अब टोल प्लाजा नहीं रोकनी होगी गड़ियां, MP में पहली बार बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू
Amresh Kushwaha | Sept 03, 2026, 11:16 IST
MP में पहली बार बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू
मध्य प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू हुआ है। भोपाल-देवास रोड के फंदा टोल प्लाजा पर यह ट्रायल एक्टिव किया गया है। गाड़ियां अब 100 किमी की स्पीड में भी बिना रुके निकल सकेंगी। जानें कैसे...
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू हुआ है।
- यह सिस्टम भोपाल-देवास रोड के फंदा टोल प्लाजा पर एक्टिव हुआ है।
- गाड़ियां अब 100 किमी की स्पीड में भी बिना रुके निकल सकेंगी।
- फास्टैग, कैमरे और सेंसर से टोल अपने आप कट जाएगा।
- सफल ट्रायल के बाद यह सिस्टम पूरे टोल प्लाजा पर लागू होगा।
फंदा टोल पर ट्रायल शुरू
फिलहाल एमपीआरडीसी (Madhya Pradesh Road Development Corporation) ने फंदा टोल की एक लेन में इसका ट्रायल शुरू किया है। ट्रायल सफल रहने पर 01 जनवरी 2027 से तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में यह व्यवस्था लागू होगी। इसके लिए टोल देने के लिए कर्मचारी को रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बैरियर नहीं, ब्रेक भी नहीं
फास्टैग-कैमरे से पहचान
इस पूरी प्रक्रिया में गाड़ी को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एमपीआरडीसी का मानना है कि इससे टोल कलेक्शन ज्यादा पारदर्शी होगा। फास्टैग के साथ एएनपीआर (Automatic Number Plate Recognition) से पहचान होने पर टोल चोरी और गड़बड़ी पर भी नियंत्रण रहेगा।
पैसे न होने पर ई-चालान
लोगों को क्या फायदा होगा
बार-बार ब्रेक लगाने से बचने पर ईंधन की बचत होगी। टोल प्लाजा पर समय बचने से यात्रा का कुल समय भी कम होगा। लंबी कतार और जाम कम होने से सफर ज्यादा सुगम और सुविधाजनक बनेगा।
MPRDC को होंगे ये फायदे
फास्टैग के साथ एएनपीआर से पहचान होने पर टोल चोरी और गड़बड़ी पर नियंत्रण होगा। वाहनों की तेज आवाजाही से टोल प्लाजा की क्षमता भी बढ़ेगी और संचालन ज्यादा असरदार होगा।
यूरोप में पहले से इस्तेमाल
देश के अन्य राज्यों में स्थिति
राजस्थान के दौलतपुरा टोल प्लाजा पर 19 जून 2026 से यह व्यवस्था चल रही है। राजस्थान के ही मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर यह 1 जुलाई 2026 से शुरू हुई। शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी यह सुविधा 1 अगस्त 2026 से मिल रही है।
यहां हो रही है तैयारी
तमिलनाडु के ही चेनासमुद्रम और परनूर टोल प्लाजा भी इस सूची में शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में कासेपल्ली, अमकथाडु और मरूर टोल प्लाजा पर तैयारी हो रही है। महाराष्ट्र के चलकवाड़ी और हिवरगांव पावसा टोल प्लाजा भी इसमें शामिल हैं। असम के मदनपुर टोल प्लाजा पर भी यह सुविधा जल्द शुरू होगी।
मंत्री का बयान
उन्होंने बताया कि इसके लिए संस्थान को पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में काम होगा। मंत्री के मुताबिक तकनीक से मजबूत और टिकाऊ सड़कें बनाना विभाग की प्राथमिकता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह जानकारी सार्वजनिक हित की है इसलिए इसे आम भाषा में बताना जरूरी है। यह खबर संविधान की उस भावना के अनुरूप है जो नागरिकों को सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था देने की बात करती है। डिजिटल तकनीक के जरिए यह सिस्टम आम लोगों और प्रशासन दोनों के लिए फायदेमंद है।
FAQ
- बैरियर-लेस टोल सिस्टम क्या है?
यह एक नई तकनीक है जिसमें टोल प्लाजा पर बूम बैरियर नहीं होता। वाहन बिना रुके 100 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड में भी गुजर सकते हैं। फास्टैग, कैमरे और सेंसर की मदद से टोल की रकम अपने आप कट जाती है। - अगर फास्टैग में पैसे नहीं हैं तो क्या होगा?
फास्टैग में बैलेंस न होने या तकनीकी समस्या आने पर वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा। तीन दिन के अंदर टोल की राशि जमा करनी होगी। तय समय में भुगतान न करने पर जुर्माने के साथ वसूली की जाएगी।
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