MP के 571 सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों का संकट: 55% शिक्षकों के पद खाली, 100 से ज्यादा प्रोफेसर दफ्तरों में तैनात

Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 01, 2026, 20:15 IST
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पढ़ाई पर शिक्षकों की कमी भारी पड़ रही है।
पढ़ाई पर शिक्षकों की कमी भारी पड़ रही है।

मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई कॉलेजों में नियमित कक्षाएं चलाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर उपलब्ध शिक्षकों को विभागीय और प्रशासनिक कामों में लगाया गया है। प्रदेश के 571 सरकारी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों के 7,078 पद खाली हैं।यह कुल स्वीकृत पदों का करीब 55% है।

इसके अलावा प्राध्यापकों के 848 पदों में से 650 खाली पड़े हैं। यानी इन पदों में लगभग 77% पर नियुक्ति नहीं हुई है।

खबरों के मुताबिक, एक तरफ कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। दूसरी तरफ 100 से ज्यादा सहायक प्राध्यापक और प्राध्यापक कॉलेजों से बाहर काम कर रहे हैं। ये शिक्षक मंत्रालय, सतपुड़ा भवन और दूसरे विभागीय कार्यालयों में तैनात हैं। इनमें डेपुटेशन और एफिलिएशन पर काम करने वाले शिक्षक शामिल हैं। इससे कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या और कम हो रही है।

भोपाल के MVM कॉलेज में भी शिक्षकों की कमी

भोपाल के शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (MVM) में भी शिक्षक कम हैं। यहां प्राध्यापकों के कुल 70 पद तय हैं। इनमें से करीब 20 पद खाली पड़े हैं। बाकी 50 प्राध्यापकों में से तीन दूसरे कार्यालयों में काम कर रहे हैं। इनमें अतिरिक्त संचालक कार्यालय, सतपुड़ा भवन और मंत्रालय शामिल हैं। यानी ये तीनों कॉलेज में पढ़ाने के बजाय दूसरे काम संभाल रहे हैं।

प्रदेश के दूसरे सरकारी कॉलेजों में भी ऐसी ही स्थिति है। शिक्षकों की कमी के बीच इस तैनाती से पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।

SMS हॉस्पिटल में सीनियर डॉक्टरों का प्रशासनिक पदों से मोहभंग: HOD की कुर्सी छोड़ी, कई ने लिया VRS | SMS Hospital: Senior Doctors' Disillusionment with Administrative Posts: HOD Chairs Vacated, Many Opt for VRS
SMS हॉस्पिटल में सीनियर डॉक्टरों का प्रशासनिक पदों से मोहभंग, कई ने छोड़ी HOD की कुर्सी
01 Nov 2026 ,
By Jyoti Mahender Bhardwaj
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS हॉस्पिटल में सीनियर डॉक्टरों के बीच प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर अनिच्छा बढ़ती नजर आ रही है। पिछले कुछ समय में कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य कारणों, कार्यकाल पूरा होने और अन्य वजहों का हवाला देकर विभागाध्यक्ष यानी HOD का पद छोड़ने की इच्छा जताई है। कुछ डॉक्टरों ने तो अस्पताल की सेवा से ही दूरी बना ली है। नेफ्रोलॉजी विभाग में भी पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा के पद पर बने रहने से इनकार करने के बाद डॉ. संजीव शर्मा को नया HOD बनाया गया है। इस घटनाक्रम ने मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दबाव को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS हॉस्पिटल में सीनियर डॉक्टरों के बीच प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर अनिच्छा बढ़ती नजर आ रही है। पिछले कुछ समय में कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य कारणों, कार्यकाल पूरा होने और अन्य वजहों का हवाला देकर विभागाध्यक्ष यानी HOD का पद छोड़ने की इच्छा जताई है। कुछ डॉक्टरों ने तो अस्पताल की सेवा से ही दूरी बना ली है। नेफ्रोलॉजी विभाग में भी पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा के पद पर बने रहने से इनकार करने के बाद डॉ. संजीव शर्मा को नया HOD बनाया गया है। इस घटनाक्रम ने मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दबाव को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

चार पदों की जगह 40 से ज्यादा शिक्षक दफ्तरों में तैनात

खबरों के मुताबिक, सतपुड़ा भवन और वल्लभ भवन में प्रशासनिक कामों के लिए चार पद तय हैं। इसके बावजूद यहां 40 से ज्यादा शिक्षक काम कर रहे हैं। इनमें प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक शामिल हैं। ये शिक्षक डेपुटेशन या एफिलिएशन पर यहां तैनात हैं। कुछ शिक्षक नियुक्ति के शुरुआती सालों से कॉलेजों में नहीं पढ़ा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, 2019 में नियुक्त 10 से ज्यादा सहायक प्राध्यापक भी यहीं काम कर रहे हैं। ये शिक्षक विभाग के कई जरूरी काम संभालते हैं। इनमें विभाग की नीतियां और नियम लागू कराने की जिम्मेदारी शामिल है। इसके अलावा ये शिक्षकों की कॉन्फिडेंशियल डोजियर (CR) भी संभालते हैं। ये शिक्षक सरकारी योजनाओं पर भी नजर रखते हैं। साथ ही कॉलेजों के निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार करते हैं। इस वजह से उनका ज्यादातर समय दफ्तर के कामों में बीतता है।

