MP Poshan Maah 2026: पोषण माह में मध्यप्रदेश देश में तीसरे नंबर पर, कितने बच्चे कुपोषण से बाहर आए इसका हिसाब नहीं
Ramanand Tiwari | Oct 14, 2026, 12:03 IST
एमपी राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की रैंकिंग
MP Poshan Maah 2026: मध्यप्रदेश ने पोषण माह में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। प्रदेश में 1.09 करोड़ से ज्यादा कार्यक्रम और दूसरे काम दर्ज हुए। प्रदेश के सभी 55 जिलों में पोषण माह के कार्यक्रम हुए। कितने बच्चे कुपोषण से बाहर आए, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया। मंदसौर देश में पहले और नीमच दूसरे स्थान पर रहा।
मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय पोषण माह में देश में तीसरा स्थान मिलने को बड़ी उपलब्धि बताया है। सरकार के मुताबिक, प्रदेश में पोषण से जुड़े एक करोड़ नौ लाख से ज्यादा काम दर्ज हुए हैं। मंदसौर और नीमच तो देशभर में पहले और दूसरे नंबर पर रहे। मगर सवाल यह है कि इतने कार्यक्रमों से बच्चों को कितना फायदा हुआ? कितने बच्चों का वजन बढ़ा? कितने बच्चे कुपोषण से बाहर आए? सरकार ने कार्यक्रमों की गिनती तो बता दी, मगर बच्चों की सेहत में आए बदलाव का हिसाब अभी सामने नहीं रखा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक 12 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक मध्यप्रदेश में पोषण से जुड़े एक करोड़ नौ लाख 66 हजार 805 काम रिकॉर्ड में दर्ज हुए। देशभर में यह संख्या 11 करोड़ 91 लाख 64 हजार 823 रही। इस गिनती में बिहार पहले नंबर पर रहा। महाराष्ट्र को दूसरा और मध्यप्रदेश को तीसरा स्थान मिला।
दरअसल, पोषण माह में कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। कहीं महिलाओं को सही खानपान की जानकारी दी जाती है। कहीं बच्चों का वजन मापा जाता है। कहीं माताओं को बच्चों की देखभाल के तरीके बताए जाते हैं।
इन सभी कामों की अलग-अलग गिनती होती है। एक ही बच्चा या महिला कई कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए 1.09 करोड़ का आंकड़ा यह नहीं बताता कि इतने अलग-अलग लोगों को फायदा हुआ। इससे यह भी साबित नहीं होता कि उतने बच्चों की सेहत सुधर गई।
पोषण माह में हुए कामों की गिनती के आधार पर एमपी का मंदसौर देश में पहले नंबर पर रहा। नीमच को दूसरा स्थान मिला। खास बात यह है कि दोनों जिले महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के प्रभार वाले हैं।
इन जिलों का देश में अव्वल आना अच्छी बात है। मगर बच्चों की सेहत से जुड़ी असली तस्वीर भी सामने आनी चाहिए। मंदसौर में पोषण माह शुरू होने से पहले कितने बच्चे कुपोषित थे?
इनमें से कितने बच्चों की हालत सुधरी? नीमच में कितने बच्चों का वजन बढ़ा? कितने बच्चे गंभीर कुपोषण से बाहर आए? इन सवालों का जवाब अभी जारी आंकड़ों में नहीं मिलता। अगर विभाग दोनों जिलों के पहले और बाद के आंकड़े जारी करे तो पता चल सकेगा कि बच्चों को कितना फायदा हुआ।
इस साल पोषण माह की थीम 'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी' रखी गई है। इसके तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन देने पर जोर दिया गया। महिलाओं को सही खानपान की जानकारी देने की बात कही गई।
बच्चों की देखभाल और उनकी सेहत सुधारने के लिए भी कई कार्यक्रम रखे गए। मगर असली सवाल आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ा है। क्या बच्चों को रोज समय पर खाना मिला? क्या खाने में जरूरी पोषक चीजें थीं? क्या बच्चों का वजन नियमित रूप से मापा गया? जिन बच्चों का वजन कम मिला, उनकी देखभाल के लिए क्या किया गया?
इन सवालों का जवाब सिर्फ कार्यक्रमों की गिनती से नहीं मिलेगा। इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में जाकर देखना होगा कि बच्चों को वास्तव में क्या मिल रहा है। बच्चों को पौष्टिक भोजन और सही देखभाल मिलेगी, तभी उनकी सेहत में सुधार आएगा।
सरकार के मुताबिक, मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों ने पोषण माह में हिस्सा लिया। गांवों से लेकर शहरों तक पोषण से जुड़े कार्यक्रम किए गए। महिलाओं और बच्चों को सही खानपान के बारे में बताया गया। यह अच्छी पहल है। मगर सवाल यह भी है कि इन कार्यक्रमों की जांच किसने की?
