फर्जी फैकल्टी के सहारे चल रहे MP के 633 नर्सिंग कॉलेज, सीबीआई जांच में खुली पोल
Amresh Kushwaha | Sept 15, 2026, 11:45 IST
नर्सिंग छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
मध्य प्रदेश के 633 नर्सिंग कॉलेजों में फर्जी फैकल्टी का बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। सीबीआई जांच में 3251 डुप्लीकेट प्रविष्टियां और 1608 बिना रजिस्ट्रेशन वाले शिक्षक पाए गए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
- सीबीआई जांच में 633 कॉलेज फर्जी फैकल्टी पर चलते मिले।
- तीन साल में 1266 फैकल्टी की 3251 डुप्लीकेट एंट्रियां पकड़ी गईं।
- 1608 शिक्षकों का नर्सिंग काउंसिल में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
- सीबीआई ने नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि मिलाकर फर्जीवाड़ा पकड़ा।
क्या मिला सीबीआई की जांच में
इसे ही जादुई हाजिरी कहा जा रहा है। इसके अलावा 1608 शिक्षकों का मामला तो और गंभीर निकला। इन शिक्षकों का मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के डेटा में कोई रिकॉर्ड या रजिस्ट्रेशन ही नहीं मिला। सीबीआई ने नियमों और मानकों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों की विस्तृत जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की है।
कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
इसी मिलान में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। कई शिक्षकों की जानकारी अलग अलग कॉलेजों में एक साथ दर्ज मिली। यह साफ हो गया कि कागजों में सिर्फ नाम भरे गए थे। असल में इतने शिक्षक मौजूद ही नहीं थे।
तीन साल का पूरा आंकड़ा
इस तरह तीन वर्षों में कुल 633 कॉलेजों में 1266 फैकल्टी की 3251 फर्जी और डुप्लीकेट एंट्रियां पकड़ी गईं। यह आंकड़ा साफ बताता है कि फर्जीवाड़ा किसी एक साल का नहीं, बल्कि लगातार तीन साल तक चला।
शहर दर शहर फर्जीवाड़े का हाल
इंदौर में भी 41 नर्सिंग कॉलेजों की जांच हुई। इनमें 202 डुप्लीकेट फैकल्टी की एंट्री पाई गईं। जबलपुर में 22 नर्सिंग कॉलेजों के कुल 84 डुप्लीकेट फैकल्टी के नाम मिले। इस तरह पूरे प्रदेश में यह फर्जीवाड़ा फैला हुआ मिला।
ग्वालियर चंबल का जिलेवार आंकड़ा
अशोकनगर के 2 कॉलेजों में 10 डुप्लीकेट फैकल्टी पकड़ी गईं। मुरैना के 9 कॉलेजों में 67 डुप्लीकेट एंट्री मिलीं। श्योपुर के 7 कॉलेजों में 19 डुप्लीकेट फैकल्टी सामने आईं। यह पूरा आंकड़ा दिखाता है कि ग्वालियर सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ था।
एक फैकल्टी 24 कॉलेजों में दर्ज
इसके अलावा कई अन्य शिक्षकों के नाम भी 10 से 15 कॉलेजों में एक साथ दर्ज मिले। एक अन्य फैकल्टी 15 कॉलेजों में पदस्थ दिखाई गईं, जिनमें सत्र 2020 में 12 और 2021 में 3 कॉलेज शामिल थे। एक अन्य शिक्षक 12 कॉलेजों में दर्ज मिले, जिनमें सत्र 2020 में 9 और 2021 में 3 कॉलेज थे। दो अन्य शिक्षक 10-10 कॉलेजों में सत्र 2020 में ही एक साथ पदस्थ दिखाए गए।
हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
यह रिपोर्ट अब हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई होने की उम्मीद है। जांच एजेंसी अब जिम्मेदार कॉलेज संचालकों की पहचान में जुटी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
फर्जीवाड़ा इस अधिकार का सीधा उल्लंघन है। सीबीआई जांच से जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी। दोषी कॉलेजों पर कार्रवाई से भविष्य में ऐसे मामले रुकेंगे। इसलिए यह खबर शिक्षा व्यवस्था और आम जनता दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
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