एमपी की कई पंचायतों में नियमों के विपरीत भुगतान, रिकॉर्ड में गड़बड़ी

मध्य प्रदेश की पंचायतों में 200 करोड़ से अधिक की अनियमितताएं पाई गईं। मुख्यमंत्री संबल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ी हुई। 596 पंचायतों में यह गड़बड़ी देखी गई।

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Ramanand Tiwari
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BHOPAL.मध्यप्रदेश की ग्राम पंचायतों में खर्च हुए पैसों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। Local Fund Audit की 2021-22 रिपोर्ट में बताया गया है। 21 जिलों की 596 पंचायतों ने मुख्यमंत्री संबल योजना में अंत्येष्टि सहायता के नाम पर 1.27 करोड़ रुपए निकाले।

यही नहीं, अलग-अलग योजनाओं और मदों में 200 करोड़ से अधिक के अनियमित भुगतान भी सामने आए हैं। ये सभी मामले उस समय के हैं, जब पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया गया था।

संबल योजना की अंत्येष्टि राशि में गड़बड़ी

21 जिलों की 596 ग्राम पंचायतों में मुख्यमंत्री संबल योजना की अंत्येष्टि राशि में गड़बड़ी पाई गई। 1.27 करोड़ से अधिक का अनियमित भुगतान दर्ज किया गया। बिना टेंडर या कोटेशन के 69 करोड़ से ज्यादा खर्च हुए।

1197 पंचायतों में 34.36 करोड़ के भुगतान का रिकॉर्ड नहीं मिला। सामाजिक सुरक्षा, कन्यादान और प्रधानमंत्री आवास योजना में करीब 6 करोड़ की अनियमितता पाई गई।

कुल मिलाकर 200 करोड़ से अधिक की वित्तीय गड़बड़ियां चिन्हित की गईं। मुख्यमंत्री संबल योजना में 1.27 करोड़ का अनियमित भुगतान हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में मुख्यमंत्री संबल योजना में 1 करोड़ 27 लाख 65 हजार का अनियमित भुगतान पाया गया। कुछ सचिवों द्वारा राशि अग्रिम निकालने की बात सामने आई। सीहोर, शाजापुर, उज्जैन, सागर, बैतूल, नीमच और गुना जिले प्रमुख रूप से चिन्हित किए गए हैं।

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बिना टेंडर 69 करोड़ से ज्यादा खर्च

रिपोर्ट के अनुसार 1461 ग्राम पंचायतों ने बिना टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया अपनाए 69 करोड़ 25 लाख 26 हजार 938 का भुगतान कर दिया। कई पंचायतों में सामग्री की भंडार प्रविष्टि भी दर्ज नहीं मिली, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।

1197 पंचायतों में 34.36 करोड़ का रिकॉर्ड गायब ऑडिट में सामने आया कि 1197 पंचायतों ने 34 करोड़ 36 लाख से जुड़े दस्तावेज पेश ही नहीं किए। इस कारण इन भुगतानों की विधिवत जांच नहीं हो सकी और न ही समय पर कार्रवाई के निर्देश जारी हुए।

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अन्य योजनाओं में 5.99 करोड़ की गड़बड़ी

सांची, विदिशा, चौरई, रीठी, तामिया, सेगांव और राहतगढ़ जनपदों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, मुख्यमंत्री संबल योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन के तहत 5 करोड़ 99 लाख 88 हजार का अनियमित भुगतान हुआ। रिपोर्ट में इन भुगतानों को नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया।

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वित्तीय अनुदानों में 20.99 करोड़ का संदिग्ध भुगतान

रिपोर्ट के अनुसार बिना मस्टर रोल और बिल के 20 करोड़ 99 लाख का भुगतान किया गया। जनपद स्तर पर 4.89 करोड़ नियमों की अनदेखी कर दिए गए। पंचायतों ने निर्धारित सीमा से अधिक 11.24 करोड़ खर्च किए। बिना अनुमति 1.11 करोड़ और 3.74 करोड़ के कार्यों में भी भुगतान किया गया।

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यह रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?

रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की गई है। पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन की कमी उजागर हुई है। कोरोना के बाद बढ़े कार्यकाल में निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। वर्ष 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट से साफ है कि पंचायत स्तर पर कई योजनाओं में नियमों का पालन नहीं किया गया। 

मुख्यमंत्री संबल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अनियमित भुगतान दर्ज हुए हैं। अब ध्यान इस बात पर होगा कि इन मामलों में जवाबदेही कैसे तय होती है। भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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