पीएचक्यू ने नियम तोड़कर की आईपीएस अफसरों की पोस्टिंग, CM नाराज...अब गृह विभाग ने रोका आदेश

मध्य प्रदेश में पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग के बीच 9 आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने बिना अनुमति के जारी आदेश को रद्द कर दिया है।

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Amresh Kushwaha
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BHOPAL. मध्यप्रदेश में आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर बड़ा प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) के सीनियर अफसरों पर नाराजगी जताई है। मामला सीधी भर्ती से आए आईपीएस अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए जिलों में पोस्टिंग देने का है। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय का आदेश निरस्त कर दिया है।

दरअसल, पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2023 और 2024 बैच के 9 नए आईपीएस अधिकारियों को सीधे जिलों में पदस्थ कर दिया था, जबकि नियम कहता है कि ट्रेनिंग पीरियड में इस तरह की पोस्टिंग देने से पहले गृह विभाग को जानकारी देना जरूरी होता है।

क्या है पूरा मामला

सीधी भर्ती से आने वाले आईपीएस अधिकारियों को पहले ट्रेनिंग दी जाती है। इस दौरान उनका अलग-अलग स्तर पर मूल्यांकन होता है। जिलों में जमीनी ट्रेनिंग भी दी जाती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार ही होती है।

नियमों के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय प्रस्ताव बनाता है। प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जाता है। गृह विभाग से फाइल मुख्यमंत्री तक जाती है और मंजूरी मिलने के बाद ही पोस्टिंग लागू होती है। इस मामले में यह प्रक्रिया फॉलो नहीं की गई। पुलिस मुख्यालय ने सीधे आदेश जारी कर दिए थे। अब जब यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है।

किस आदेश पर हुआ विवाद

पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया था कि 77वें आरआर बैच (आवंटन वर्ष 2023 और 2024) के आईपीएस अधिकारी 24 नवंबर 2025 को प्रदेश में ज्वाइन करेंगे। इसके बाद 24 नवंबर 2025 से 12 जून 2026 तक पुलिस मुख्यालय की अलग-अलग शाखाओं और राज्य पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण लिया जाना था।

इस प्रशिक्षण के दौरान एक सप्ताह एसआईबी प्रशिक्षण तय था। इसके बाद 13 जून 2026 तक जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाना था। इसी ट्रेनिंग के लिए नए अधिकारियों को जिलों का आवंटन कर दिया गया था, जो विवाद की वजह बना है।

कौन से अधिकारी कहां भेजे गए थे?
नामजिला
आईपीएस आलोक कुमार वर्मा (2023)देवास
आईपीएस अमित कुमार (2024)खंडवा
आईपीएस दीपांशु (2024)सागर
आईपीएस काजल सिंह (2024)उज्जैन
आईपीएस लेखराज मीणा (2024)छतरपुर
आईपीएस मनोज कुमार (2024)ग्वालियर
आईपीएस राजीव अग्रवाल (2024)रीवा
आईपीएस शुभम सिंह ठाकुर (2023)जबलपुर
आईपीएस वैभव प्रिय (2023)रतलाम

गृह विभाग ने क्या कहा...

गृह विभाग ने आदेश रद्द करते हुए साफ लिखा कि यह कार्रवाई मध्यप्रदेश सरकार के कार्य नियमों के खिलाफ है। पुलिस मुख्यालय का वह आदेश, जिसमें 77वें आरआर बैच के 9 परिवीक्षाधीन आईपीएस अधिकारियों को जिलों में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था, उसे निरस्त किया जाता है।

सरकार क्यों सख्त

सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि प्रशासनिक फैसलों में तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है। खासकर आईपीएस जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की पोस्टिंग में नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बात से नाराज हैं कि गृह विभाग उनके पास होने के बावजूद यह फैसला बिना उनकी जानकारी के लिया गया।

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