आयुष कॉलेजों की फीस तय नहीं, छात्र बिना फीस जाने एडमिशन लेने को मजबूर | Ayush Colleges' Fees Not Decided, Students Forced to Take Admission Without Knowing Fees
कई प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस अब तक तय नहीं, बिना फीस जाने एडमिशन लेने को मजबूर विद्यार्थी
31 Oct 2026 ,
By Manya Jain
मध्यप्रदेश के कई प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस अभी तय नहीं हुई है। छात्रों को अब तक नहीं पता कि कितनी फीस देनी होगी। इसके बावजूद उन्हें काउंसलिंग में चॉइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग करनी पड़ रही है। इससे छात्र और उनके माता-पिता परेशान हैं। उन्हें डर है कि एडमिशन के बाद कॉलेज मनमानी फीस वसूल सकते हैं।
मध्यप्रदेश के कई प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस अभी तय नहीं हुई है। छात्रों को अब तक नहीं पता कि कितनी फीस देनी होगी। इसके बावजूद उन्हें काउंसलिंग में चॉइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग करनी पड़ रही है। इससे छात्र और उनके माता-पिता परेशान हैं। उन्हें डर है कि एडमिशन के बाद कॉलेज मनमानी फीस वसूल सकते हैं।

सीनियर पे-स्केल को लेकर भी उठ रहे सवाल

शिक्षकों की विभागीय तैनाती का असर उनके सर्विस रिलेटेड एसेसमेंट पर भी सवाल खड़े कर रहा है। मामला टीचिंग एक्सपीरियंस और सीनियर पे-स्केल से जुड़ा है। UGC के प्रावधानों के अनुसार, शिक्षकों की प्रोबेशन पीरियड जनरली दो से तीन साल में पूरी होती है। इसमें टीचिंग वर्क और प्रदर्शन को आधार बनाया जाता है। इसके बाद सीनियर पे-स्केल यानी पे मैट्रिक्स-11 के लिए तय टीचिंग एक्सपीरियंस जरूरी होता है।

नियमों के मुताबिक, पीएचडी धारकों के लिए चार साल का टीचिंग एक्सपीरियंस जरूरी है। एमफिल धारकों के लिए यह अवधि पांच साल है। वहीं, NET-SET क्वालिफाइइड टीचर्स के लिए छह साल का एक्सपीरियंस जरूरी है। अगले वेतनमान के लिए भी तय टीचिंग एक्सपीरियंस की शर्त लागू होती है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लंबे समय से कॉलेजों में नहीं पढ़ाने वाले शिक्षकों का एक्सपीरियंस कैसे गिना जा रहा है। उनकी प्रोबेशन पीरियड का मूल्यांकन किस आधार पर हो रहा है? यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ नर्सिंग एडमिशन 2026: 11 हजार सीटों पर दाखिले की डेडलाइन तीसरी बार बढ़ी, 15 नवंबर तक आवेदन संभव | Chhattisgarh Nursing Admission 2026: Deadline for Admission to 11 Thousand Seats Extended for the Third Time, Applications Possible Till November 15
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31 Oct 2026 ,
By Umeshwari Baghel
छत्तीसगढ़ में नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया लगातार पिछड़ रही है। यह छत्तीसगढ़ नर्सिंग प्रवेश 2026 से जुड़ा मामला है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने एडमिशन की अंतिम तारीख तीसरी बार बढ़ा दी है। अब यह 15 नवंबर तक है। लेकिन अब तक काउंसलिंग शुरू नहीं हुई है। इसलिए हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में बताया जा रहा है
छत्तीसगढ़ में नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया लगातार पिछड़ रही है। यह छत्तीसगढ़ नर्सिंग प्रवेश 2026 से जुड़ा मामला है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने एडमिशन की अंतिम तारीख तीसरी बार बढ़ा दी है। अब यह 15 नवंबर तक है। लेकिन अब तक काउंसलिंग शुरू नहीं हुई है। इसलिए हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में बताया जा रहा है

कॉलेजों में पढ़ाई और शिक्षकों की तैनाती पर सवाल

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में हजारों शिक्षकों के पद खाली हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक विभागीय कार्यालयों में काम कर रहे हैं। इससे उच्च शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है, तो उन्हें दूसरे कार्यालयों में क्यों तैनात किया गया है? क्या इन शिक्षकों को वापस कॉलेजों में भेजा जा सकता है? इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई को कितना फायदा मिलेगा? इन सवालों पर विभाग की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। कॉलेजों में नियमित पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही यह भी देखना होगा कि प्रशासनिक कामों के लिए शिक्षकों की तैनाती कितनी जरूरी है।

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FAQs

  1. मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्राध्यापकों के कितने पद खाली हैं?
    मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्राध्यापकों के 848 स्वीकृत पदों में से 650 पद खाली पड़े हैं।
  2. कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का क्या कारण है?
    कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का कारण यह है कि बड़ी संख्या में शिक्षक मंत्रालय और अन्य विभागीय कार्यालयों में तैनात हैं, जिससे कॉलेजों में पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
  3. एकेडमिक एक्सपीरियंस के आधार पर शिक्षकों के वेतनमान का मूल्यांकन कैसे किया जाएगा?
    शिक्षकों के वेतनमान का मूल्यांकन टीचिंग एक्सपीरियंस के आधार पर किया जाएगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि लंबे समय से कॉलेजों में नहीं पढ़ाने वाले शिक्षकों का एक्सपीरियंस कैसे गिना जाएगा।
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