हरियाणा मॉडल की लागू करेगी एमपी उच्च शिक्षा विभाग की समिति

मध्य प्रदेश के कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के लिए जल्द ही हरियाणा मॉडल लागू हो सकता है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस पर विचार के लिए समिति गठित की है।

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Sanjay Sharma
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BHOPAL. कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के लिए मध्य प्रदेश में भी हरियाणा मॉडल लागू हो सकता है। अतिथि विद्वानों की मांग को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। 

यह समिति हरियाणा में गेस्ट फैकल्टी से संबंधित नियम और प्रावधानों का अध्ययन करेगी। यह समिति चार दिन बाद अपनी रिपोर्ट उच्च शिक्षा आयुक्त को सौंपेगी। जिसके आधार पर प्रदेश के अतिथि विद्वानों की मांग पर विभागीय स्तर पर विचार कर निर्णय लिया जाएगा। 

मध्य प्रदेश में कॉलेजों में अध्ययन कराने वाले अतिथि विद्वानों के लिए अभी 60 साल की आयु सीमा तय है। यानी आयु 60 साल होने के बाद वे गेस्ट फैकल्टी के तहत कॉलेज में पढ़ाने की पात्रता से बाहर कर दिए जाते हैं।

वहीं हरियाणा में गेस्ट फैकल्टी के लिए ऐसा प्रावधान नहीं है। वहां गेस्ट फैकल्टी पर 60 साल की आयु सीमा की पाबंदी नहीं है और शारीरिक दक्षता के आधार पर उन्हें मौका दिया जाता है। 

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अतिथि विद्वानों की मांग पर लिया निर्णय

प्राध्यापकों की कमी को पूरा कर रहे अतिथि विद्वान मध्य प्रदेश में भी गेस्ट फैकल्टी का हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग कर रहे हैं। नियमित नियुक्ति नहीं मिलने के कारण कई गेस्ट फैकल्टी के सामने घर चलाने की भी समस्या खड़ी हो रही है। उनकी इन समस्याओं और मांग को देखते हुए उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। 

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हरियाणा मॉडल के प्रावधान समझेगी समिति

हरियाणा मॉडल और प्रदेश में गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए MP उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विचार विमर्श किया जा रहा है। 2 जनवरी को उच्च शिक्षा आयुक्त ने तीन सदस्यीय समिति गठित की। समिति में डॉ. अनिल राजपूत, प्राध्यापक शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भोपाल शामिल हैं। इसके अलावा, डॉ. अजय कुमार भारद्वाज और डॉ. एसके गर्ग को भी समिति में रखा गया है। यह समिति डॉ. अनिल राजपूत के संयोजन में हरियाणा में गेस्ट फैकल्टी के प्रावधान, आयु सीमा और अन्य नियमों का अध्ययन करेगी। समिति से 6 और 7 जनवरी तक रिपोर्ट मांगी गई है।

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हट सकती है आयुसीमा की पाबंदी

मध्यप्रदेश के सरकारी कॉलेजों में अतिथि विद्वानों की मांग पर अध्ययन दल गठित किया गया। इस दल की रिपोर्ट उनके भविष्य का निर्धारण करेगी। इसके आधार पर सरकार गेस्ट फैकल्टी के लिए सामाजिक सुरक्षा नीति बना सकती है। उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों में अध्यापन की अधिकतम आयु सीमा हटा सकता है। प्रदेश के अतिथि विद्वान समिति की रिपोर्ट से उम्मीदें लगाए हुए हैं।

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