पंचायतों में बनने थे 5800 अमृत सरोवर, आधे से ज्यादा निगल गए घपलेबाज

Sanjay Sharma | Jan 30, 2026, 19:48 IST
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5800 amrit sarovars
5800 amrit sarovars

मध्य प्रदेश में पंचायत स्तर पर शायद ही कोई योजना भ्रष्टाचार की दीमक से बच पाई है। अप्रैल 2024 में प्रदेश में शुरू हुई अमृत सरोवर योजना भी घोटालों की भेंट चढ़कर रह गई।

News in Short

  • मध्य प्रदेश में 2022 में शुरू हुई अमृत सरोवर योजना के आधे तालाब गायब हैं।
  • लाखों रुपए में खोदे गए तालाब केवल पंचायत विभाग की फाइल पर नजर आ रहे हैं मौके पर नहीं।
  • कैग की रिपोर्ट की आपत्तियां भी मध्य प्रदेश के अफसरों ने नजरअंदाज कर भुगतान कर दिया।
  • पंचायतों में अमृत सरोवर में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर भी किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है।
  • मध्य प्रदेश में अमृत सरोवर योजना के तहत 5800 से ज्यादा तालाब स्वीकृत किए गए थे।

News in Detail

मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों में बन रहे अमृत सरोवरों में लापरवाही का खेल साफ दिखता है। 'द सूत्र' ने अपनी पड़ताल में मध्य प्रदेश के दर्जन भर जिलों की पंचायतों की जानकारी जुटाई है। चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि मिट्टी या मुरम खुदाई से सालों पहले बनी खदानों को अमृत सरोवर नाम देकर रुपए डकारे गए हैं।

ज्यादातर पंचायतों में छोटे-मोटे गड्ढों को ही सरोवर बताकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। तालाबों की खुदाई के नाम पर मजदूरों का हक भी मारा गया है। मस्टर रोल पर फर्जी नाम चढ़ाकर उनके हिस्से की मजदूरी भी पंचायत के जनप्रतिनिधि और विभागीय अफसर हड़प गए।

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भ्रष्टाचार ने योजना को भटकाया

दरअसल, केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2022 में गांवों में अमृत सरोवर योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में पानी की उपलब्धता के साथ ही मजदूरों को रोजगार मुहैया कराना था।

अमृत सरोवरों के जरिए भूमिगत जल स्तर में सुधार, मछली पालन के जरिए ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ना था। लेकिन, योजना के उद्देश्य पर भ्रष्टाचार भारी पड़ गया। लगभग 14 से 25 लाख रुपए की लागत से बनने वाले अमृत सरोवर हकीकत में आकार ही नहीं ले सके।

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अमृत सरोवरों में भ्रष्टाचार का दीमक

मध्य प्रदेश में शुरू हुई अमृत सरोवर योजना भी घोटालों की भेंट चढ़कर रह गई। प्रदेश में बनाए गए 5800 में से ज्यादातर अमृत सरोवर जमीन से गायब हैं। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में आधे से अधिक अमृत सरोवरों का अता पता नहीं है।

कैग अपनी रिपोर्ट में प्रदेश के अमृत सरोवरों की स्थिति पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कर चुका है। प्रदेश के कई जिलों में इस योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी विभाग तक पहुंची हैं। हांलाकि अब तक इनमें से किसी पर न तो जिम्मेदारी तय की गई और न कोई कार्रवाई के दायरे में आया है।

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कैग की रिपोर्ट की भी अनदेखी

कैग की रिपोर्ट ने पंचायत स्तर पर हुई धांधली को उजागर किया है। पंचायतों ने अमृत सरोवर के निर्माण के लिए जगह के चयन में गंभीरता नहीं दिखाई और ऐसी जगह चुनी जहां पानी का ठहरना ही संभव नहीं था। कहीं ऊंचे पठारों पर गड्ढे खोद दिए गए जो अमृत सरोवर योजना की धांधली खुद बयां कर रहे हैं। इन तालाबों से न तो कहीं सिंचाई हो रही है और न किसी गांव का जल स्तर ही सुधर पाया है।

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फाइलों पर ही आधे से ज्यादा तालाब

