मंदसौर के बिल्डरों का कारनामा : सीएम के नकली भतीजे ने किया मध्य प्रदेश में कॉलोनी का उद्घाटन
Sanjay Dhiman | Feb 13, 2026, 17:06 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के नीमच में मंदसौर के बिल्डरों ने सीएम मोहन यादव के फर्जी भतीजे से कॉलोनी का उद्घाटन करा दिया। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होते ही राज खुला।
Mandsaur. मध्य प्रदेश के नीमच जिले की मनासा तहसील में एक नया विवाद सामने आया है। मंदसौर के दो बिल्डरों ने अपने नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के प्रचार के लिए सीएम डॉ मोहन यादव के परिवार के नाम का सहारा लिया।
इन बिल्डरों ने बकायदा सीएम के बड़े भाई और भतीजे के फोटो और नाम का इस्तेमाल अपने रियल स्टेट बिजनेस के प्रचार-प्रसार के लिए किया। हद तो तब हो गई जब यह लोग मंच पर सीएम के नकली भतीजे को ले आए और उसका सम्मान तक कर दिया।
मंदसौर के रियल स्टेट कारोबारी कोमल बाफना और उनके साथी हरीश विजयवर्गीय ने मनासा में अपनी नई 'खाटू धाम कॉलोनी' लॉन्च की। इन्होंने पूरे शहर में पोस्टर लगवा दिए। इन पोस्टरों पर सूबे के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सांसद सुधीर गुप्ता के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भाई नारायण यादव की बड़ी सी फोटो लगा दी गई।
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इन बिल्डरों ने मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य, नारायण यादव और उनके बेटे अभय यादव के नाम का दुरुपयोग किया। बैनरों पर इन दोनों का नाम बड़े पैमाने पर प्रचारित किया गया। यह प्रचार ऐसा था, जैसे पूरी कॉलोनी को मुख्यमंत्री के परिवार का संरक्षण मिल रहा हो।
8 फरवरी को कॉलोनी के उद्घाटन कार्यक्रम में एक युवक को ‘अभय यादव’ के रूप में मंच पर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने उसे मुख्यमंत्री के भतीजे के रूप में पेश किया। यह युवा सम्मान की प्रतीक के तौर पर फूलों की माला और शॉल पहनकर मंच पर आया।
यह सब तब तक चलता रहा जब तक कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हो गए। मनासा के थाना प्रभारी शिव रघुवंशी ने इस तस्वीर को देखकर संदेह जताया। उन्होंने असली अभय यादव से संपर्क किया, और पता चला कि वह ग्वालियर में थे, मनासा में उनका कोई कार्यक्रम नहीं था।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बिल्डरों को थाने तलब किया। इसके बाद बिल्डरों ने अपनी गलती स्वीकार की और माफीनामा लिखा। पुलिस ने कहा कि इस मामले में कन्हैयालाल चौहान नामक व्यक्ति की तलाश की जा रही है, जिसने बिल्डरों को गलत जानकारी दी।
इस 'नकली भतीजे' वाले कांड में पुलिस ने फिलहाल सिर्फ माफीनामा लिया है, लेकिन कानूनी जानकारों के मुताबिक इस धोखाधड़ी में निम्नलिखित धाराएं बन सकती हैं:
एक कॉलोनाइजर के लिए TNCP (Town and Country Planning ) और रेरा (RERA) से अनुमति लेना कठिन काम होता है। इस मामले में सीएम के भाई नारायण यादव की फोटो भी इसीलिए लगाई ताकि स्थानीय प्रशासन पर दबाव बना सके।
कोमल बाफना का इतिहास काफी चर्चाओं भरा रहा है। साल 2016 तक वह सरकारी लाइसेंस पर डोडाचूरा का बड़ा कारोबारी था। उसका नाम मंदसौर के दिग्गज नेता प्रहलाद बंधवार की हत्या के वक्त भी उछला था, तब पुलिस ने उससे कड़ी पूछताछ की थी। इतना ही नहीं, सलीम लाला एनकाउंटर से जुड़े विवाद के कारण फिरोज लाला ने बाफना पर सरेआम गोली भी चलाई थी। हाल ही में उसके बेटे चयन और साले हरीश पर भी मारपीट का केस दर्ज हुआ है।
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सीएम के असली भतीजे, अभय यादव ने इस घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार उनके परिवार का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने मामले की जांच की भी मांग की है।
इन बिल्डरों ने बकायदा सीएम के बड़े भाई और भतीजे के फोटो और नाम का इस्तेमाल अपने रियल स्टेट बिजनेस के प्रचार-प्रसार के लिए किया। हद तो तब हो गई जब यह लोग मंच पर सीएम के नकली भतीजे को ले आए और उसका सम्मान तक कर दिया।
खाटू धाम कॉलोनी और बड़े नामों का सहारा
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सत्ता से करीबी का दिखावा
नकली भतीजा मंच पर
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ राज
पुलिस की कार्रवाई
कौन सी कानूनी धाराएं (IPC/BNS) लग सकती हैं?
- धारा 419 (IPC) / 319 (BNS): प्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by personation)। किसी और की पहचान बताकर फायदा उठाना।
- धारा 420 (IPC) / 318 (BNS): धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति के लिए प्रेरित करना। ग्राहकों को सीएम के परिवार का नाम लेकर गुमराह करना इसी श्रेणी में आता है।
- धारा 120B (IPC) / 61 (BNS): आपराधिक साजिश। नकली भतीजे को बुलाना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
- धारा 468 (IPC) / 336 (BNS): जालसाजी (Forgery)। पोस्टर में बिना अनुमति के फोटो का इस्तेमाल करना।
प्रशासनिक रसूख और अनुमतियों का खेल
बिल्डर का रहा है विवादित इतिहास
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