जंगल खत्म करने में एमपी अव्वल, CSE रिपोर्ट में खुलासा, 23 हजार हेक्टेयर जंगल सिर्फ 5 साल में गायब
Aman Vaishnav | Mar 21, 2026, 09:23 IST
mp forest land diversion cse report 2026 environmental crisis
मध्यप्रदेश के घने जंगलों पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिकॉर्ड तोड़ वन भूमि का डायवर्जन हुआ है। इसका सीधा असर प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीवों पर पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश की पहचान उसके हरे-भरे जंगलों और बाघों से होती रही है, लेकिन अब राज्य की यह हरियाली गहरे संकट में है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट की ताजा रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। विकास की अंधी दौड़ में हमारे जंगल तेजी से कंक्रीट में बदल रहे हैं।
मध्यप्रदेश भारत में सबसे ज्यादा वन भूमि और वनावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन अब एमपी की छवि को एक बड़ा झटका लगा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट ((स्टेट ऑफ इंडिया का पर्यावरण 2026)) की रिपोर्ट हैरान कर देने वाली है।
इसके मुताबिक पिछले 10 सालों में जितनी वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए दी गई है, उसमें से 22% हिस्सा सिर्फ मध्यप्रदेश का है। मतलब कि बीते एक दशक में एमपी में 38 हजार 553 हेक्टेयर जंगल को विकास कार्यों के लिए हटा दिया गया। इनमें से 23 हजार 54 हेक्टेयर वन भूमि तो सिर्फ पिछले 5 सालों में ही डायवर्ट की गई हैं।
देश में पिछले दस साल में कुल 1 लाख 73 हजार 397 हेक्टेयर वन भूमि को अन्य उपयोग के लिए आवंटित किया गया है। यह हरियाणा राज्य के पूरे वन क्षेत्र और दिल्ली राज्य के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा है। अकेले 2023-24 में करीब 29 हजार हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी दी गई थी। देश में जितनी वन भूमि का डायवर्जन हुआ है, उसमें से आधा हिस्सा (49%) सिर्फ मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और गुजरात में हुआ है।
मध्यप्रदेश में जंगलों की घटती संख्या का असर अब जैव विविधता पर नजर आने लगा है। बांधवगढ़, कान्हा टाइगर रिजर्वऔर पेंच टाइगर रिजर्व के आसपास अब कई बाघ बाहरी इलाके की लैंटाना झाड़ियों में रहने लगे हैं। ये बाघ अब मवेशियों को शिकार बनाने के लिए इन झाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष बढ़ गया है।
सीएसई के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मध्य प्रदेश और आसपास के जंगलों में पारिस्थितिक सूखा आ रहा है। इसका मतलब यह है कि ये जंगल अपनी प्राकृतिक स्थिति और कामकाजी क्षमता खोते जा रहे हैं। इसका कारण लंबे समय तक पानी की कमी है।
वन भूमि का उपयोग इन कार्यों के लिए सबसे ज्यादा किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में पिछले 5 सालों का डायवर्जन (हेक्टेयर में)
सर्वाधिक डायवर्जन वाले प्रमुख राज्य
ये खबरें भी पढ़िए...
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कोहकाटोला के जंगलों में नक्सलियों का कैंप ध्वस्त
एमपी न्यूज: 30 हजार करोड़ का माइनिंग घोटाला? हाईकोर्ट का सरकार सहित माइनिंग विभाग को नोटिस
अडानी के प्रोजेक्ट से आदिवासी परेशान, बोले- खतरे में है आजीविका, सिंगरौली का दौरा कर सकते हैं राहुल गांधी
मैनपुर के जंगल में माओवादी खजाना जब्त, कैश समेत हथियारों का जखीरा बरामद
क्या है CSE की रिपोर्ट में...
इसके मुताबिक पिछले 10 सालों में जितनी वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए दी गई है, उसमें से 22% हिस्सा सिर्फ मध्यप्रदेश का है। मतलब कि बीते एक दशक में एमपी में 38 हजार 553 हेक्टेयर जंगल को विकास कार्यों के लिए हटा दिया गया। इनमें से 23 हजार 54 हेक्टेयर वन भूमि तो सिर्फ पिछले 5 सालों में ही डायवर्ट की गई हैं।
10 साल में इतनी जमीन का उपयोग
जंगलों की घटती संख्या का असर
मध्य प्रदेश के जंगलों में सूखा
मध्यप्रदेश के वन विभाग के प्रमुख शुभ रंजन सेन ने बताया कि, विकास कार्यों के लिए जंगल की जमीन को बदलना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ये फैसले केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय लेते हैं। चूंकि देश में सबसे ज्यादा जंगल की जमीन मध्यप्रदेश में है। इसलिए यहां विकास के लिए ज्यादा जमीन का बदलाव होना स्वाभाविक है।
| कारण | डायवर्जन प्रतिशत |
| खनन (Mining) | 22% |
| सड़क निर्माण (Road Construction) | 18% |
| सिंचाई परियोजनाएं (Irrigation Projects) | 18% |
| ट्रांसमिशन लाइनें (Transmission Lines) | 11% |
| रक्षा (Defense) | 9% |
| रेलवे (Railway) | 5% |
| जलविद्युत (Hydropower) | 5% |
| अन्य कारण (पेयजल, पुनर्वास, उद्योग आदि) | 9% |
| वर्ष (Year) | भूमि (हेक्टेयर में) |
| 2023-24 | 9 हजार 219 |
| 2022-23 | 2 हजार 045 |
| 2021-22 | 3 हजार 492 |
| 2020-21 | 6 हजार 352 |
| 2019-20 | 1 हजार 946 |
| राज्य | भूमि हेक्टेयर में | डायवर्जन प्रतिशत |
| मध्य प्रदेश | 38 हजार 553 | 22% |
| ओडिशा | 24 हजार 459 | 14% |
| तेलंगाना | 11 हजार 422 | 7% |
| गुजरात | 9 हजार 985 | 6% |
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कोहकाटोला के जंगलों में नक्सलियों का कैंप ध्वस्त
एमपी न्यूज: 30 हजार करोड़ का माइनिंग घोटाला? हाईकोर्ट का सरकार सहित माइनिंग विभाग को नोटिस
अडानी के प्रोजेक्ट से आदिवासी परेशान, बोले- खतरे में है आजीविका, सिंगरौली का दौरा कर सकते हैं राहुल गांधी
मैनपुर के जंगल में माओवादी खजाना जब्त, कैश समेत हथियारों का जखीरा बरामद
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari