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News In Short
ई-सेवा ऐप और पोर्टल से कुल 2100 तरह की सेवाएं दी जाएंगी।
मध्य प्रदेश सरकार पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी में है।
- पंचायतों में अब मौसम केंद्र और वर्षामापी यंत्र लगाए जाएंगे।
इस योजना के लिए 23 हजार पंचायतों में 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
News In Detail
मध्य प्रदेश में पंचायतों में अब ई-सेवा ऐप और पोर्टल लागू किया जाएगा। इसके जरिए पंचायत स्तर पर सेवाओं को जल्दी और आसानी से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। अभी तक लोगों को इन सेवाओं के लिए जनपद और जिला पंचायत के चक्कर लगाने पड़ते थे।
अब ये सब कुछ एक ऐप पर ही उपलब्ध होगा। इस ऐप पर कुल 2100 तरह की सेवाएं दी जाएंगी, जिनमें से करीब 600 सेवाएं अब तक उपलब्ध हो चुकी हैं।
इनमें पंचायत और एमपी ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इसका मकसद यह है कि पंचायतों में काम तेज हो, सेवाएं नियमित रूप से मिलें और पंचायत स्तर पर किसी तरह की गड़बड़ी ना हो। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है।
सरकार का फोसक ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर
असल में, अब तक केंद्र सरकार और राज्य सरकार का ज्यादा ध्यान शहरों पर था, लेकिन अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर काम हो रहा है। इसके लिए पंचायतों को मजबूत बनाना जरूरी है, क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी अब भी गांवों में ही रहती है। इसलिए पंचायतों को सशक्त बनाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
जमीनों का कब्जा होगा खत्म
मध्य प्रदेश की ज्यादातर पंचायतों के पास काफी खाली जमीन पड़ी है, लेकिन इनका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कई जगहों पर तो अतिक्रमण करने वालों ने इन कीमती जमीनों पर कब्जा भी कर लिया है।
अब सरकार इन खाली जमीनों का इस्तेमाल पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत पंचायतों की कुछ जमीनों को आगे चलकर व्यावसायिक कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी।
23 हजार पंचायतों में 350 करोड़ रुपए खर्च होंगे
अब तक पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं से बचने और होने वाले नुकसानों का सही हिसाब नहीं होता था। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र और वर्षामापी यंत्र लगाने की योजना बनाई है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों में 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे पंचायतों को मौसम में बदलाव के बारे में पहले से जानकारी मिल सकेगी। किसानों और ग्रामीणों को खतरे से पहले तैयार होने का मौका मिलेगा।
वर्षामापी यंत्र से बारिश का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है, लेकिन कई बार सिर्फ एक या कुछ पंचायतों में ही भारी बारिश होती है, जिससे पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। ऐसे में अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानतीं, जिससे पंचायत के लोगों को मदद नहीं मिल पाती है।
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