इंजीनियर्स की लापरवाही से एमपी सरकार को 2800 करोड़ का घाटा

मध्य प्रदेश की एकल ग्राम नल-जल योजना में इंजीनियरों की गड़बड़ी से 2800 करोड़ का नुकसान हुआ है। योजना की लागत बढ़ने से 7 लाख घरों में पानी नहीं पहुंचेगा।

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Anjali Dwivedi
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mp single village water scheme loss 2800 crore
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मध्य प्रदेश की एकल ग्राम नल-जल योजना में इंजीनियरों ने सरकार को 2800 करोड़ का बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ये बात उस समय सामने आई, जब मुख्य सचिव अनुराग जैन के आदेश पर 28 हजार गांवों की नल-जल योजनाओं की जांच की गई। आठ हजार गांवों में ऐसी गलतियां पाई गई हैं। इस कारण 20 हजार करोड़ की योजना का खर्च बढ़कर लगभग 23 हजार करोड़ हो गया है।

बता दें कि यह लागत जिन इंजीनियरों की वजह से बढ़ी, उनमें से 44 इंजीनियर तो रिटायर हो चुके हैं। उनको रिटायर हुए चार साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है। जबकि छह इंजीनियरों की मौत हो गई है और एक ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में सारा नुकसान अब सरकार के मत्थे आ गया है। 

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90 कर्मचारियों के खिलाफ आरोप-पत्र जारी

सरकार का यह नियम है कि, अगर किसी कर्मचारी ने रिटायरमेंट लिया हो या इस्तीफा दिया हो, तो उनके खिलाफ चार साल के अंदर ही कार्रवाई हो सकती है। अब, बाकी 90 कर्मचारियों के खिलाफ आरोप-पत्र जारी कर दिए गए हैं। इन कर्मचारियों की सैलरी में इंक्रीमेंट रोका गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच की तैयारी की जा रही है।

34 कर्मचारियों को शासन के स्तर से और 40 इंजीनियरों को प्रमुख अभियंता के स्तर से चार्जशीट दी गई है। वहीं 16 कर्मचारी रिटायर हो गए थे, लेकिन उनका चार साल का समय पूरा नहीं हुआ था, इसलिए उन्हें भी शासन के स्तर से चार्जशीट जारी की गई है। 

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सात लाख घरों में पानी पहुंचाने का संकट

योजना की लागत 15% बढ़ाकर ऊंचे स्तर पर भेज दी गई है। पीएचई के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने विभाग की ओर से यह प्रस्ताव दिया है। अगर लागत को रिवाइज नहीं किया गया तो 7 लाख घरों में पानी नहीं पहुंचेगा।

जब यह पूछा गया कि लागत क्यों बढ़ी, तो 28 हजार गांवों का रिव्यू किया गया। 8 हजार गांवों में कुछ कमियां पाई गईं। इन कमियों को सुधारने के लिए वित्तीय गणना की गई और 2800 करोड़ रुपए की जरूरत बताई गई।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि जिनकी गलती थी, उन्हें सामने लाओ। इसके बाद 141 ईई, असिस्टेंट इंजीनियर और सब इंजीनियरों की गलती सामने आई। इसे योजना में अब तक की सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है।

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क्या बोले- PHE के प्रमुख सचिव 

जांच के साथ-साथ एकल ग्राम नल-जल योजना को सही तरीके से लागू करने की कोशिशें भी चल रही हैं। पीएचई के प्रमुख सचिव पी नरहिर का कहना है कि अब 28 हजार गांवों में नल जल की पहुंच 93% तक हो गई है। इंजीनियरों की कमी की वजह से लागत बढ़ी है। चार साल से ज्यादा समय पहले जिन इंजीनियरों का रिटायरमेंट हो गया, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकेगी। बाकी जो इंजीनियर हैं, उनके खिलाफ आरोप-पत्र दे दिए गए हैं और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। 

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अधूरी स्कीम से DPR गड़बड़

  • पुरानी योजना के तहत जो काम हुए, उनमें 33-50% तक कमी पाई गई।
  • जिन योजनाओं में गड़बड़ी थी, उनकी लागत 25-50% तक बढ़ी हुई मिली है।
  • मौके पर गए बिना ही DPR बना दी गई। पाइप लाइन बिछाने में मजरे-टोले छोड़ दिए।

एकल ग्राम नलजल योजना क्या है

एकल ग्राम नलजल योजना (जिसे जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना भी कहा जाता है) एक सरकारी योजना है। इसका मकसद है कि ग्रामीण इलाकों के हर घर में सुरक्षित और साफ पीने का पानी नल के जरिए पहुंचाया जाए। इस योजना का काम ग्राम पंचायतें करती हैं। इसके तहत लोगों को नल कनेक्शन दिए जाते हैं।

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