एमपी में गैर-एसएएस को नहीं मिल रहा आईएएस अवॉर्ड, 10 साल से सपना अधूरा

Sourabh Bhatnagar | Aug 14, 2026, 10:56 IST
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mp non sas officers ias award
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मध्य प्रदेश के गैर-एसएएस राजपत्रित अफसरों का आईएएस बनने का इंतजार अब 10 साल लंबा हो गया है। साल 2016 के बाद से इन अफसरों के लिए आईएएस कोटे के पद तय नहीं किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर देश के 8 राज्यों ने अपने 37 अफसरों को आईएएस बनने का मौका दे दिया है।

    मध्य प्रदेश में कई काबिल अफसरों का आईएएस बनने का सपना अटका हुआ है। गैर-एसएएस राजपत्रित अधिकारी बीते 10 साल से इंतजार कर रहे हैं। विभागीय प्रमोशन तो दोबारा शुरू हो चुके हैं। लेकिन इन अफसरों के आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया 2016 से रुकी है।

    कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के आंकड़े इस देरी को साफ दिखाते हैं। बीते दो साल में 8 राज्यों ने 37 गैर-एसएएस अफसरों को आईएएस अवॉर्ड दिया। गुजरात, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य लगातार यह प्रक्रिया चला रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में 2016 के बाद से यह पद ही तय नहीं हुए। राज्य सरकार का ध्यान भी अभी तक इस मुद्दे पर नहीं गया है।

    एसएएस-गैर एसएएस का फर्क

    एसएएस (मप्र राज्य प्रशासनिक सेवा) और गैर-एसएएस अफसरों में क्या फर्क है, यह समझना जरूरी है। मध्य प्रदेश में एसएएस अफसरों के लिए हर साल पद तय होते हैं। एसएएस का मतलब है राज्य प्रशासनिक सेवा। इन्हीं पदों के जरिए एसएएस अफसर आईएएस बनते हैं। लेकिन गैर-एसएएस अफसरों के लिए यह प्रक्रिया 10 साल से बंद है। यानी दूसरे विभागों के राजपत्रित अफसर पीछे छूट गए हैं।

    केंद्र सरकार ने 1997 में एक खास नियम बनाया था। इसका नाम है आईएएस (चयन द्वारा नियुक्ति) विनियम। इस नियम से राज्य के गैर-एसएएस राजपत्रित अफसरों को भी मौका मिलता है। शर्त सिर्फ इतनी है कि वे राजपत्रित पद पर स्थाई रूप से पदस्थ हों।

    मामला क्यों अटका

    मामला 10 साल से क्यों अटका है, इसकी वजह भी सामने आई है। मप्र राजपत्रित अधिकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डीके यादव ने पूरी बात बताई। उनके मुताबिक 2016 में आखिरी बार 4 अफसरों को आईएएस अवॉर्ड मिला था। इनमें वित्त विभाग की मंजूर शर्मा शामिल थीं। पंजीयन विभाग के श्रीकांत पांडेय भी इस सूची में थे। जेल विभाग के संजय गुप्ता और तकनीकी शिक्षा विभाग के नसीमुद्दीन भी शामिल थे। इसके बाद से यह प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई। डीके यादव का आरोप है कि आईएएस लॉबी जानबूझकर मामला दबा रही है।

    दूसरे राज्यों की रफ्तार

    दूसरे राज्यों की रफ्तार देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है। साल 2024 में कुल 15 गैर-एसएएस अफसरों को आईएएस अवॉर्ड मिला था। इनमें तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्य आगे रहे। साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 22 हो गया। गुजरात, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। यानी दो साल में कुल 8 राज्यों ने 37 अफसरों को मौका दिया। मध्य प्रदेश इस सूची में कहीं नजर नहीं आता।

    पदों का पूरा गणित

    आईएएस पदों का पूरा गणित समझना भी जरूरी है। केंद्रीय कार्मिक विभाग के नियम के अनुसार 75% पद यूपीएससी भरती है। यह सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। बाकी 25% पद राज्य सरकार की सिफारिश पर पदोन्नति से भरते हैं। इसमें से 22% हिस्सा एसएएस अफसरों के लिए तय है। सिर्फ 3% हिस्सा नॉन-एसएएस अफसरों के लिए रखा गया है। यह हिस्सा छोटा जरूर है, पर पूरी तरह बंद नहीं होना चाहिए। मध्य प्रदेश में यह 3% वाला दरवाजा भी बंद पड़ा है।

