कागजों में चकाचक हुए रीवा के स्कूल, बिना काम डकार लिए 28 लाख रुपए

रीवा में स्कूलों की मरम्मत के नाम पर 28 लाख के फर्जी भुगतान का मामला उजागर हुआ है। काम अधूरा होने के बावजूद तत्कालीन डीईओ ने बिल पास कर दिए। अब कमिश्नर ने 6 अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • रीवा में बिना काम कराए स्कूलों की मरम्मत के नाम पर 28.38 लाख रुपए का फर्जी भुगतान हो गया।
  • 20 सितंबर 2025 को बिना वैरिफिकेशन के ठेकेदार को राशि जारी की गई।
  • 11 फरवरी को कमिश्नर ने तत्कालीन डीईओ समेत 6 जिम्मेदारों को नोटिस थमाया है।
  • जेडी स्तर की कमेटी ने पाया कि कई स्कूलों में काम शुरू ही नहीं हुआ था, फिर भी बिल पास कर दिए गए।
  • डाक्यूमेंट्स और माप पुस्तिका (MB) में भारी विसंगतियां और हेरफेर पाया गया है।

News In Detail

रीवा. मध्य प्रदेश के रीवा जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का खेल खेला गया है। यहां स्कूलों की मरम्मत और रंगाई-पुताई के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिन स्कूलों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए निकाले गए, उनकी हालत आज भी बदहाल हैं। कागजों पर दिवालों को नया जैसा दिखाकर 28 लाख 38 हजार 229 रुपए का पेमेंट भी कर दिया गया।

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कागजों पर 28 लाख का काम

लोक शिक्षण संचालनालय ने रीवा के स्कूलों की दशा सुधारने के लिए 55 लाख रुपए का बजट अलॉट किया था। सरकारी फाइलों में बताया गया कि काम शानदार हुआ है। 20 सितंबर 2025 को तत्कालीन डीईओ ने बिना वेरिफिकेशन के, ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी को 28 लाख से अधिक की राशि जारी कर दी। आरोप है कि यह भुगतान नियमों को ताक पर रखकर किया गया।

कैसे खुली फर्जीवाड़े की पोल

जब इस मामले की शिकायत संभाग आयुक्त तक पहुंची, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। शनिवार 14 फरवरी को इस मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जेडी (ज्वाइंट डायरेक्टर) स्तर की एक विशेष जांच कमेटी गठित की। जब कमेटी जमीन पर जांच करने उतरी, तो हकीकत कुछ और ही सामने आई।

  • कई स्कूलों में मरम्मत का काम आधा-अधूरा पाया गया।

  • कुछ स्कूल तो ऐसे थे जहां रंगाई-पुताई और निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हुआ था।

  • डाक्यूमेंट्स में मेजरमेंट बुक में भारी विसंगतियां मिली हैं।

इन स्कूलों के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा

जांच टीम ने जब स्कूलों(सरकारी स्कूल) का दौरा किया, तो पाया कि फर्जी बिल और झूठे कम्पलीशन सर्टिफिकेट लगाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है। जांच के दायरे में आने वाले प्रमुख स्कूलों में ये शामिल हैं:

  • शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पयपखरा
  • हाई स्कूल दुआरी
  • पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल गुढ़
  • हायर सेकेंडरी स्कूल खैरा
  • हाई स्कूल बरैया
  • हाई स्कूल कन्या खटखटी

तत्कालीन डीईओ समेत छह अधिकारियों पर कार्रवाई 

जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बाद, प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सहित कुल छह अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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