कृषि कार्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज फिर भी किसानों तक नहीं पहुंचा सरकारी फाउंडेशन बीज
Sanjay Sharma | Jul 03, 2026, 22:25 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. खरीफ सीजन में सोयाबीन, उड़द जिंसों का फाउंडेशन बीज कृषि विभाग के रिकॉर्ड में किसानों के नाम पर दर्ज है, लेकिन असल में यह इन किसानों तक पहुंचा ही नहीं है।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी में हर साल 100 करोड़ का फाउंडेशन सीड बांटा जाता है।
- सीहोर इछावर में 190 फर्जी किसानों के नाम पर बीज जारी किया गया।
- रीवा में कृषि अधिकारियों का फर्जीवाड़ा सामने आने पर केस दर्ज।
- खरगोन के भीकनगांव में निजी फर्म से रुपए लेकर बेचे गए 700 बैग
- किसानों को बीज के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर हुआ खेल।
खरीफ सीजन में सोयाबीन, उड़द जिंसों का फाउंडेशन बीज कृषि विभाग के रिकॉर्ड में किसानों के नाम पर दर्ज है, लेकिन असल में यह इन किसानों तक पहुंचा ही नहीं है।
सीहोर, रीवा, भिंड, खरगोन में सरकारी बीज की हेराफेरी के मामले सामने आए। इन मामलों ने विभाग की इस योजना को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
किसानों के नाम पर हेराफेरी
सीजन में बुआई के लिए भेजे गए सोयाबीन और उड़द की अच्छी गुणवत्ता के बीज निशुल्क होने के बावजूद रुपए लेकर बेचे गए हैं। अंचलों के केवल चुनिंदा जागरुक किसान और रसूखदारों को ही कृषि विभाग से ये बीज मिल पाए हैं, जबकि छोटे काश्तकार चक्कर काटते ही रह गए।
फर्जी नाम पर बांटा बीज
जब किसानों द्वारा इसकी शिकायत पर जांच हुई तो सूची में दर्ज 190 किसान फर्जी निकले। जिनके नाम दर्ज किए गए थे उन किसानों के आधार और खसरा नंबर गलत थे।
किसानों के हिस्से का यह बीज अधिकारियों ने व्यापारियों की मदद से बाजार में बेचा था। इस एक बैग की कीमत 1500 से 1800 रुपए थी। रीवा के रायपुर रायपुर कर्चुलियान ब्लॉक में फाउंडेशन बीज के 1200 बैग गायब हो गए।
उड़द के बीज वितरण की सूची में 85 किसानों के नाम दर्ज किए गए जबकि इनमें से 60 काल्पनिक किसान थे। खरगोन के भीकनगांव ब्लॉक में 700 बैग बेचे गए।
सोयाबीन फाउंडेशन बीज के ये बैग 140 किसानों को बंटना दिखाया गया जबकि केवल 12 वास्तविक किसानों को ही ये बैग मिल पाए। भिंड के मेहगांव ब्लॉक में 450 बैग गायब हुए हैं। वितरण की सूची में जो नाम दर्ज किए गए उनके कई ऐसे हैं जिनके नाम पर जमीन ही नहीं है।
ऐसे होता है बीज घोटाला
कई जगह बीते वर्षों में दिवंगत हो चुके किसानों को भी सूची में शामिल किया जाता है। वहीं शामिल खातों में दर्ज एक ही परिवार के नाम भी सूची में शामिल कर हेराफेरी की जाती है। जबकि दिखावे के लिए क्षेत्र के कुछ जागरूक और प्रभावशाली किसानों को शामिल किया जाता है।
हर साल करोड़ों का खेल
ज्यादातर कृषि कार्यालयों से या तो किसानों को रुपए वसूलकर या फिर बाजार में व्यापारियों के जरिए बेच दिया जाता है। जबकि फाउंडेशन बीज का एक- एक बैग ही काफी मंहगा होता है।
किसानों को बीज के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की योजना अधिकारियों की हेराफेरी की वजह से कारगर साबित नहीं हो रही। वहीं करोड़ों का सरकारी बीज बंटने के बावजूद किसान हर साल बीज के लिए भटकते नजर आ रहे हैं।
FAQ
- मध्य प्रदेश में फाउंडेशन बीज की हेराफेरी कैसे हो रही है?
इस गड़बड़ी के कारण सरकारी बीज किसानों तक नहीं पहुंचता। कृषि विभाग मुफ्त बीज बांटता है। लेकिन अधिकारी फर्जी सूची बनाकर व्यापारियों को बेच देते हैं। सीहोर, रीवा, खरगोन में ऐसे मामले मिले। - एमपी में बीज घोटाला में कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
बीज की हेराफेरी के सबसे ज्यादा मामले सीहोर, रीवा, भिंड, खरगोन, छिंदवाड़ा में सामने आए हैं। इन जिलों में किसानों के फर्जी नाम के सहारे बीज की हेराफेरी की गई। इसके जरिए अधिकारी और व्यापारियों ने मुनाफा कमाया है। - किसान बीज संकट से बचने के लिए सरकार क्या कर रही है?
किसान बीज संकट रोकने को विभाग जियो-टैग फोटो अनिवार्य करेगा। OTP से बीज वितरण होगा। लेकिन अभी निगरानी कमजोर है। किसानों को शिकायत पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए।
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