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    आईएएस अवॉर्ड की शर्तें

    आईएएस अवॉर्ड के लिए पांच शर्तें तय की गई हैं। पहली शर्त है कि अफसर राजपत्रित पद पर स्थाई रूप से पदस्थ हो। दूसरी शर्त है कि उसका चयन पीएससी से हुआ हो। वह पद डिप्टी कलेक्टर के समकक्ष होना चाहिए। तीसरी शर्त है 1 जनवरी की स्थिति में 8 साल की सतत सेवा। चौथी शर्त उम्र से जुड़ी है। चयन वर्ष की 1 जनवरी को उम्र 54 साल से कम होनी चाहिए। पांचवीं और आखिरी शर्त है बेहद उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड। मध्य प्रदेश के कई अफसर इन सभी शर्तों को पूरा करते हैं। फिर भी उन्हें मौका नहीं मिल रहा है।

    अफसरों की नाराजगी

    राजपत्रित अधिकारी संघ के मौजूदा अध्यक्ष संतोष गांधी ने भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि आईएएस लॉबी जानबूझकर गैर-एसएएस अफसरों का हक मार रही है। संतोष गांधी के मुताबिक जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा। यह मंडल प्रदेशभर के राजपत्रित अफसरों की तरफ से बात रखेगा। वे चाहते हैं कि रुकी हुई प्रक्रिया जल्द शुरू हो। साथ ही हर साल गैर-एसएएस पदों का निर्धारण भी हो।

    सफलता की मिसालें

    इस नियम का फायदा उठाकर कई अफसर बड़े पदों तक पहुंचे हैं। तकनीकी कैडर से आए एसके मिश्रा इसका बड़ा उदाहरण हैं। आईएएस अवॉर्ड के बाद वे प्रमुख सचिव के पद तक पहुंचे। राकेश श्रीवास्तव भी इसी रास्ते से कमिश्नर पद तक गए। अरुण भट्ट आईएएस बनने के बाद मुख्यमंत्री के सचिव भी रह चुके हैं। इन उदाहरणों से साफ है कि गैर-एसएएस अफसरों में काबिलियत की कमी नहीं है। सिर्फ मौका मिलने की जरूरत है।

    आगे क्या होगा

    अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा। अफसरों की मांग है कि सरकार जल्द फैसला ले। अगर पद तय हो जाएं तो दर्जनों अफसरों को फायदा मिल सकता है। यह मामला सिर्फ कुछ अफसरों का नहीं है। यह प्रशासनिक व्यवस्था में बराबरी और मेरिट का भी सवाल है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार का रुख साफ हो सकता है। DoPT | mp ias news | आईएएस प्रमोशन |

    FAQ

    1. सवाल 1: एसएएस और गैर-एसएएस अफसर में क्या फर्क है?
      जवाब: एसएएस यानी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर सीधे राज्य सेवा परीक्षा से चुने जाते हैं और उनके लिए हर साल आईएएस पदोन्नति के पद तय होते हैं। गैर-एसएएस अफसर दूसरे विभागों के राजपत्रित पदों पर पीएससी से चुने जाते हैं और वे 1997 के अलग नियम के तहत आईएएस बनते हैं। मध्य प्रदेश में इनके लिए पद तय करने की प्रक्रिया 2016 से बंद है।
    2. सवाल 2: गैर-एसएएस अफसर आईएएस कैसे बनते हैं?
      जवाब: इसके लिए पांच शर्तें पूरी करनी होती हैं। अफसर राजपत्रित पद पर स्थाई हो, उसका चयन पीएससी से डिप्टी कलेक्टर स्तर के पद पर हुआ हो, उसने 8 साल की सतत सेवा पूरी की हो, चयन वर्ष की 1 जनवरी को उम्र 54 साल से कम हो और उसका सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट हो। इन शर्तों को पूरा करने वाले अफसरों को राज्य सरकार की सिफारिश पर आईएएस अवॉर्ड मिलता है।
    3. सवाल 3: मध्य प्रदेश में गैर-एसएएस आईएएस अवॉर्ड कब से बंद है?
      जवाब: मध्य प्रदेश में गैर-एसएएस अफसरों के लिए आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया 2016 से बंद है। उस साल आखिरी बार 4 अफसरों को अवॉर्ड मिला था। इसके बाद से राज्य सरकार ने गैर-एसएएस अफसरों के लिए आईएएस पद तय ही नहीं किए, जबकि गुजरात, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य लगातार यह प्रक्रिया चला रहे हैं।
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