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Photograph: (thesootr)
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- जबलपुर भोपाल एनएच 45 पर रेल ओवर ब्रिज गिरा।
- हादसा मरम्मत के दौरान हुआ।
- पुल का एक हिस्सा पहले से बंद था।
- भारी वाहन दूसरे हिस्से से गुजर रहे थे।
- विपक्ष ने निर्माण पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
भोपाल जबलपुर एनएच 45 पर रविवार को बड़ा हादसा टल गया। शहपुरा भिटोनी क्षेत्र में रेल ओवर ब्रिज अचानक गिर गया। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। यह वही पुल है जिसे जीवन रेखा कहा जाता है। कुछ साल पहले ही इसका निर्माण पूरा हुआ था। अब इसके गिरने से कई सवाल उठ रहे हैं।
जबलपुर भोपाल एनएच 45 रेल ओवर ब्रिज कैसे गिरा
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का एक हिस्सा पहले से कमजोर था। उस हिस्से पर मरम्मत का काम चल रहा था। सुरक्षा के नाम पर एक साइड बंद की गई थी। दूसरी साइड से भारी वाहन गुजर रहे थे। रविवार दोपहर अचानक वह हिस्सा भी भरभराकर गिर गया। आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जोरदार आवाज आई। धूल का गुबार दूर तक फैल गया। कुछ ही मिनटों में पूरा रास्ता बंद हो गया।
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मरम्मत के बीच हादसा, सुरक्षा दावों पर सवाल
प्रशासन का दावा था कि स्थिति नियंत्रण में है। मरम्मत के बाद पुल सुरक्षित हो जाएगा। लेकिन हादसे ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। अब लोग पूछ रहे हैं कि कमजोर पुल से ट्रैफिक क्यों चला। भारी वाहनों को अनुमति किसने दी। क्या सुरक्षा जांच पूरी हुई थी या नहीं। इस मार्ग से रोज हजारों वाहन गुजरते हैं। जबलपुर और भोपाल के बीच यह मुख्य रास्ता है। अब वैकल्पिक मार्ग से यातायात डायवर्ट किया गया है।
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पहले भी आई थी दरार की खबर
इसी ब्रिज से जुड़ी खबर पहले भी सामने आई थी। एक साइड पर दरार और झुकाव की बात कही गई थी। तब एक लेन बंद कर दी गई थी।लोगों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। आरोप लगे कि पुल में दरार समय से पहले आई और अब पूरा ढांचा गिरने से आशंका बढ़ गई है।
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कांग्रेस का आरोप, घटिया निर्माण की बात
घटना के बाद कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष संजय यादव पहुंचे। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का नतीजा बताया। कहा कि कुछ साल में पुल कैसे गिर गया। स्थानीय लोगों ने भी घटिया सामग्री का आरोप लगाया। उनका कहना है शिकायतें पहले भी दी गई थीं। लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। अब लोग स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की मांग उठी है। प्रशासन ने जांच के संकेत दिए हैं।
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आवागमन बंद, लोगों को हो रही परेशानी
पुल गिरने के बाद हालांकि इस जगह के पास स्थित टोल को तो फ्री कर दिया गया है लेकिन ब्रिज पर आवागमन बंद कर दिया गया है, वैकल्पिक रास्ते के कारण ट्रक और बसों की लंबी कतार लग गई है।
छोटे वाहन वैकल्पिक मार्ग से भेजे जा रहे हैं। स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ा है। यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्कूल और दफ्तर जाने वालों को दिक्कत हुई। फिलहाल मलबा हटाने का काम जारी है। तकनीकी टीम मौके पर जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
एक तरफ तो टोल फ्री करने का दावा किया गया है और सारे टोल गेट खोल दिए गए हैं, लेकिन यहां से जो भी गुजर रहे हैं फास्टैग से उनके 85 रुपए काटे जा रहे हैं। तो नेशनल हाईवे के टोल में आपदा में भी अवसर ढूंढा जा रहा है।
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उठ रहे हैं बड़े सवाल
क्या पुल की नियमित जांच हुई थी। क्या गुणवत्ता परीक्षण सही तरीके से हुआ था। क्या मरम्मत के दौरान ट्रैफिक रोकना जरूरी नहीं था। ये सवाल अब आम जनता पूछ रही है। इस मार्ग को प्रदेश की जीवन रेखा कहा जाता है। ऐसे में सुरक्षा पर समझौता गंभीर चिंता है। हादसे में किसी की जान नहीं गई, यह राहत की बात है। लेकिन ढांचा गिरना बड़ी चेतावनी है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है।
यह प्रोजेक्ट बांगड़ कंपनी को दिया गया था जिसके मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद जैन है। 3 से 4 तैयार किया गया 400 करोड रुपए की लागत से यह ब्रिज रेलवे लाइन के ऊपर स्थित है।
गनीमत थी कि बृज जहां पर धस है वह रेलवे लाइन से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है। अगर यही हादसा 50 मीटर पहले हुआ होता तो यह एक वीभत्स हादसा हो सकता था। क्योंकि यहां से लगातार ट्रेनों की आवाजाहि जारी रहती है।
MPRDC के अधिकारी अब इस मामले से पल्ला झाड़ने के लिए बता रहे हैं कि निर्माण कंपनी को पहले नोटिस जारी किया गया था और अब उसे कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है।
MPRDC के राकेश मोरे ने बताया कि इस ब्रिज में सुथार का कार्य चल रहा था। पिछली बार ही निर्माण कंपनी को नोटिस जारी कर दिया गया था लेकिन अब इस हादसे के बाद उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है।
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