एमपी में छात्रों से वसूली जारी, पारदर्शिता सिर्फ फाइलों तक सीमित

मध्यप्रदेश की यूनिवर्सिटीज में फीस के नाम पर वसूली जारी है। मंत्री इंदर सिंह परमार के आदेश के बाद भी पोर्टल पर पूरी फीस नहीं दिखाई जा रही है।

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Ramanand Tiwari
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Recovery continues from students in MP, transparency limited to files only

Photograph: (the sootr)

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BHOPAL.मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा अब सेवा नहीं, व्यवसाय बनती जा रही है। विश्वविद्यालय छात्रों से फीस और अन्य गतिविधियों के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। लेकिन पोर्टल पर पूरी फीस दिखाने से लगातार बचा जा रहा है।

मंत्री परमार के सख्त निर्देश, फिर भी अमल नदारद

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने फीस विनियामक आयोग के अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों से ली जाने वाली पूरी फीस का विवरण पोर्टल पर दिखना चाहिए। ताकि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो और पारदर्शिता बनी रहे।

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विश्वविद्यालय छिपा रहे असली फीस स्ट्रक्चर

मंत्री परमार के मुताबिक शासन एवं निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। विश्वविद्यालय केवल ट्यूशन फीस पोर्टल पर दर्ज करते हैं। हॉस्टल, मेस और अन्य शुल्क जानबूझकर छिपाए जाते हैं।

छात्रों की शिकायत है कि पोर्टल पर जो फीस दिखाई जाती है, असल में उनसे उससे कहीं अधिक राशि वसूली जाती है। यही वजह है कि फीस को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं।

आयोग की भूमिका पर बड़ा सवाल

फीस विनियामक आयोग की जिम्मेदारी है कि पूरी फीस संरचना सार्वजनिक हो। लेकिन अब तक आयोग की सक्रियता सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आई है। छात्रों के हित में ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

छात्र खुलकर शिकायत क्यों नहीं कर पा रहे?

जब मंत्री से पूछा गया कि छात्र अपनी समस्या कहां रखें, तो उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकतर छात्र खुलकर शिकायत नहीं कर पाते। केवल चुनिंदा छात्र ही आगे आते हैं, बाकी डर या दबाव में चुप रहते हैं।

शिक्षा माफिया हावी, व्यवस्था लाचार

शिक्षा माफियाओं ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों को कमाई का केंद्र बना दिया है। फीस के साथ-साथ एक्टिविटी चार्ज के नाम पर भी वसूली की जा रही है। इसका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।

सिर्फ ट्यूशन फीस दिखाकर बच निकलते विश्वविद्यालय

मंत्री परमार ने साफ कहा कि विश्वविद्यालय केवल ट्यूशन फीस दिखाते हैं। अन्य शुल्क जानबूझकर पोर्टल से गायब रखे जाते हैं। यही सबसे बड़ा खेल और छात्रों के साथ अन्याय है।

नए निर्देश, लेकिन भरोसा कम

अब मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि ली जाने वाली हर राशि पोर्टल पर अपलोड हो। हॉस्टल, मेस और अन्य सभी शुल्क स्पष्ट दिखाए जाएं। लेकिन सवाल यही है कि आयोग इसे लागू कराएगा या फिर पर्दा डाल देगा।

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शिक्षा की गुणवत्ता पर भी संकट

प्रदेश में कहीं शिक्षक नहीं, कहीं छात्र कम हैं। कहीं भवन हैं तो बैठने की जगह नहीं।
गुणवत्ता की बातें हो रही हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है।

...निर्देश बहुत, कार्रवाई शून्य

फीस लूट पर मंत्री के निर्देश सामने आ चुके हैं। लेकिन जब तक विनियामक आयोग सक्रिय नहीं होगा, तब तक छात्रों के साथ अन्याय और शिक्षा की बदहाली यूं ही जारी रहेगी।

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