अफसरों के रवैये से नाराज राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले- क्या आदिवासी बच्चे सिर्फ डांस करने के लिए हैं?

Aman Vaishnav | Apr 17, 2026, 10:39 IST
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mp governor mangubhai patel questions tribal fund spending
mp governor mangubhai patel questions tribal fund spending

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने आदिवासियों की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने अफसरों के बर्ताव और बजट खर्च न होने को लेकर कई सवाल किए हैं। साथ ही कहा कि अधिकारियों में अपनेपन की कमी दिखती है।

मध्य प्रदेश के गवर्नर मंगूभाई पटेल ने गुरुवार, 17 अप्रैल को जनजातीय वर्ग के प्रति अफसरों के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार और अफसरों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें अपनेपन की कमी दिखती है।

गवर्नर ने यह भी कहा कि आदिवासी बच्चों और लोगों का अभी भी शोषण हो रहा है। उन्होंने ये भी पूछा कि क्या ट्राइबल बच्चे सिर्फ डांस करने के लिए होते हैं। सुबह वे कहीं और डांस कर रहे थे और अब यहां भी यही हो रहा है।

राज्य में 21 प्रतिशत आदिवासी

राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने हैरान होकर कहा कि राज्य में 21 प्रतिशत आदिवासी लोग हैं। इसका मतलब है कि हर विभाग को अपने बजट का कुछ हिस्सा ट्राइबल (जनजातीय उपयोजना, यानी टीएसपी) पर खर्च करना था। लेकिन 2025-26 में 22% पैसा जो कि 299 करोड़ से ज्यादा है, खर्च नहीं हुआ और यह राशि बिना खर्च के वापस हो गई।

पैसे का सही इस्तेमाल नहीं हुआ- गवर्नर

गवर्नर ने कहा यह पैसा तो भारत सरकार से आता है लेकिन इसका सही इस्तेमाल नहीं किया गया। ट्राइबल डिपार्टमेंट से ये भी नहीं पूछा जाता कि पैसा कहां खर्च करना है, जो कि सही नहीं है।

एमपी जनजातीय समुदाय के विकास के लिए भोपाल में रखी गई दो दिन की वर्कशॉप में राज्यपाल ने ये बातें कहीं।

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प्रदेश में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो

गवर्नर ने कहा कि जो तय राशि है उसके कामों के लिए वर्कऑर्डर समय से जारी होने चाहिए। तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में अगर टीएसपी का पैसा खर्च नहीं होता, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाती है। मध्यप्रदेश में भी ऐसा ही होना चाहिए। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।

सीएम ने बाताया किस साल कितना खर्च

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि, प्रदेश के हर वर्ग और हर व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। साथ ही उन्हें जरूरी सुविधाएं मिलें।

जनजातीय समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल और आधारभूत ढांचे का विकास हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

राज्य सरकार अंत्योदय के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। सीएम ने बताया कि पिछले सालों में टीएसपी का कितना पैसा खर्च किया गया है।

  • 2023-24 में बजट था 40 हजार 207 करोड़ और खर्च हुआ 33 हजार 49 करोड़ रुपए
  • 2024-25 में बजट था 41 हजार 733 करोड़ और खर्च हुआ 35 हजार 537 करोड़ रुपए
  • 2025-26 में बजट था 47 हजार 648 करोड़ और खर्च हुआ 37 हजार 349 करोड़ 63 लाख रुपए

नल-जल योजनाएं बंद पड़ी, बिजली बिल के पैसे नहीं

जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह कार्यशाला के दूसरे सत्र में अचानक पहुंचे। शाह ने कहा कि कई जगहों पर नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं। कुछ जगहों पर बिजली का बिल देने के लिए पैसे की कमी है।

विजय शाह ने यह भी कहा कि टीएसपी का पैसा, जो पीएचई में 10 करोड़ से अधिक पड़ा है, वही खर्च किया जाना चाहिए था। विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने बताया कि 2026-27 के बजट में जनजातीय उप योजना के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।

कैबिनेट में कोई नहीं पूछता पैसा कहां गया

वर्कशॉप के एक सत्र में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने कहा कि जब भी टीएसपी का पैसा खर्च होता है तो उसकी मंजूरी कैबिनेट से ली जाती है। जब यह मामला कैबिनेट में जाता है तो वहां कोई भी यह नहीं पूछता कि पैसा कहां खर्च किया जाएगा।

राज्यपाल ने उठाए 4 बड़े सवाल

  • यह हैरानी की बात है कि भारत सरकार से मिले 299 करोड़ रुपए की आदिवासी उपयोजना के पैसे मध्यप्रदेश में क्यों लैप्स हो गए?
  • ट्राइबल डिपार्टमेंट से कोई विभाग यह नहीं पूछता कि यह पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है?
  • 12 लाख रुपए में बनी आंगनबाड़ी की हालत देखिए। दरवाजे प्लास्टिक के हैं, खिड़कियां छोटी हैं, न हवा आती है न रोशनी। सरिए भी हाथों से खिंच जाते हैं। आखिर पैसा कहां चला गया?
  • स्वास्थ्य और शिक्षा के नाम पर जो काम हो रहे हैं, क्या वे सिर्फ दिखावे के लिए हैं?

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

राज्यपाल के बयान को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट कर सरकार को घेरा है।
उमंग सिंघार ने पोस्ट में लिखा कि...

यह बयान मध्यप्रदेश की जमीनी हकीकत पर एक गहरा सवाल है। आदिवासी बच्चों को जहां शिक्षा, पोषण और बेहतर भविष्य मिलना चाहिए, वहां उन्हें केवल प्रतीक बनाकर छोड़ दिया गया है।

जब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसे सवाल उठाने पड़ें, तो यह स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

यह बयान भाजपा सरकार की आदिवासियों के प्रति उदासीनता और संवेदनहीनता को दर्शाता है। सरकार को प्रदेश के आदिवासी बच्चों के अधिकार, सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

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