क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर देखा कि कार्यक्रम हुए भी हैं या नहीं? क्या यह जांचा गया कि कितने परिवारों तक जानकारी पहुंची? जिन बच्चों को पोषण की कमी थी, उन्हें जरूरी मदद मिली या नहीं?
विभाग ने कार्यक्रमों की गिनती सामने रखी है। अब यह भी बताना चाहिए कि इनसे लोगों को कितना फायदा हुआ। सिर्फ रिकॉर्ड में संख्या बढ़ने से बच्चों की सेहत बेहतर होने की बात नहीं कही जा सकती।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने पोषण माह में मिली रैंकिंग को उपलब्धि बताया है। लेकिन बच्चों की सेहत को लेकर पांच सवालों के जवाब भी जरूरी हैं।
राष्ट्रीय पोषण माह का मकसद बच्चों और महिलाओं को बेहतर पोषण देना है। लोगों को सही खानपान के बारे में जागरूक करना भी इसका हिस्सा है। मध्यप्रदेश में बड़े स्तर पर कार्यक्रम होना अच्छी बात है।
इससे यह पता चलता है कि प्रदेश में पोषण को लेकर काम किया गया। मगर इन कार्यक्रमों की असली सफलता बच्चों की सेहत से तय होगी। अगर किसी बच्चे का वजन कम है तो क्या उसमें सुधार आया? अगर कोई बच्चा गंभीर कुपोषण से जूझ रहा है तो क्या उसकी हालत बेहतर हुई?
क्या माताओं और छोटे बच्चों को समय पर जरूरी भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं मिलीं? इन सवालों के जवाब मिलने पर ही पता चलेगा कि सरकार की कोशिशों का कितना असर हुआ। यह भी जरूरी है कि कुपोषण एक महीने में खत्म होने वाली समस्या नहीं है।
बच्चों की सेहत सुधारने के लिए लगातार सही भोजन और देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए पुराने और नए आंकड़ों की तुलना भी जरूरी है। सरकार ने फिलहाल पोषण माह में हुए कामों की गिनती और देश में मिली रैंकिंग बताई है। अब उसे बच्चों की सेहत से जुड़े आंकड़े भी सामने रखने चाहिए।
जनता का सवाल है कि मध्यप्रदेश पोषण माह में देश में तीसरे नंबर पर आ गया। मंदसौर और नीमच भी अव्वल रहे। मगर कितने बच्चे कुपोषण से बाहर आए? सरकार इसका हिसाब कब देगी?
FAQs:
1.09 करोड़ का आंकड़ा आखिर है क्या?
आखिर कैसे हो गई इतनी बड़ी संख्या?
इन सभी कामों की अलग-अलग गिनती होती है। एक ही बच्चा या महिला कई कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए 1.09 करोड़ का आंकड़ा यह नहीं बताता कि इतने अलग-अलग लोगों को फायदा हुआ। इससे यह भी साबित नहीं होता कि उतने बच्चों की सेहत सुधर गई।
मंदसौर और नीमच पहले नंबर पर कैसे आए?
इन जिलों का देश में अव्वल आना अच्छी बात है। मगर बच्चों की सेहत से जुड़ी असली तस्वीर भी सामने आनी चाहिए। मंदसौर में पोषण माह शुरू होने से पहले कितने बच्चे कुपोषित थे?
इनमें से कितने बच्चों की हालत सुधरी? नीमच में कितने बच्चों का वजन बढ़ा? कितने बच्चे गंभीर कुपोषण से बाहर आए? इन सवालों का जवाब अभी जारी आंकड़ों में नहीं मिलता। अगर विभाग दोनों जिलों के पहले और बाद के आंकड़े जारी करे तो पता चल सकेगा कि बच्चों को कितना फायदा हुआ।
आंगनवाड़ियों में बच्चों को क्या मिला?
बच्चों की देखभाल और उनकी सेहत सुधारने के लिए भी कई कार्यक्रम रखे गए। मगर असली सवाल आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ा है। क्या बच्चों को रोज समय पर खाना मिला? क्या खाने में जरूरी पोषक चीजें थीं? क्या बच्चों का वजन नियमित रूप से मापा गया? जिन बच्चों का वजन कम मिला, उनकी देखभाल के लिए क्या किया गया?
इन सवालों का जवाब सिर्फ कार्यक्रमों की गिनती से नहीं मिलेगा। इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में जाकर देखना होगा कि बच्चों को वास्तव में क्या मिल रहा है। बच्चों को पौष्टिक भोजन और सही देखभाल मिलेगी, तभी उनकी सेहत में सुधार आएगा।
सभी 55 जिलों में काम हुआ, मगर जांच कैसे हुई?
क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर देखा कि कार्यक्रम हुए भी हैं या नहीं? क्या यह जांचा गया कि कितने परिवारों तक जानकारी पहुंची? जिन बच्चों को पोषण की कमी थी, उन्हें जरूरी मदद मिली या नहीं?
