एमपी में खाद वितरण व्यवस्था में 12 बदलाव, अब किसानों को मिलेगी अपनी पसंद की खाद
Aman Vaishnav | Aug 20, 2026, 08:45 IST
एमपी में खाद वितरण में बदलाव
एमपी सरकार ने ई-विकास 2.0 लागू कर खाद वितरण में बदलाव किए हैं। अब किसान बिना किसी दबाव के अपनी पसंद की खाद खरीद सकेंगे। किसानों की खाद खरीदने की तय सीमा में पहली बार में 25% अतिरिक्त खाद मिलेगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर 7 दिन बाद फिर 25% खाद मिल सकेगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के बाद सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था बदल दी है।
- ई-विकस 2.0 लागू करते हुए करीब 12 बदलाव किए गए हैं।
- अब किसानों पर यूरिया या डीएपी के साथ जबरन दूसरी खाद लेने का दबाव नहीं रहेगा।
- तय सीमा के बाद पहली बार में 25% अतिरिक्त खाद मिल सकेगी।
- व्हाट्सएप आधारित खाद बुकिंग की शुरुआत 21-22 अगस्त से होने की तैयारी है।
आंदोलन के बाद बदली नीति
इसी दबाव के बाद सरकार हरकत में आई। राज्य सरकार ने खाद वितरण की पूरी व्यवस्था में सुधार करने का फैसला लिया।
इसी क्रम में ई-विकस 2.0 नाम की नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत खाद वितरण से जुड़े करीब 12 बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी।
अब नहीं रहेगा जबरन खाद लेने का दबाव
नई व्यवस्था में यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब किसान अपनी जरूरत के अनुसार सिर्फ यूरिया या सिर्फ डीएपी भी खरीद सकेंगे। इससे किसानों को अपनी फसल और मिट्टी के अनुसार खाद चुनने की आजादी मिलेगी।
खाद की लिमिट में बदलाव
इस तरह जरूरतमंद किसान कुल मिलाकर पहले से 50% ज्यादा खाद खरीद सकेंगे। पहले ज्यादा खाद लेने के लिए किसानों को कारण लिखकर देना पड़ता था। अब यह शर्त भी हटा दी गई है। इससे खरीद प्रक्रिया आसान और तेज होगी।
सभी कलेक्टरों को भेजे गए आदेश
व्हाट्सएप से खाद बुकिंग की तैयारी
इस व्यवस्था के तहत किसान व्हाट्सएप के जरिए ही खाद बुक कर सकेंगे। इससे केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारें कम होने की उम्मीद है। डिजिटल बुकिंग से पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
टोकन और शिकायत निवारण में भी सुधार
इसके अलावा शिकायत निवारण की समयसीमा भी तय कर दी गई है। अब किसी भी शिकायत का निपटारा 48 घंटे में करना अनिवार्य होगा। इससे खाद वितरण में होने वाली दिक्कतों का जल्द समाधान हो सकेगा।
किसानों के लिए क्यों जरूरी यह बदलाव
नई व्यवस्था से उम्मीद है कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद मिल सकेगी। इससे न सिर्फ आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। हालांकि यह देखना अभी बाकी है कि जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कितनी असरदार साबित होती है।
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