एमपी के सरकारी कर्मचारियों का वेतन मामला SC पहुंचा, सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
Aman Vaishnav | Apr 26, 2026, 11:05 IST
mp employees salary case supreme court
मध्य प्रदेश के 40 हजार सरकारी कर्मियों की सैलरी और एरियर का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के प्रोबेशन पीरियड के दौरान कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन नियम को चुनौती दी है।
मध्य प्रदेश के लगभग 40 हजार सरकारी कर्मचारियों के वेतन और एरियर से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें तीन साल के प्रोबेशन पीरियड के दौरान कर्मचारियों को मिलने वाले 70, 80, और 90 प्रतिशत वेतन के नियम को असंवैधानिक घोषित किया गया था।
राज्य सरकार द्वारा दायर की गई एसएलपी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की डिफेक्ट लिस्ट में है। इस मामले में रजिस्ट्री ने कुछ तकनीकी गलतियां पाई हैं। सरकार को इन गलतियों को ठीक करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। जब तक ये गलतियां सही नहीं होतीं, तब तक मामले की औपचारिक सुनवाई शुरू नहीं हो सकेगी।
इधर सरकार की अपील के खिलाफ कर्मचारियों ने पूरी तैयारी कर ली है। हाई कोर्ट में जीत के बाद वसीम अकरम, अमनदीप सिंह बग्गा, प्रियंका श्रीवास्तव और असद सिद्धिकी ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया है।
इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट अब सरकार के साथ- साथ कर्मचारियों का पक्ष भी सुनेगा। बिना उनकी सुनवाई किए हाई कोर्ट के आदेश पर कोई एकतरफा स्टे नहीं लगा सकेगा।
दरअसल 6 जनवरी 2026 को जबलपुर हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया था। इसमें 2019 के उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसमें नए कर्मचारियों के वेतन में कटौती का प्रावधान था।
कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए कहा था कि, कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति के पहले दिन से ही 100 प्रतिशत वेतन और पिछला बकाया दिया जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाने का मुख्य कारण वित्तीय दबाव है। अगर हाई कोर्ट का आदेश लागू होता है तो सरकार को एरियर के रूप में 400 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि प्रोबेशन पीरियड और वेतन की शर्तें तय करना उसका नीतिगत अधिकार है।
फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में लटका हुआ है। इससे प्रदेश के हजारों शिक्षक, पुलिसकर्मी और कर्मचारियों का एरियर और बढ़ा हुआ वेतन अटक गया है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की पहली सुनवाई पर हैं, जो सरकार द्वारा कमियां दूर करने के बाद मई में हो सकती है।
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गलती ठीक करने 90 दिन का समय
सरकार की अपील के खिलाफ कर्मचारी
इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट अब सरकार के साथ- साथ कर्मचारियों का पक्ष भी सुनेगा। बिना उनकी सुनवाई किए हाई कोर्ट के आदेश पर कोई एकतरफा स्टे नहीं लगा सकेगा।
जनवरी में सुनाया था फैसला
कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए कहा था कि, कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति के पहले दिन से ही 100 प्रतिशत वेतन और पिछला बकाया दिया जाए।
आदेश लागू तो 400 करोड़ का भुगतान
कर्मचारियों का एरियर और बढ़ा हुआ वेतन अटका
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