औपचारिकता में बदला जनसंवाद, सीएम मोहन यादव के कहने के बाद भी 90% कलेक्टर नहीं उतरे फील्ड पर
Amresh Kushwaha | Apr 16, 2026, 14:44 IST
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मुख्यमंत्री मोहन यादव के बार-बार निर्देशों के बाद भी मध्यप्रदेश में करीब 90 प्रतिशत कलेक्टरों ने अपने कार्यकाल में कभी गांव में रात नहीं बिताई। जनसंवाद की पहल महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
News In Short
- मुख्यमंत्री ने अफसरों को गांव में चौपाल लगाकर जनसंवाद के निर्देश दिए थे।
- करीब 90 प्रतिशत कलेक्टरों ने कभी गांव में रात नहीं बिताई।
- कुछ अधिकारी गांव गए, लेकिन वीडियो और फोटो की औपचारिकता तक सीमित रहे।
- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की मौजूदगी न के बराबर दिख रही है।
- कुछ कलेक्टरों ने जरूर जनता के बीच जाकर समस्याएं सुनीं और कार्रवाई की है।
News In Detail
CM का आदेश, जमीन पर खाली हाथ
एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के मुताबिक, स्थिति यह है कि करीब 90 प्रतिशत कलेक्टरों ने अपने पूरे कार्यकाल में कभी किसी गांव में रात नहीं बिताई। जो कुछ अधिकारी गांव गए भी, उनका दौरा अधिकतर औपचारिकता तक सीमित रहा।
वीडियो बनवाया और लौट आए
प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकारी मुख्यालय तक सिमटे रहे। कई जिलों में लोगों को शहर के वार्डों और बस्तियों में भी कम ही देखा गया है। पुलिस महकमे के अफसरों में भी यही स्थिति देखने को मिली है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा था?
जनसंवाद से क्या होता फायदा
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की असली स्थिति सामने आती। स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ती। ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। प्रशासन और जनता के बीच भरोसा मजबूत होता और भ्रष्टाचार व लापरवाही पर अंकुश लगता।
ये कलेक्टर, जो जनता के बीच दिखे
रीवा के कलेक्टर आईएएस नरेंद्र सूर्यवंशी 13 अप्रैल को जवा के जतरी गांव पहुंचे और वहां लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
सीधी के कलेक्टर आईएएस विकास मिश्रा ने अप्रैल के पहले और दूसरे सप्ताह में सिंहवल, अमिलिया, कोदौरी, हटवा आदि गांवों में पहुंचकर रात में चौपाल लगाई और लोगों की समस्याएं सुनकर कार्रवाई की।
बड़वानी कलेक्टर आईएएस जयति सिंह भी हाल ही में शासकीय जनजातीय कन्या आश्रम बघाड़ी में रात रुकी थीं। वहां छात्राओं से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान के लिए निर्देश दिए।
टीकमगढ़ के कलेक्टर आईएएस विवेक श्रोत्रिय हाल के दिनों में जिले की टोरिया ग्राम पंचायत में रात्रि चौपाल लगाने पहुंचे थे। पंचायत भवन में ही रुके और विकास कार्यों की जानकारी ली, समस्याएं सुनीं।
निवाड़ी की कलेक्टर आईएएस जमुना भिड़े जनसंवाद के लिए गांव नेपुरा पहुंची थीं। पीडीएस (Public Distribution System), पानी और पेंशन संबंधी शिकायतें मिलीं और उन्होंने समस्याएं सुनते हुए निर्देश दिए।
अब जरूरत है सख्त निगरानी की
सरकार को चाहिए कि वह ऐसे दौरों की नियमित निगरानी करे। जो अधिकारी जनता के बीच नहीं जाते, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। तभी जनसंवाद की पहल सार्थक बन सकती है।
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