एमपी के 12 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स को झटका, 64 फीसदी महंगाई भत्ते के लिए करना होगा इंतजार

मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता बढ़ोतरी के बावजूद 64 फीसदी डीए के लिए करीब 12 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार तय लक्ष्य से पीछे चल रही है।

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Sanjay Dhiman
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Shock to 12 lakh employees-pensioners of MP

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • लक्ष्य से पीछे: सरकार इस साल 64% महंगाई भत्ता देने का अपना वादा पूरा नहीं कर पाएगी।
  • लंबा इंतजार: केंद्र के फैसले के 8 महीने बाद एमपी के कर्मचारियों को लाभ मिल रहा है।
  • लाखों प्रभावित: प्रदेश के 12 लाख नियमित कर्मचारियों और पेंशनर्स पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
  • बढ़ती महंगाई: महंगाई के दौर में कर्मचारियों को राहत के लिए अभी और रुकना होगा।
  • देरी की आशंका: अगले डीए (DA) के लिए भी 4 से 6 महीने का इंतजार करना पड़ सकता है। 

News in Detail

BHOPAL. मध्य प्रदेश के 12 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक मायूस करने वाली खबर है। राज्य सरकार का वित्त विभाग अपने पुराने वादे के मुताबिक इस वित्त वर्ष में 64% महंगाई भत्ता (DA) देने के लक्ष्य से पिछड़ गया है।

हकीकत यह है कि हाल ही में जो DA बढ़ाया गया है, वह केंद्र सरकार के फैसले के 8 महीने बाद लागू हुआ है। अब जब केंद्र में फिर से नया DA घोषित होने वाला है, तो एमपी के कर्मचारियों को उसका लाभ पाने के लिए 4 से 6 महीने और इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को अपनी ही हक की राशि के लिए सरकारी फाइलों के घूमने का इंतजार करना होगा। 

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सात लाख कर्मचारी और 4.5 लाख पेंशनर्स पर असर

मध्यप्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों में लगभग सात लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसके अलावा करीब साढ़े चार लाख पेंशनर्स महंगाई राहत पर निर्भर रहते हैं। सरकार के फैसले का असर इन सभी लोगों की आय पर पड़ता है। सरकार ने कहा कि तीन प्रतिशत बढ़ा हुआ भत्ता अप्रैल वेतन में जोड़ा जाएगा।

इसका वास्तविक भुगतान मई महीने की सैलरी के साथ शुरू होगा। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह राहत पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार के बराबर लाभ मिलना चाहिए।

केंद्र के फैसले का तुरंत लाभ मिलने की संभावना कम

कर्मचारियों की एक बड़ी चिंता केंद्र सरकार के फैसलों से जुड़ी हुई है। अगर केंद्र सरकार मार्च में फिर महंगाई भत्ता बढ़ाती है। तो भी राज्य कर्मचारियों को उसका फायदा तुरंत मिलना मुश्किल है।

पिछली बार भी केंद्र के फैसले के करीब आठ महीने बाद लाभ मिला था। इसी वजह से कर्मचारी संगठनों में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। कर्मचारी चाहते हैं कि राज्य सरकार केंद्र के साथ तालमेल बनाए।

वित्त विभाग की योजना और सरकार का लक्ष्य

वित्त विभाग ने महंगाई भत्ते को लेकर एक लंबी योजना बनाई थी। इस योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में भत्ता धीरे-धीरे बढ़ाया जाना था। योजना के मुताबिक 2026-27 तक महंगाई भत्ता 74 प्रतिशत होना चाहिए था। इसके बाद 2027-28 तक इसे 84 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य था।

2028-29 तक महंगाई भत्ता 94 प्रतिशत तक पहुंचाने की तैयारी थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में सरकार अपने तय लक्ष्य से पीछे चल रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह अंतर लगभग छह प्रतिशत है।

छठवें और पांचवें वेतनमान के कर्मचारियों के लिए क्या योजना

छठवें वेतनमान के कर्मचारियों के लिए भी चरणबद्ध योजना तैयार की गई है। इस समय इन कर्मचारियों को करीब 252 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा। हालिया फैसले के बाद इसे बढ़ाकर 255 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित है। आने वाले वर्षों में इसे 265 और 280 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है।

पांचवें वेतनमान के कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह का प्लान बनाया गया। अभी इन कर्मचारियों को लगभग 315 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। सरकार की योजना इसे आने वाले समय में 345 प्रतिशत तक पहुंचाने की है।

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कर्मचारी संगठनों की मांग क्या है

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। इस कारण कर्मचारियों के खर्च भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार के फैसले के साथ ही राज्य भी फैसला करे। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों को आर्थिक राहत जल्दी मिलेगी। फिलहाल सभी कर्मचारी और पेंशनर्स अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

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