एमपी में वन अमले को शस्त्र चलाने का मिलेगा अधिकार, बिना जांच नहीं होगी कार्रवाई

मध्य प्रदेश सरकार वन अमले को शस्त्र चलाने का अधिकार देने की तैयारी कर रही है। अब जांच के बिना कार्रवाई नहीं होगी। वन सुरक्षा में अहम बदलाव किए गए हैं।

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Jitendra Shrivastava
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Photograph: (thesootr)

News In Short

वन कर्मियों को शस्त्र चलाने का अधिकार मिलेगा, सुरक्षा बढ़ेगी।
शस्त्र चलाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।
गश्त के दौरान वनकर्मियों को शस्त्र और कारतूस दिए जाएंगे।
वन चौकियों में स्ट्रांग रूम की व्यवस्था की जाएगी।
यह कदम वन कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।

News In Detail

मध्य प्रदेश सरकार राज्य के वन क्षेत्रों में बढ़ते अपराधों को ध्यान में रखते हुए वन अमले को शस्त्र चलाने का अधिकार देने की योजना बना रही है। यह कदम जंगलों में अपराधियों द्वारा बढ़ते हमलों और वनकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। राज्य के वन बल के पूर्व प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने सेवानिवृत्त होने से पहले इस प्रस्ताव को शासन को भेजा था, जिस पर अब विचार किया जा रहा है।

वन क्षेत्र में अपराधों का बढ़ना

मध्य प्रदेश वन विभाग क्षेत्रों में अपराधियों द्वारा लगातार बढ़ती गतिविधियों की वजह से वन अमले की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। अगस्त 2022 में सिरोंज के लटेरी जंगल में वनकर्मियों ने संदिग्ध गतिविधि पर फायरिंग की थी, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।

इस घटना के बाद जांच आयोग ने वन अमले की कार्रवाई को उचित ठहराया। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया कि वन कर्मियों को अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त अधिकार देने की जरूरत है।

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एसओपी के प्रावधान

मध्य प्रदेश सरकार ने 2023 में वन कर्मियों को शस्त्र चलाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की थी। इस प्रक्रिया के तहत, केवल अति आवश्यक परिस्थितियों में ही वन अमले को शस्त्र चलाने का अधिकार मिलेगा। हर तीन महीने में वन चौकियों की निरीक्षण होगा, और ड्यूटी समाप्त होने पर बंदूकें शस्त्रागार में जमा करनी होंगी।

नए बदलाव और सुरक्षा 

राज्य सरकार ने वन अमले की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार, गश्त के दौरान वनकर्मियों को शस्त्र और कारतूस दिए जाएंगे। गश्त के बाद हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए स्ट्रांग रूम की व्यवस्था की जाएगी। जिन वन चौकियों में स्ट्रांग रूम नहीं है, वहां हथियार और गोला-बारूद जिला शस्त्रागार में सुरक्षित रखे जाएंगे।

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वन कर्मियों को मिलेंगे शस्त्र

शस्त्र चलाने का अधिकार केवल उन्हीं वन कर्मियों को दिया जाएगा, जो इसे चलाने में सक्षम होंगे। गश्त के दौरान ये वनकर्मी बॉडीवॉर्न कैमरा का उपयोग करेंगे, जिससे उनकी सुरक्षा को और भी बढ़ावा मिलेगा। हर वन चौकी में शस्त्रगृह होगा, जहां से वनकर्मी शस्त्र प्राप्त कर सकेंगे और गश्त के दौरान उनका उपयोग करेंगे।

  • शस्त्र केवल दक्ष वनकर्मियों को दिए जाएंगे।
  • गश्ती दल के प्रभारी और सहयोगी वनरक्षकों को शस्त्र आवंटित किए जाएंगे।
  • प्रत्येक बंदूक के साथ 20 कारतूस दिए जाएंगे।
  • गश्त के दौरान वनकर्मी बॉडीवॉर्न कैमरा का उपयोग करेंगे।
  • गश्त के बाद हथियारों को स्ट्रांग रूम में जमा किया जाएगा।

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भारत में वन सुरक्षा की स्थिति

भारत में वन सुरक्षा को लेकर कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में वन क्षेत्रों में बढ़ते अपराधों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन, मध्य प्रदेश की तरह कुछ राज्यों में वनकर्मियों की सुरक्षा को लेकर अभी भी चिंताएं बनी हुई हैं। इस तरह के बदलाव से वन विभाग को अपनी सुरक्षा रणनीति को और भी मजबूत करने का मौका मिलेगा।

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