सात साल बाद पाकिस्तान से रिहा एमपी का प्रसन्नजीत, खबर सुनते ही रो पड़ी बहन, कहा...

31 जनवरी को पाकिस्तान ने जेल से सात भारतीय कैदियों को रिहा किया है। इसमें एमपी के प्रसन्नजीत का नाम भी शामिल है। प्रसन्नजीत की बहन ने कई सालों तक अपने भाई की रिहाई के लिए संघर्ष किया है।

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Aman Vaishnav
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News In Short

  • प्रसन्नजीत 2017 में घर से लापता हुआ था। 
  • साल 2021 में एक फोन कॉल के जरिए पता चला कि, प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल में बंद है। 
  • प्रसन्नजीत को पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद किया गया था।
  • फिलहाल अटारी–वाघा बॉर्डर पर कस्टम और इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी हुई।

News In Detail

भाई की रिहाई के लिए बहन का संघर्ष

मध्य प्रदेश के प्रसन्नजीत रंगारी 1 अक्टूबर 2019 को पाकिस्तान के बाटापुर से गिरफ्तार हुए थे। पाकिस्तान ने उन्हें सुनील अदे के नाम से जेल में बंद किया था। दिसंबर 2021 में जब यह जानकारी सामने आई, तो प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा ने उन्हें वापस लाने के लिए बहुत संघर्ष किया। संघमित्रा ने सरकार और प्रशासन से कई बार संपर्क किया था।

अब अटारी–वाघा बॉर्डर पर कस्टम और इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद प्रसन्नजीत को अमृतसर के रेड क्रॉस भवन और गुरु नानक देव अस्पताल में रखा गया है।

बालाघाट कलेक्टर आईएएस मृणाल मीणा ने बताया कि परिवार ने मदद के लिए प्रशासन से संपर्क किया था। इसके बाद ग्राम सचिव के साथ उनके परिवार के लिए टिकट की व्यवस्था की जा रही है।

प्रसन्नजीत की बहन

परिवार में खुशी का माहौल

प्रसन्नजीत के घर वापस आने की खबर से परिवार में खुशी का माहौल है। हालांकि, मां को बेटे की वापसी की खुशी के साथ उसकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता भी है। आखिरकार सात साल बाद परिवार का इंतजार खत्म हुआ है

प्रसन्नजीत की मां

सालों बाद सुनी अपने भाई की आवाज

1 फरवरी को खैरलांजी थाना पुलिस ने परिवार को फोन किया और रिहाई की जानकारी दी। इसके बाद अमृतसर थाने से कॉल आया। इसमें संघमित्रा ने कई सालों बाद अपने भाई की आवाज सुनी।  प्रसन्नजीत के लापता होने के बाद उनके पिता लोपचंद रंगारी का निधन हो चुका था।

ये भी जानें...

2017 में लापता हुआ था प्रसन्नजीत

प्रसन्नजीत 2017 में अचानक घर से लापता हुए थे। कुछ समय बाद वे बिहार गए और वापस भी लौटे, लेकिन उसके बाद फिर से प्रसन्नजीत गायब हो गए । परिवार ने बहुत कोशिश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला इसके चलते परिवार ने प्रसन्नजीत को मृत मान लिया गया। फिर दिसंबर 2021 में अचानक एक फोन आया, इसमें पता चला कि वह पाकिस्तान की जेल में बंद हैं।

प्रसन्नजीत

पढ़ाई में तेज प्रसन्नजीत

खैरलांजी के रहने वाले प्रसन्नजीत पढ़ाई में काफी तेज थे। उनके पिता ने कर्ज लेकर उन्हें जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी. फार्मेसी की पढ़ाई करवाई थी।

साल 2011 में उन्होंने एमपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया था। इसके बाद वे आगे पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन मानसिक स्थिति बिगड़ने की वजह से पढ़ाई छोड़कर घर वापस लौट आए।

ये हैं वो सात कैदी

रिहा किए गए कैदियों में सुनील आदे उर्फ प्रसन्नजीत, चंदर सिंह उर्फ छिंदर सिंह, गुरमीत सिंह उर्फ गुरमेज सिंह, जोगिंदर सिंह, हरविंदर सिंह, विशाल, रतन पाल और शामिल हैं। ये सभी लाहौर की केंद्रीय जेल में बंद थे।

अभी भी कई भारतीय पाकिस्तानी जेल में

भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 में हुआ कांसुलर एक्सेस समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देशों ने 1 जनवरी 2026 को एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान किया। 

भारत ने पाकिस्तान को 391 नागरिक कैदियों और 33 मछुआरों की सूची दी। इनका संबंध पाकिस्तान से हो सकता है या वे पाकिस्तानी हो सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान ने भारत को 58 नागरिक कैदियों और 199 मछुआरों की सूची सौंपी, जो भारतीय हैं या भारतीय होने की संभावना है।

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