विभाग ने कार्यक्रमों की गिनती सामने रखी है। अब यह भी बताना चाहिए कि इनसे लोगों को कितना फायदा हुआ। सिर्फ रिकॉर्ड में संख्या बढ़ने से बच्चों की सेहत बेहतर होने की बात नहीं कही जा सकती।
मंत्री निर्मला भूरिया के विभाग से पांच सवाल
- पहला सवाल है कि पोषण माह के दौरान मध्यप्रदेश में कितने बच्चों की सेहत में सुधार हुआ?
- दूसरा सवाल है कि मंदसौर और नीमच में कितने बच्चे गंभीर कुपोषण से बाहर आए?
- तीसरा सवाल है कि 1.09 करोड़ से ज्यादा कामों की गिनती किस आधार पर हुई और उसकी जांच किसने की?
- चौथा सवाल है कि कितनी आंगनवाड़ियों में जाकर भोजन और बच्चों की देखभाल की जांच की गई?
- पांचवां सवाल है कि क्या विभाग सभी 55 जिलों में कुपोषित बच्चों की पहले और बाद की संख्या बताएगा?
बच्चों की सेहत सुधरी या सिर्फ गिनती बढ़ी
इससे यह पता चलता है कि प्रदेश में पोषण को लेकर काम किया गया। मगर इन कार्यक्रमों की असली सफलता बच्चों की सेहत से तय होगी। अगर किसी बच्चे का वजन कम है तो क्या उसमें सुधार आया? अगर कोई बच्चा गंभीर कुपोषण से जूझ रहा है तो क्या उसकी हालत बेहतर हुई?
क्या माताओं और छोटे बच्चों को समय पर जरूरी भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं मिलीं? इन सवालों के जवाब मिलने पर ही पता चलेगा कि सरकार की कोशिशों का कितना असर हुआ। यह भी जरूरी है कि कुपोषण एक महीने में खत्म होने वाली समस्या नहीं है।
बच्चों की सेहत सुधारने के लिए लगातार सही भोजन और देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए पुराने और नए आंकड़ों की तुलना भी जरूरी है। सरकार ने फिलहाल पोषण माह में हुए कामों की गिनती और देश में मिली रैंकिंग बताई है। अब उसे बच्चों की सेहत से जुड़े आंकड़े भी सामने रखने चाहिए।
जनता का सवाल है कि मध्यप्रदेश पोषण माह में देश में तीसरे नंबर पर आ गया। मंदसौर और नीमच भी अव्वल रहे। मगर कितने बच्चे कुपोषण से बाहर आए? सरकार इसका हिसाब कब देगी?
FAQs:
- मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय पोषण माह में कौन सी उपलब्धि हासिल की है?
मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय पोषण माह में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है, जिसमें एक करोड़ नौ लाख से ज्यादा पोषण से जुड़े कार्य दर्ज हुए हैं। - पोषण माह के दौरान मंदसौर और नीमच का प्रदर्शन कैसा रहा?
पोषण माह के दौरान मंदसौर और नीमच क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर रहे, जो महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के प्रभार वाले जिले हैं। - सरकार ने पोषण कार्यक्रमों की गिनती के आधार पर बच्चों की सेहत का क्या आंकड़ा प्रस्तुत किया है?
सरकार ने केवल कार्यक्रमों की गिनती प्रस्तुत की है, लेकिन बच्चों की सेहत में सुधार या कुपोषण से बाहर आने की संख्या के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
रायपुर में 8वीं की छात्रा ने लगाई फांसी, स्कूल प्रबंधन पर प्रताड़ना के आरोप, परिजनों ने किया प्रदर्शन
By Harrison Masih
बम की अफवाह के बाद जयपुर में फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, जर्मनी से दिल्ली आ रहा था विमान
By Ashish Bhardwaj
चूरू में पंचायत चुनाव की जिद में डबल मर्डर, पिता पर बेटे-बहू को बोलेरो से कुचलने का आरोप
By Jyoti Mahender Bhardwaj
अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में नए खुलासे: हत्या के डर से रखे थे 30 गार्ड, हमले के समय भागने का दावा
By Jyoti Mahender Bhardwaj
केंद्रीय मंत्री शिवराज जिनके पक्ष में उतरे, उन पर वन भूमि कब्जाने का आरोप, कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में बड़ा दावा
By Sourabh Bhatnagar
छत्तीसगढ़ में फिर टली CGPSC SI मुख्य परीक्षा, अभ्यर्थियों को करना होगा नई तारीखों का इंतजार
By Harrison Masih
मध्य प्रदेश में जल्द लॉन्च होगा बस टिकट ऐप, ट्रेन की तरह सेकेंड्स में बुक होगी आपकी सीट, जानें इसके फायदे और फीचर्स
By Kaushiki