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Photograph: (the sootr)
JABALPUR.मध्यप्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण के साथ निकाली गई भर्ती पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर पदों पर पुरुषों को बाहर किए जाने को लेकर दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने शासन से लिखित निर्णय पेश करने के निर्देश देते हुए मामले को 7 जनवरी को सूचीबद्ध किया है।
286 पदों पर भर्ती, पुरुष उम्मीदवारों को किया था बाहर
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इनमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद शामिल थे। विज्ञापन में इन सभी पदों पर केवल महिला उम्मीदवारों को ही पात्र माना गया था। जिससे पुरुष उम्मीदवार पूरी तरह भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए थे।
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हाईकोर्ट में चुनौती, संविधान उल्लंघन का आरोप
इस भर्ती प्रक्रिया को जबलपुर निवासी नौशाद अली सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में चुनौती दी। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में कहा गया कि भर्ती नियमों और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) के मापदंडों में लिंग के आधार पर भेदभाव की कोई अनुमति नहीं है। इसके बावजूद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 100 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का सीधा उल्लंघन है।
50% आरक्षण सीमा और लिंग भेदभाव का मुद्दा
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि यह भर्ती प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी फैसले में तय की गई 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन करती है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह प्रत्यक्ष रूप से लिंग आधारित भेदभाव की श्रेणी में आती है, जो असंवैधानिक है।
सरकार ने हटाए 218 ट्यूटर पद, बाकी पदों पर विवाद
मामला सामने आने के बाद सरकार ने सिस्टर ट्यूटर के 218 पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। हालांकि असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी रखते हुए पुरुष उम्मीदवारों को अब भी अपात्र माना गया था। जिसे लेकर विवाद और गहरा गया।
कर्मचारी चयन मंडल ने दी है मौखिक सहमति
मंगलवार 6 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने पुरुष उम्मीदवारों पर सहमति जताई है। मंडल के अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कोर्ट को बताया कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि इस निर्णय से संबंधित लिखित आदेश अभी तक रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया है।
आवेदन की अंतिम तिथि 7 जनवरी, याचिकाकर्ताओं की चिंता
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट को बताया कि भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 7 जनवरी है। यदि इस तिथि से पहले पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का लिखित आदेश जारी नहीं हुआ, तो वे आवेदन से वंचित रह जाएंगे। इस पर हाईकोर्ट ने शासन को एक दिन का समय देते हुए निर्देश दिए कि निर्णय को लिखित रूप में रिकॉर्ड पर पेश करे।
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पुरुष उम्मीदवारों का 7 जनवरी को होगा फैसला
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में भर्ती मामले को 7 जनवरी को सूचीबद्ध किया है। कोर्ट ने कहा अगली सुनवाई में पुरुष उम्मीदवारों की पात्रता और उनकी भर्ती प्रक्रिया में सहभागिता को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मंडल द्वारा दी गई मौखिक सहमति के बाद अब सभी की निगाहें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। जहां यह तय होगा कि नर्सिंग कॉलेजों की इस भर्ती में पुरुष उम्मीदवारों को समान अवसर मिलेगा या नहीं।
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