सेंटर फॉर फाइनेंसियल अकाउंटिबिलिटी संस्था की रिपोर्ट भी अमृत सरोवर योजना के फंड की बंदरबाट की कहानी उजागर करती है। मध्य प्रदेश में 5800 से ज्यादा सरोवर बनाए गए, जिन पर सरकार ने 737 करोड़ से अधिक बजट खर्च किया है। भारत सरकार द्वारा जारी अमृत सरोवर दिसंबर 2023 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के एक भी अमृत सरोवर को जगह नहीं मिली है।

इसी रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार जबलपुर जिले में 99, कटनी में 115, नरसिंहपुर में 60, छिंदवाड़ा में 295, ग्वालियर में 101, इंदौर में 106, सिंगरौली में 128, सीधी में 157, सिवनी में 88, रीवा में 106, भोपाल में 76, बालाघाट में 100 और मंडला में 105 अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया है। हांलाकि इनमें से ज्यादातर अमृत सरोवर अब जमीन से गायब हो चुके हैं।

एक नजर...

न बारिश झेल पाए न पानी सहेज सके

👉 अमृत सरोवरों की हकीकत जानने के लिए 'द सूत्र' की टीम ने प्रदेश के दर्जन भर जिलों से जानकारी जुटाई है। विदिशा जिले की सिरोंज जनपद की पंचायत सरेखों में 39 लाख रुपए खर्च कर बनाए गए दो अमृत सरोवरों का अब नामोनिशान ही नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि दो साल पहले केवल दिखावे के लिए इनका निर्माण हुआ था और पहली बारिश में ही वे जमीन में गायब हो गए।

👉 जबलपुर जिले की बढ़ैयाखेड़ा में अमृत सरोवर के निर्माण को पंचायत के प्रतिनिधि और सचिव- रोजगार सहायक व अधिकारियों ने कमाई का जरिया बना लिया। ग्रामीणों के नाम मस्टर पर दर्ज कर लाखों रुपए की मजदूरी हड़प ली गई और मशीन से गड्ढा खोदकर उसे अमृत सरोवर नाम दे दिया गया। इस मामले की शिकायत पर ईओडब्ल्यू में डेढ़ साल से जांच ही चल रही है।

👉 अशोकनगर की डोगरा पछार पंचायत में तीन अमृत सरोवरों पर 43 लाख रुपए खर्च किए गए। तीनों तालाब आधा किलोमीटर के दायरे में बनाए गए लेकिन अब इनमें से किसी में एक भी बूंद पानी नहीं है। अमृत सरोवरों के लाखों रुपए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।शिकायत के बाद आरईएस एसडीओ चंदन सिंह भी निरीक्षण कर वापस लौट गए। जिले में सवा सौ से ज्यादा तालाब खोदे गए लेकिन 20 करोड़ से ज्यादा खर्च के बाद भी किसी में पानी नहीं रुका।

👉 मंडला जिले की मोहगांव जनपद की पंचायत मलवाथर में भी अमृत सरोवर बरसात में बह गया। कान्हा टाइगर रिजर्व के नजदीक बोडा छपरी में पठार पर बने सरोवर में पानी ही नहीं रुका जिससे यहां मछली पालन का काम शुरू करने वाले महिला स्वसहायता समूह को नुकसान उठाना पड़ा। यहीं हालत डिंडौरी की ग्राम पंचायत सरही के अमृत सरोवरों की हुई। बारिश में तो पानी भरा लेकिन बरसात बंद होने के साथ ही वे खाली हो गए।

👉 रायसेन की बाड़ी जनपद की ग्राम पंचायत बेरखेड़ी में अमृत सरोवर निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। मिट्टी की खुदाई के बाद बन गड्ढे को मशीनों की मदद से तालाब का रूप दिया गया और सरकार से मिली 9 लाख रुपए की राशि हड़प ली गई। इन रुपयों की बंटरबांट को लेकर सरपंच प्रतिनिधि और सचिव के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत भी सार्वजनिक हुई थी लेकिन पंचायत विभाग इस पर भी कार्रवाई नहीं कर सका।

जांच के आधार पर हो रहीं कार्रवाई

वहीं इस मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संचालक छोटे सिंह ने बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए गए तालाबों के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायतों पर जिला स्तर पर कार्रवाई हुई है। कई मामलों में जिम्मेदारों को दंडित किया गया है। यदि मामलों में कार्रवाई नहीं हुई है तो उसकी जानकारी लेकर विभाग जिम्मेदारी तय करेगा।



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