मंदसौर ब्लड बैंक घोटाला: प्रोत्साहन के नाम पर बांट दिए 43 लाख से अधिक

मंदसौर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 43 लाख 91 हजार रुपए का बड़ा घोटाला सामने आया है। जानें कैसे 9 साल तक 35 डॉक्टरों ने मिलकर लाखों रुपए डकारे हैं...

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Amresh Kushwaha
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mandsaur blood bank scam 43 lakh corruption investigation

मंदसौर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां मरीजों की रगों में दौड़ने वाले खून के बदले मिलने वाली राशि में सेंधमारी की गई है। करीब 35 डॉक्टरों और 26 कर्मचारियों ने मिलकर 43 लाख 91 हजार रुपए आपस में बांट लिए। ये पैसे प्रोत्साहन राशि के नाम पर थे।

जानें कैसे हुआ खेल

नियमों के अनुसार, निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ब्लड बैंक से खून लेने पर प्रति यूनिट 1050 रुपए देने होते हैं। साथ ही, एक डोनर भी देना अनिवार्य होता है। यह पूरी रकम रोगी कल्याण समिति (RKS) के खाते में जमा होनी चाहिए थी।

वहीं, मंदसौर में कुछ अलग ही फॉर्मूला अपनाया गया था। यहां सिर्फ 750 रुपए ही समिति में जमा हो रहे थे। बाकी के 300 रुपए प्रति यूनिट को प्रोत्साहन के नाम पर स्टाफ आपस में बांट रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी नियमों में ऐसी किसी राशि के बंटवारे का कोई प्रावधान ही नहीं है।

करीब 9 साल का काला चिट्ठा खुला

जांच में यह सामने आया है कि यह भ्रष्टाचार का खेल अप्रैल 2016 से शुरू होकर जनवरी 2025 तक बिना रुके चलता रहा। इन 9 सालों में कुल 14 हजार 639 यूनिट खून के बदले विभाग को एक करोड़ 53 लाख रुपए मिले थे।

वहीं, इस रकम में से 43 लाख 91 हजार रुपए आपस में बांट लिए गए थे। इस पूरे मामले में पहले के सिविल सर्जन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इन्होंने अपने लोगों को फायदा पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

इन 61 कर्मचारियों बांटी गई इतनी राशि

क्र.सं.नामपदराशि (₹)
1डॉ. सौरभ मंडवारियापैथोलॉजिस्ट8,63,000
2डॉ. सौरभ शर्माबीबी एमओ12,53,700
3डॉ. नोमिता मिश्राबीबी एमओ1,17,000
4डॉ. रोहित हरगौड़चिकित्सा अधिकारी5,400
5डॉ. बी.एस. कटारेचिकित्सा अधिकारी15,600
6डॉ. वैभव जैनचिकित्सा अधिकारी12,450
7डॉ. नवीन कुमार मंडलोईचिकित्सा अधिकारी4,500
8डॉ. विकास शर्माचिकित्सा अधिकारी750
9डॉ. दिनेश शर्माचिकित्सा अधिकारी150
10डॉ. जगदीश गहलोतचिकित्सा अधिकारी450
11डॉ. घनश्याम पाटीदारचिकित्सा अधिकारी1,500
12डॉ. संजय शर्माचिकित्सा अधिकारी2,550
13डॉ. चंद्रशेखर शाक्यचिकित्सा अधिकारी300
14डॉ. दीपक अग्रवालचिकित्सा अधिकारी1,350
15डॉ. निशांत शर्माचिकित्सा अधिकारी8,550
16डॉ. विशाल गौरचिकित्सा अधिकारी8,250
17डॉ. अर्पित पोरवालचिकित्सा अधिकारी1,800
18डॉ. ओ.पी. लबानाचिकित्सा अधिकारी1,050
19डॉ. पी.सी. आर्यचिकित्सा अधिकारी6,300
20डॉ. कपिल शर्माचिकित्सा अधिकारी900
21डॉ. अरिहंत जैनचिकित्सा अधिकारी9,300
22डॉ. कुशलराज पाटीदारचिकित्सा अधिकारी2,100
23डॉ. के.सी. दवेचिकित्सा अधिकारी600
24डॉ. आर.के. द्विवेदीचिकित्सा अधिकारी3,150
25डॉ. सुनील कुमावतचिकित्सा अधिकारी6,600
26डॉ. सिद्धार्थ जैनचिकित्सा अधिकारी450
27डॉ. पी.के. गुप्ताचिकित्सा अधिकारी750
28डॉ. आसिफ खानचिकित्सा अधिकारी300
29डॉ. शरिल खन्नाचिकित्सा अधिकारी1,350
30डॉ. राकेश कुमार पाटीदारचिकित्सा अधिकारी900
31डॉ. मुकेश कुमावतचिकित्सा अधिकारी1,050
32डॉ. मनीष मिंडाचिकित्सा अधिकारी1,500
33डॉ. अर्जुन जाटचिकित्सा अधिकारी300
34डॉ. हिमांशु परमारचिकित्सा अधिकारी600
35डॉ. अनुप बहादुर जैनचिकित्सा अधिकारी1,650
36एस.एस. कुशवाहलैब टेक्नीशियन300
37संदीप वर्मालैब टेक्नीशियन2,60,100
38हरपाल सिंह जादौनलैब टेक्नीशियन3,28,300
39गोपाल पोरवाललैब टेक्नीशियन1,47,100
40राजेंद्र शर्मालैब टेक्नीशियन1,20,800
41शैलेश सोनीलैब टेक्नीशियन1,53,400
42ईश्वर पाटीदारलैब टेक्नीशियन46,000
43पूनम शर्मालैब टेक्नीशियन1,98,100
44सज्जनलाल बाफनालैब टेक्नीशियन16,700
45मुख्तियार मंसूरीलैब टेक्नीशियन1,28,800
46सुमन शर्मालैब टेक्नीशियन17,900
47मंजूर अहमदलैब टेक्नीशियन31,800
48दिलीपसिंह भाटीलैब टेक्नीशियन24,300
49सुरक्षा श्रीमाललैब टेक्नीशियन10,300
50मनीषा बैरागीलैब टेक्नीशियन13,800
51गजराजसिंह भीलालालैब टेक्नीशियन6,800
52अजय प्रजापतिलैब टेक्नीशियन4,450
53अनिल भूरियालैब टेक्नीशियन5,600
54गजेंद्रलैब टेक्नीशियन1,31,700
55चंद्रशेखर डाबीलैब टेक्नीशियन12,000
56श्रद्धा पाटीदारलैब टेक्नीशियन98,400
57महेंद्र बारोटलैब सहायक54,150
58अमरीन कुरैशीलैब सहायक19,950
59कुशललैब सहायक39,000
60राधा पाटीदारलैब सहायक1,02,100
61संजना सोनीलैब सहायक80,550
कुल बांटी गई राशि43,91,550

