सीएम डॉ. मोहन यादव के ट्रेस एंड ट्रेक फैसले से शराब ठेकेदार और तस्करों में मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने शराब तस्करी रोकने के लिए 'ट्रेस एंड ट्रेक' सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से हर शराब की बोतल की डिजिटल मॉनीटरिंग की जाएगी।

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Sanjay Gupta
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  • मध्य प्रदेश में शराब तस्करी रोकने के लिए मोहन सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है।
  • मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से शराब का ट्रेस एंड ट्रेक सिस्टम लागू होगा। 
  • शराब की हर बोतल की डिजिटल माध्यम से निगरानी की जाएगी।
  • तस्करी पकड़े जाने पर अब सीधे ठेकेदार को आरोपी बनाया जा सकेगा।
  • गुजरात और अन्य राज्यों में होने वाली शराब तस्करी पर रोक लगेगी।

INDORE. मुख्यमंत्री मोहन यादव के फैसले ने एमपी के सभी शराब ठेकेदार और तस्करों की नींद उड़ा दी है। इस मामले में सभी शराब लाइसेंसियों की और अधिकारियों के साथ भोपाल में बैठक हो गई है। उन्हें इस फैसले को लेकर बता दिया गया है। इससे हड़कंप मच गया है। 

भोपाल बैठक में यह हुआ

भोपाल में आबकारी विभाग की हाल ही में बड़ी बैठक हुई। इसमें शराब ठेकेदारों, लाइसेंधारकों व अन्य को बुलाया गया। इसमें सीएम डॉ. मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन द्वारा लिए गए ट्रेस एंड ट्रेक फैसले की जानकारी दे दी गई। इसे सुनते ही सभी के होश उड़ गए। सभी ने इसका विरोध किया और इसे टालने की मांग कर दी।

इससे आबकारी लाइसेंस राजस्व कम होने की भी दुहाई दी गई। लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया कि यह फैसला वित्तीय साल 2026-27 से लागू हो रहा है। यानी एक अप्रैल 2026 के नए ठेकों से इसे लागू कर दिया जाएगा। 

क्या है ट्रेस एंड ट्रेक मामला

यह नया तकनीकी सिस्टम है। इसके तहत हर शराब बॉटल की मॉनीटरिंग होगी। कोई बॉटल किस डिस्टलरी से बनी, फिर आबकारी के किस माल गोदाम पर गई। फिर किस ठेकेदार की किस लाइसेंसी दुकान पर गई, यह सिस्टम रहेगा। अभी एक ही बैच की हजारों बॉटल बनती है, जो अलग-अलग ठेकेदारों के पास जाती है। ऐसे में जब गुजरात या अन्य राज्यों में शराब की तस्करी होती है।

यह पकड़ाई जाती है तो शराब ठेकेदार, डिस्टलरीज का नाम सामने नहीं आता है। जब तक कि वाहन चालक ही बयान नहीं दे दे, जो अधिकांश केस में नहीं होता है। ऐसे में बड़े ठेकेदार हमेशा बच जाते हैं। इस सिस्टम के जरिए जब भी कोई अवैध तरीके से शराब की तस्करी करेगा तो बॉटल पर इस सिस्टम के जरिए साफ हो जाएगा कि यह किस ठेकेदार के पास थी। इससे उस ठेकेदार को सीधे आरोपी बनाया जा सकेगा। इसी बात को लेकर ठेकेदार विरोध कर रहे हैं। 

तीन साल से टाला जा रहा है फैसला

इस फैसले को लागू करने की तैयारी तीन साल से है। शराब ठेकेदार और डिस्टलरीज संचालक कोई ना कोई आड़ लेकर और विरोध जताते हुए इस फैसले को टलवाने में कामयाब रहे हैं। इस बार सीएस अनुराग जैन ने आबकारी विभाग को साफ कर दिया है कि यह फैसला अब नहीं टाला जाएगा। इसे इसी वित्तीय साल में एक अप्रैल 2026 में नए ठेकों के साथ ही लागू किया जाएगा। 

क्यों राजस्व गिरने की बात

दरअसल बॉर्डर वाले जिलों से शराब का खासकर गुजरात व अन्य राज्यों में तस्करी आम बात है। गुजरात में हर दिन औसतन एक करोड़ की शराब तस्करी होती है। ऐसे में बार्डर वाले जिलों को अधिक रेट पर उठाया जाता है। जब तस्करी रुकेगी तो ठेकेदार इन ठेकों को कम भाव पर लेगा क्योंकि तस्करी से होने वाला फायदा खत्म होगा। इसी तरह इंदौर से भी कई ठेकेदार रिस्क लेकर गुजरात लाइन चलाने में लगे रहते हैं। 

हाल ही में एक करोड़ से ज्यादा की शराब पकड़ी गई है। ऐसे में यह ठेकेदार फिर ठेके लेने के लिए दुकानों की बोली कम लगाएंगे, जिससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ने की बात लाइसेंसी कह रहे हैं। अब मोहन सरकार इस तस्करी को रोकने के लिए यह अहम फैसला ले रही है।

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