एमपी की पंचायत में महिलाएं बस नाम की सरपंच, आड़ में चल रहा फर्जीवाड़ा, पांच हजार पर भ्रष्टाचार के आरोप
Aman Vaishnav | Apr 27, 2026, 09:19 IST
mp panchayat female sarpanch corruption scam
मध्य प्रदेश की पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण मिला है। इसके बाबजूद सत्ता की चाबी आज भी पुरुषों के हाथों में ही है। इस कारण से कई सारी महिला सरपंच अनजाने में भ्रष्टाचार के मामलों में फंस गई हैं।
पंचायत (लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई) में महिलाओं को प्रतिनिधित्व तो मिला, लेकिन कई जगह उनके हिस्से की सत्ता पर दूसरों ने कब्जा कर लिया है।
यही कारण है कि मध्य प्रदेश में पिछले 11 सालों (1 जनवरी 2015 से 31 मार्च 2026) में राज्य के लगभग पांच हजार सरपंचों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 15% यानी 753 महिला सरपंच हैं।
प्रदेश में पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50% से ज्यादा है। कुल 23 हजार 11 सरपंचों में 11 हजार 683 महिलाएं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।
कई जगह महिलाएं सिर्फ नाम की सरपंच बनीं है। असली फैसले उनके पति, रिश्तेदार या फिर स्थानीय दबंग लोग ही लेते रहे हैं।
जब गड़बड़ियों की जांच शुरू हुई, तो उन महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई हुई, जो अपने अधिकारों के बारे में जानती ही नहीं थीं। सबसे ज्यादा असर उन महिलाओं पर पड़ा, जो पिछड़ी जाति और आर्थिक रूप से कमजोर थीं।
साथ ही जो न तो पढ़ी-लिखी थीं और न ही प्रशासनिक प्रक्रिया को समझती थीं। कई पूर्व महिला सरपंचों को आज भी यह नहीं पता कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं।
उन सबका बस एक ही दर्द है, साहब हम तो बस नाम के सरपंच थे। पंचायत असल में कोई और ही चलाता रहा है। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जांच में यह सामने आया कि महिला सरपंचों से कागजों पर सिर्फ अंगूठा या साइन करवा लिया जाता था।
बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भुगतान और काम दिखाए जाते थे। जब गड़बड़ी पकड़ी गई, तो केस उनके नाम पर दर्ज कर दिए गए। उनका सीधा आरोप है- हमसे विश्वास लेकर हमें फंसा दिया गया।
भैंसदही की धाबा पंचायत की पूर्व सरपंच साहो परते पर निर्माण कार्य को लेकर एक लाख 88 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने का आरोप है। वहीं उनका कहना है कि यह निर्माण उनके कार्यकाल से पहले हुआ था।
इसी प्रकार इटारसी की घाटली पंचायत की मीना इवने मजदूरी करती थीं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आड़ में पंचायत चलाई गई थी।
गुना की रिजौदा-इमलिया पंचायतों में सरपंच महिलाएं हैं, लेकिन दर्पण पोर्टल पर उनके पतियों के नाम, शैलेंद्र सिंह यादव और शिवप्रताप सिंह दर्ज हैं।
10 जुलाई 2025 को दोनों पंचायतों से शुभम सेन के नाम 49 हजार 700 रुपए का दो बार भुगतान किया गया था। बिल और मस्टर रोल का पैटर्न एक जैसा था। एक ही मजदूर को एक दिन में अलग-अलग जगह काम दिखाया गया था।
मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत यदि गबन साबित हो जाता है, तो संबंधित सरपंच से पैसे की वसूली की जाती है। वहीं यदि जमा नहीं किए जाते तो सिविल जेल में भेजे जाने का भी प्रावधान है।
इसका मतलब यह है कि जिन महिलाओं को कई मामलों में गड़बड़ी की जानकारी तक नहीं थी, वे भी अब पैसे की रिकवरी और कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही हैं।
शिवपुरी की रन्नौद पंचायत की पूर्व सरपंच धनियाबाई आज भी झोपड़ी में रहकर लकड़ी बीनती हैं। मजदूरी करती हैं। उनके ऊपर सर्वशिक्षा अभियान में आठ लाख 48 हजार रुपए और सामुदायिक भवन में एक लाख 50 हजार रुपए की अनियमितता का आरोप है।
वे सचिव के साथ आरोपी बनीं थी। धनियाबाई पर 5 दिसंबर 2017 को उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था, लेकिन मामला अभी भी लंबित है।
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यही कारण है कि मध्य प्रदेश में पिछले 11 सालों (1 जनवरी 2015 से 31 मार्च 2026) में राज्य के लगभग पांच हजार सरपंचों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 15% यानी 753 महिला सरपंच हैं।
सिर्फ नाम की सरपंच, फैसला किसी और का
कई जगह महिलाएं सिर्फ नाम की सरपंच बनीं है। असली फैसले उनके पति, रिश्तेदार या फिर स्थानीय दबंग लोग ही लेते रहे हैं।
महिला सरपंच आज भी आरोप से अनजान
साथ ही जो न तो पढ़ी-लिखी थीं और न ही प्रशासनिक प्रक्रिया को समझती थीं। कई पूर्व महिला सरपंचों को आज भी यह नहीं पता कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं।
विश्वास लेकर हमें ही फंसा दिया
बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भुगतान और काम दिखाए जाते थे। जब गड़बड़ी पकड़ी गई, तो केस उनके नाम पर दर्ज कर दिए गए। उनका सीधा आरोप है- हमसे विश्वास लेकर हमें फंसा दिया गया।
सरपंच की आड़ में चल रही पंचायत
इसी प्रकार इटारसी की घाटली पंचायत की मीना इवने मजदूरी करती थीं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आड़ में पंचायत चलाई गई थी।
महिला सरपंच लेकिन नाम पति का
10 जुलाई 2025 को दोनों पंचायतों से शुभम सेन के नाम 49 हजार 700 रुपए का दो बार भुगतान किया गया था। बिल और मस्टर रोल का पैटर्न एक जैसा था। एक ही मजदूर को एक दिन में अलग-अलग जगह काम दिखाया गया था।
गड़बड़ी से अनजान फिर भी कार्रवाई
इसका मतलब यह है कि जिन महिलाओं को कई मामलों में गड़बड़ी की जानकारी तक नहीं थी, वे भी अब पैसे की रिकवरी और कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही हैं।
मजदूरी करती सरपंच पर अनियमितता का आरोप
वे सचिव के साथ आरोपी बनीं थी। धनियाबाई पर 5 दिसंबर 2017 को उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था, लेकिन मामला अभी भी लंबित है।
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