/sootr/media/media_files/2026/02/28/mp-housing-board-illegal-advocate-payment-scandal-investigation-2026-02-28-15-07-55.jpg)
BHOPAL. एमपी गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (MPHIDB) में लाखों रुपए के भुगतान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विभागीय आदेश के मुताबिक, एक अधिवक्ता को निर्धारित शुल्क से अधिक भुगतान किए जाने पर अब विभागीय जांच बैठा दी गई है। वहीं, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक अधिकारी की गलती थी या फिर पूरे सिस्टम की चुप्पी इसमें शामिल थी?
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर हाईकोर्ट में दायर दो याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के बाद 16 अगस्त 2022 को आदेश पारित हुआ था। इसके बाद पत्र दिनांक 10 अक्टूबर 2022 के माध्यम से अधिवक्ता प्रशांत सिंह को भुगतान का निर्देश दिया गया था।
यह भुगतान अलग-अलग मद से दो बार 18 लाख 15 हजार रुपए का था। पूर्व में भी एक लाख 40 हजार रुपए का भुगतान किया जा चुका था। इस तरह कुल मिलाकर 37 लाख 70 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया था।
नियम क्या कहते हैं?
मंडल के 2015 के नियमों के मुताबिक, अधिवक्ता शुल्क का निर्धारण और उससे अधिक भुगतान की मंजूरी केवल आयुक्त को ही है। आदेश में साफ कहा गया है कि आयुक्त की अनुशंसा के बिना ही अधिक भुगतान किया गया था, जिससे मंडल को वित्तीय नुकसान हुआ है।
अब कार्रवाई क्यों?
मामले में आरके राजनेगी (तत्कालीन कार्यपालन यंत्री) को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके लिए 18 जून 2024 को आरोप पत्र भी जारी किया गया था। उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद अब 20 फरवरी 2026 को विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जांच अधिकारी के रूप में अपर आयुक्त महेंद्र सिंह को नियुक्त किया गया है। साथ ही, एक माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
बड़ा सवाल
यदि भुगतान नियम विरुद्ध था तो उस समय लेखा शाखा ने आपत्ति क्यों नहीं उठाई?
आयुक्त स्तर पर अनुमोदन के बिना इतनी बड़ी राशि कैसे जारी हो गई?
क्या सिर्फ एक अधिकारी पर कार्रवाई कर मामला सीमित किया जा रहा है?
क्या वरिष्ठ अधिकारियों की मौन सहमति या प्रशासनिक लापरवाही भी इसमें शामिल थी?
जांच से क्या निकलेगा?
फिलहाल विभाग ने इसे वित्तीय हानि माना है, लेकिन यह साफ नहीं है कि हानि की असली रकम कितनी है और वसूली की प्रक्रिया कैसे होगी।अगर जांच निष्पक्ष तरीके से हुई, तो यह मामला सिर्फ एक भुगतान विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मंडल की आंतरिक वित्तीय निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं।
अब आगे क्या...
मंडल में 37 लाख से अधिक का भुगतान कोई छोटी रकम नहीं है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि भुगतान कैसे हुआ - बल्कि यह भी है कि क्या सिस्टम जानबूझकर सोया रहा या किसी ने आंखें मूंद लीं? अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं… क्या सच्चाई सामने आएगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
ये खबर भी पढ़िए...
मंदसौर ब्लड बैंक घोटाला: प्रोत्साहन के नाम पर बांट दिए 43 लाख से अधिक
MP News: छुट्टी में भी खुलेंगे रजिस्ट्री ऑफिस, एक अप्रैल से बदलेगी रजिस्ट्री की गाइडलाइन
मध्यप्रदेश ESB की परीक्षा में हाईप्रोफाइल गैंग, सेंटर पर कंप्यूटर कंप्रोमाइज से करा रहे पास
एमपी हाउसिंग बोर्ड: चीफ अकाउंट अफसर अल्पना ओझा को हटाया, आरोपों की लोकायुक्त जांच जारी
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us