27% OBC आरक्षण पर भाजपा के विधायक नहीं कर सकते अपील? अधिवक्ता आदित्य सांघी ने बताया कानून

Neel Tiwari | Oct 16, 2026, 19:20 IST
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एमपी ओबीसी आरक्षण मामले में भाजपा विधायकों की अपील पर अधिवक्ता आदित्य सांघी ने सवाल उठाए और बताया कौन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है।
एमपी ओबीसी आरक्षण मामले में भाजपा विधायकों की अपील पर अधिवक्ता आदित्य सांघी ने सवाल उठाए और बताया कौन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है।

मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा विधायकों के सुप्रीम कोर्ट जाने की खबरों पर वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अपील का अधिकार राजनीतिक दल नहीं, कानून तय करता है। उनके मुताबिक, मामले में पक्ष नहीं होने वालों को अपील करने का अधिकार नहीं है।

भाजपा विधायकों के सुप्रीम कोर्ट जाने की खबर पर सवाल

सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने कहा कि कुछ समाचारों में भाजपा विधायकों के अपील करने की जानकारी देखकर उन्हें भी आश्चर्य हुआ। उनके मुताबिक, इस मामले में कौन अपील कर सकता है, यह राजनीतिक पहचान नहीं, बल्कि कानूनी स्थिति से तय होगा।

सरकार के खिलाफ फैसला, अपील का अधिकार भी कानून के अनुसार

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने बताया कि 27% OBC आरक्षण का मामला मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के खिलाफ दायर याचिकाओं से जुड़ा है। ऐसे में फैसले को चुनौती देने का अधिकार संबंधित पक्षों को कानून के अनुसार मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल या उसके विधायक के नाम पर अपील करने की खबरों का कोई कानूनी आधार स्पष्ट नहीं है। हालांकि, किसी विधायक के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। वह अपने अधिकारों और मामले में अपनी कानूनी स्थिति के आधार पर याचिका दायर कर सकता है। केवल विधायक होने के कारण वह सरकार की ओर से अपील नहीं कर सकता।

ओबीसी आरक्षण पर बड़ा झटका: 27% आरक्षण रद्द, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग की नियुक्ति के निर्देश | Big blow to OBC reservation: 27% reservation cancelled, directions for appointment of unreserved category in 13% hold posts
27% OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को नियुक्ति के निर्देश
09 Oct 2026 ,
By Neel Tiwari
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा के सुप्रीम कोर्ट जाने की खबरों की पुष्टि जरूरी

हाई कोर्ट के फैसले के बाद आरक्षण मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की चर्चाएं सामने आई हैं। कांग्रेस की ओर से फैसले को चुनौती देने की बात भी प्रकाशित हुई थी। दूसरी ओर, भाजपा के विधायकों द्वारा अपील दायर किए जाने की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने ऐसी खबरों को भ्रामक प्रचार बताते हुए सवाल उठाया कि जब मामला सरकार के खिलाफ है, तो भाजपा के विधायक किस कानूनी आधार पर अपील करेंगे। इस दावे की पुष्टि के लिए भाजपा का आधिकारिक बयान या सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का विवरण देखना जरूरी होगा।

सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल

आदित्य सांघी ने बातचीत में बताया कि सामान्य वर्ग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल की जा चुकी है। केविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह है कि संबंधित मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले केविएट दाखिल करने वाले पक्ष को भी सुनवाई का अवसर मिले। हालांकि, केविएट दाखिल होने से दूसरे पक्ष की अपील पर रोक नहीं लगती और न ही इससे किसी पक्ष को स्वतः राहत मिलती है। सांघी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग का पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले पर सीएम मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया: कांग्रेस सरकार के अध्यादेश को बताया त्रुटिपूर्ण | CM Mohan Yadav's first reaction to High Court's decision on OBC reservation: Calls Congress government's ordinance flawed
OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार
10 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का कानूनी परीक्षण करेगी। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा।
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का कानूनी परीक्षण करेगी। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा।

30 अक्टूबर या 2 नवंबर को सुनवाई की संभावना

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी के अनुसार, दशहरा अवकाश के बाद सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर 2026 से सुनवाई शुरू होने की संभावना है। उन्होंने अनुमान जताया कि 27% ओबीसी आरक्षण (MP OBC Reservation) से संबंधित मामला 30 अक्टूबर या 2 नवंबर को सुनवाई के लिए आ सकता है। हालांकि, ये तारीखें उनके अनुमान पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक सुनवाई की तारीख सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज लिस्ट से ही स्पष्ट होगी।

इंदिरा साहनी और मराठा आरक्षण फैसले का दिया हवाला

आदित्य सांघी ने अपनी दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी और जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल मामलों का हवाला दिया। उनका कहना है कि आरक्षण की 50% सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थितियों का ठोस आधार जरूरी है। उनके मुताबिक, मध्य प्रदेश सरकार का OBC आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने का फैसला संवैधानिक कसौटियों पर खरा नहीं उतरता। यह उनकी कानूनी दलील है, जबकि अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई और संबंधित पक्षों के तर्कों पर निर्भर करेगा।

ओबीसी आरक्षण पर सरकार को अल्टीमेटम: 28 अक्टूबर को मध्य प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी | OBC Reservation Ultimatum to Government: Warning of Statewide Protest in Madhya Pradesh on October 28
MP OBC Reservation: ओबीसी महासभा का सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम, 28 अक्टूबर को प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
16 Oct 2026 ,
By Sandeep Kumar
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। ओबीसी महासभा ने सरकार को दो से तीन दिन का समय देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर भर्ती और लंबित नियुक्तियों को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी।
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। ओबीसी महासभा ने सरकार को दो से तीन दिन का समय देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर भर्ती और लंबित नियुक्तियों को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी।

हाई कोर्ट ने 27% OBC आरक्षण को किया था निरस्त

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को 27% OBC आरक्षण से संबंधित प्रावधान को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। अदालत ने OBC आरक्षण को 14% तक सीमित रखने और रोके गए 13% पदों पर तीन महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के बाद राज्य में आरक्षण को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने का भरोसा

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने कहा कि उन्हें कानून और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर विश्वास है कि सामान्य वर्ग को न्याय मिलेगा। उनका दावा है कि 50% की सीमा से अधिक आरक्षण देने के लिए ठोस संवैधानिक आधार प्रस्तुत करना जरूरी है। अब इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई किस पक्ष की ओर से लड़ी जाती है और सुप्रीम कोर्ट क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
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