इंदौर कमिश्नरी सिस्टम पर सवाल, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

इंदौर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। आरोप है कि जीरो एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

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Rahul Dave
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Question on Indore Commissionerate system, PIL filed in High Court

Photograph: (the sootr)

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INDORE. इंदौर पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इंदौर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।

गंभीर मामलों में भी पीड़ितों को एफआईआर दर्ज करने के लिए घंटों थानों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस पर पूर्व पार्षद महेश गर्ग ने वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष यादव, रोहित उज्जैनी, मेहुल वर्मा और पंडित करण बैरागी के साथ यह याचिका हाईकोर्ट में दायर की।

थानों में जीरो एफआईआर का पालन नहीं

याचिका में आरोप है कि डीजीपी के आदेशों के बावजूद इंदौर के थानों में जीरो पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। इसके चलते पीड़ितों को एक थाने से दूसरे थाने भटकना पड़ रहा है। इससे न केवल न्याय में देरी हो रही है, बल्कि कई मामलों में अपराधी फरार होने में भी सफल हो रहे हैं।

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राजेन्द्रनगर, लसूड़िया और विजयनगर के उदाहरण

इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका में राजेन्द्रनगर थाने का उदाहरण दिया गया है। यहां जीरो पर एफआईआर दर्ज नहीं होने के कारण हत्या के आरोपी फरार हो गए। इसी तरह बॉम्बे हॉस्पिटल के पास हुई घटना में लसूड़िया और विजयनगर थाना एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे और फरियादी को भटकाया गया। इन मामलों से संबंधित अखबारों की कटिंग भी याचिका के साथ संलग्न की गई है।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन

वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष यादव ने दलील दी कि पुलिस की यह कार्यप्रणाली संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट और डीजीपी के आदेशों के बावजूद यदि फरियादी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भटकाया जाता है, तो इससे साक्ष्य प्रभावित होते हैं और न्याय की मूल भावना को ठेस पहुंचती है।

डीजीपी को पहले ही दिया था अल्टीमेटम

याचिका के साथ वह आदेश भी संलग्न किया गया है, जो तत्कालीन डीजीपी द्वारा जारी किया गया था। साथ ही महेश गर्ग द्वारा डीजीपी को लिखा गया वह पत्र भी लगाया गया है, जिसमें आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सात दिन का समय दिया गया था।

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इन अधिकारियों को बनाया गया पक्षकार

इस जनहित याचिका में प्रमुख सचिव गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, इंदौर पुलिस कमिश्नर के अलावा राजेन्द्रनगर, विजयनगर और लसूड़िया थाना प्रभारियों को पक्षकार बनाया गया है।

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