घोषणाओं की अनदेखी कर रही एमपी सरकार, कर्मचारियों से बढ़ रही तकरार, कई घोषणाएं अधूरी
Sanjay Sharma | Mar 12, 2026, 21:00 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में सरकार की घोषणाएं अधूरी, कर्मचारियों का विरोध बढ़ रहा है। समयमान वेतन, उच्च पदनाम, कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस जैसे फैसले लंबित हैं। कर्मचारियों को लगातार उम्मीदें टूटी हैं।
News in Short
- घोषणाओं पर समय पर निर्णय नहीं लेने से कर्मचारियों के हित हो रहे प्रभावित।
- कर्मचारी दो साल से कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस का इंतजार कर रहे हैं।
- समयमान- वेतनमान में विसंगति कर रही कर्मचारियों को नाराज।
- मंत्रालय द्रमें आकस्मिकता निधि कर्मचारियों की परीक्षा का परिणाम तीन साल से अटका।
- कें की तरह मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को पूरी पेंशन के लिए सेवा अवधि के प्रावधन अलग।
News in Detail
मध्य प्रदेश सरकार बीते दो सालों में अब तक कर्मचारियों को पदोन्नति, समयमान- वेतनमान, उच्च पदनाम और कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस और डीए वृद्धि की घोषणा करती रही है। इनमें से केवल डीए में इजाफे की घोषणा ही पूरी हो पाई है। जबकि कर्मचारियों को अब भी कई अहम घोषणाओं का लाभ नहीं मिला है। पदोन्नति का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण सरकार इस पर बेबसी जता चुकी है। वहीं समयमान- वेतनमान, उच्च पदनाम और कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में निर्णय अटके हुए हैं। जबकि इनमें से किसी भी घोषणा पर न तो कोई विरोधाभास है और न ही कोर्ट की कोई पाबंदी है। बावजूद इसके सरकार इन मामलों में निर्णय नहीं ले पा रही है।
राज्य का कर्मचारी तबका सरकार द्वारा कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस की अनदेखी से नाराज है। सरकार बार- बार कर्मचारियों को कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस देने की घोषणा करती आ रही है। प्रदेश के 12 लाख से ज्यादा कर्मचारी और पेंशनर्स इस दायरे में आने वाले हैं। इस वजह से इन्हें बीते दो सालों से इसका इंतजार है। उम्रदराज कर्मचारियों को बीमारियों के इलाज के लिए यह स्कीम सबसे कारगर है लेकिन अब तक जमीनी हकीकत नहीं बन पाई है।
अब तीसरी बार बनाई एसीएस समिति
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12 लाख कर्मचारी लाभ से वंचित
अब तक कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज कराने की ही सुविधा मिल रही है। अब तक इस योजना के तहत कर्मचारियों और पेंशनर्स के इलाज पर सरकारी बजट से 300 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है। इलाज की राशि दोगुना होने के बाद यह खर्च भी डेढ़ से दो गुना तक बढ़ना प्रत्याशित है।
कोई आर्थिक बोझ नहीं फिर भी देरी
मंत्रालय अधिकारी- कर्मचारी संघ अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि सरकार घोषणा के बाद भी दो साल से कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस पर अमल नहीं कर पाई है। इससे शुरू करने से सरकार पर कोई अतिरिक्त भार भी नहीं आएगा क्योंकि प्रीमियम कर्मचारियों के वेतन से कटेगा। इसके बावजूद सरकार इसे दो साल से टाल रही है।
समयमान- वेतनमान में विसंगति बरकरार
तीन साल से अटकाकर रखा है रिजल्ट
पूरी पेंशन के प्रावधान केंद्र से अलग
उच्च पदनाम देने में भी किया जा रहा भेदभाव
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