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Photograph: (the sootr)
SAGAR.मध्यप्रदेश में बस ऑपरेटर्स ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। यह निर्णय राज्य के सागर जिले में आयोजित एक बैठक में लिया गया था। प्रदेशभर के निजी बस ऑपरेटर्स ने इस हड़ताल के लिए एकजुट होकर, राज्य सरकार द्वारा पेश की गई नई परिवहन नीति और पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल का विरोध किया है।
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हड़ताल के कारण और विरोध
बस ऑनर्स एसोसिएशन ने अपनी शिकायतों का खुलासा करते हुए कहा कि नई परिवहन नीति ने उन्हें गंभीर समस्याओं में डाल दिया है। इसके अलावा, पीपीपी मॉडल को लागू करने से बस ऑपरेटर्स के व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। संगठन का मानना है कि इस मॉडल से निजी बसों की कीमतें बढ़ जाएंगी और बस संचालकों को आर्थिक नुकसान होगा।
कैसे शुरू होगा विरोध प्रदर्शन? जानिए पूरा शेड्यूल
यह विरोध अचानक शुरू नहीं हो रहा है, बल्कि इसकी पूरी प्लानिंग तैयार है। बस एसोसिएशन ने तय किया है कि-
23 फरवरी: सभी जिलों में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
2 मार्च: पूरे प्रदेश में बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
अनिश्चितकालीन समय: जब तक मांगें पूरी नहीं होती, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी।
सागर की बैठक में साफ कहा गया कि सरकार की नीतियां बस व्यापार को खत्म कर रही हैं। निजी ऑपरेटर्स का मानना है कि नए नियमों से उन पर टैक्स और कागजी कार्रवाई का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।
24 दिसंबर का राजपत्र और मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन
बस ऑनर्स एसोसिएशन ने विशेष रूप से 24 दिसंबर के राजपत्र का जिक्र किया, जिसमें मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव किए गए थे। एसोसिएशन ने मांग की है कि इन संशोधनों को तुरंत वापस लिया जाए। उनका कहना है कि इस संशोधन से उन्हें व्यापार करने में और भी अधिक कठिनाई होगी। इसके अलावा, एसोसिएशन 23 फरवरी को जिला स्तर पर एक ज्ञापन सरकार को सौंपेगा, जिसमें इसके खिलाफ अपने निर्णय को स्पष्ट करेगा।
हड़ताल का प्रभाव
अगर बस ऑपरेटर्स हड़ताल पर जाते हैं, तो इसका असर राज्य भर में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर पड़ेगा। लाखों लोग जो रोजाना बसों के माध्यम से यात्रा करते हैं, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, यह हड़ताल सरकारी स्तर पर भी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
क्यों हो रहा है विरोध?
निजी बस ऑपरेटर्स का कहना है कि नई परिवहन नीति और पीपीपी मॉडल से उनके व्यवसाय में अस्थिरता आ जाएगी। इसके तहत बस ऑपरेटर्स को बहुत सारी नई शर्तों का पालन करना होगा, जिससे उनकी मुनाफे की स्थिति पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही, उनके संचालन में भी बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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