बिजली कंपनी में फर्जी नियुक्तियों का खुलासा: संविदा और अनुकंपा नियुक्तियों में बड़ी गड़बड़ी

मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में फर्जी संविदा और अनुकंपा नियुक्तियों का मामला सामने आया है, जिसमें जाली सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया। सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।

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Sanjay Sharma
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Photograph: (the sootr)

News in Short

  • मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में फर्जी नियुक्तियों का मामला सामने आया है।
  • महाराष्ट्र के जाली सर्टिफिकेट पर नियुक्तियां दी गईं, जिनमें अनुकंपा और संविदा पद शामिल हैं।
  • बालाघाट और छिंदवाड़ा में कई युवाओं को फर्जी आईटीआई सर्टिफिकेट पर नौकरी मिली।
  • जांच में सरकारी अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
  • ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कार्रवाई के लिए अधिकारियों से जवाब तलब किया है। 

News in Detail

BHOPAL. मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में फर्जी नियुक्तियों का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र कम्प्युटर एवं तकनीकी शिक्षा बोर्ड से जुड़े फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर कई संविदा और अनुकंपा नियुक्ति की गई हैं। मामले में सरकार तक शिकायत पहुंचने के बाद पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी को ऐसे कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। 

मध्य प्रदेश के बिजली विभागों में एक गंभीर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। राज्य की पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी ने महाराष्ट्र के जाली सर्टिफिकेटों पर कई संविदा और अनुकंपा नियुक्तियां की हैं। ये सर्टिफिकेट बालाघाट के सिद्धेश औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र के कर्ताधर्ता उमेश गिरी द्वारा थमाए गए हैं। इन सर्टिफिकेट के सहारे छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों में 40 से ज्यादा अनुकंपा और संविदा नियुक्तियां दी गई हैं। जबकि मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी जांच के बाद इन्हें अमान्य कर चुकी हैं। इस वजह से भी सर्टिफिकेट की वैधता और नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का अंदेशा गहरा गया है। 

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ठगे गए युवा ने की शिकायत

शिकायतकर्ता राहुल चौधरी के आईटीआई सर्टिफिकेट को मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद राहुल द्वारा उमेश गिरी के सामने आपत्ति दर्ज कराई गई। मामला उजागर होने से बचने गिरी ने उन्हें दूसरा सर्टिफिकेट बनाकर दे दिया, जो नियमों के खिलाफ था। इन दोनों सर्टिफिकेट में कई अंतर  हैं। क्योंकि दोनों सर्टिफिकेट में सीट नंबर और विषय अलग- अलग हैं। 

नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी

पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी की भर्ती प्रक्रिया में यह गड़बड़ी सामने आई, जहां बालाघाट और छिंदवाड़ा जैसे इलाकों के कई युवाओं को फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी मिल गई। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि इन सर्टिफिकेटों पर पिछले एक दशक में 7 से 35 लोगों को नौकरी दी गई, जिनमें से कई अनुकंपा नियुक्तियां भी शामिल हैं।

मंत्री के निर्देश पर हो रही जांच

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी के अधिकारियों से जवाब तलब किया है। पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी की अधिकारी लता नायर का कहना है कि जांच के निर्देश दिए गए हैं। संबंधितों के सर्टिफिकेट की जांच होगी। वहीं इस गड़बड़ी को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अब तक जांच ही शुरू नहीं हुई है। 

आईटीआई संचालक दे रहे दलील

फर्जी नियुक्तियों के मामलों में अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, लेकिन अधिकारी इस मामले में जांच की बात कर रहे हैं। उमेश गिरी ने इस पर सफाई दी है कि उन्होंने सिर्फ छात्रों को प्रशिक्षण दिया और सर्टिफिकेट बोर्ड से जारी होते हैं। हालांकि, जब उनसे एक ही सत्र के लिए दो सर्टिफिकेट जारी करने के बारे में सवाल किया गया, तो वे इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

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तकनीकी कारण को बता रहे वजह  

वहीं, महाराष्ट्र कंप्यूटर एवं तकनीकी शिक्षा बोर्ड के संचालक प्रभात दिकवार का कहना है कि सर्टिफिकेट में बदलाव तकनीकी कारण और सिस्टम अपडेशन की वजह से हो सकता है। हांलाकि एक ही सत्र के लिए दो सर्टिफिकेट जारी होने के सवाल पर वे पल्ला झाड़ गए। उनका कहना था वे इस संबंध में जानकारी जुटा रहे हैं। 

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