यानी बाकी बचे शिक्षकों को भी जल्द इस दायरे में लाया जाएगा।

नेटवर्क वाले गांवों को राहत

हर शिक्षक के लिए मोबाइल या स्वीकृत माध्यम से हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य है। लेकिन जिन इलाकों में नेटवर्क की दिक्कत है, वहां छूट दी जा रही है। महिलाओं, बीमार शिक्षकों और मातृत्व अवकाश पर मौजूद महिला अतिथि शिक्षकों को भी जरूरी राहत मिली है।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के करीब एक हजार गांवों में नेटवर्क की समस्या है। ऐसे लगभग 7 से 8 प्रतिशत शिक्षकों को छूट दी जा रही है। सरकार का मकसद विसंगतियां दूर कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

चेक पोस्ट फिर हो सकते चालू

परिवहन विभाग के इंटीग्रेटेड चेक पोस्टों पर भी मंत्री ने अहम बात कही। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन्हें दोबारा शुरू किया जा सकता है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने पहले ही रिव्यू पिटिशन दायर कर दी है।

मंत्री के मुताबिक सरकार अध्ययन कर रही है कि जिन चेक पोस्टों पर पहले बड़ा निवेश हुआ है, वहां परिवहन, खनिज, कृषि और वाणिज्य विभागों का संयुक्त अमला तैनात किया जाए। इन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी योजना है। अगर यह व्यवस्था पारदर्शी और असरदार साबित होती है, तो इसे लागू करने पर विचार होगा।

FAQ

  1. टीईटी पर सरकार का क्या रुख है?
    मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सरकार कोर्ट के फैसले का पूरी तरह पालन करेगी। मध्य प्रदेश सरकार पहले ही कोर्ट में अपना पक्ष रख चुकी है।
  2. ई-अटेंडेंस में किसे छूट मिलेगी?
    नेटवर्क समस्या वाले गांवों के शिक्षकों को छूट है। बीमार और मातृत्व अवकाश पर मौजूद महिला शिक्षकों को भी राहत मिली है। बाकी सभी को हाजिरी अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।
  3. क्या चेक पोस्ट फिर से शुरू होंगे?
    सरकार इस पर अध्ययन कर रही है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद रिव्यू पिटिशन दायर की गई है। पारदर्शी व्यवस्था बनने पर चेक पोस्ट दोबारा शुरू हो सकते हैं।
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