कलेक्टर को रखा अंधेरे में रखकर तैयार हुई नोटशीट

इस खेल की शुरुआत 2016 में ब्लड बैंक के तत्कालीन प्रभारी डॉ. सौरभ मंडवारिया के एक प्रस्ताव से हुई थी। इसके बाद, सिविल सर्जन डॉ. एके मिश्रा ने एक नोटशीट बनाई थी। इसमें एड्स कंट्रोल विभाग के एक पुराने पत्र का हवाला देते हुए तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह को भ्रमित किया गया था।

इसे वेतन मद बताकर मंजूरी ली गई थी। इसके तहत प्रभारी को 150, टेक्नीशियन को 100 और असिस्टेंट को 50 रुपए प्रति यूनिट दिए जाने लगे थे। जैसे ही यह मामला सामने आया, तुरंत यह राशि लेना बंद कर दिया गया।

इस तरह ली जा रही थी घोटाले की राशि

इस घोटाले में रिश्तों की भी बड़ी अहम भूमिका रही। तत्कालीन सीएस डॉ. एके मिश्रा ने अपनी बेटी डॉ. नोमिता को प्रभारी बना दिया था। साथ ही, उसे एक लाख 17 हजार रुपए का भुगतान करवा दिया था।

वहीं, एक और पूर्व सीएस डॉ. डीके शर्मा के दौरान उनके बेटे डॉ. सौरभ को ब्लड बैंक इंचार्ज बना दिया गया था। इन्हें 12 लाख 52 हजार रुपए का भुगतान हुआ था। यानी सिस्टम सुधारने के बजाय, बड़े लोग अपने ही परिवार के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी पैसे को अपनी जेब में डाल रहे थे।

जिम्मेदारों की सफाई- हमें नियमों का पता नहीं था

जब मामला बढ़ा, तो तत्कालीन प्रभारी ने बचाव करना शुरू कर दिया। डॉ. सौरभ मंडवारिया का कहना है कि यह प्रस्ताव निजी डॉक्टरों की मांग पर भेजा गया था।

वहीं, वर्तमान सीएमएचओ डॉ. जीएस चौहान का कहना है कि जो कर्मचारी वेतन ले रहे थे, उनके लिए ऐसी कोई प्रोत्साहन राशि का नियम नहीं था।

अब प्रशासन इस रकम की रिकवरी करने की तैयारी कर रहा है। अदिति गर्ग मंदसौर कलेक्टर ने साफ कहा है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, भविष्य में ऐसी लूट को रोकने के लिए पूरी व्यवस्था बदलने का निर्णय लिया गया है।

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