राज्यसभा की दौड़: भाजपा-कांग्रेस में घमासान, चर्चित दावेदारों को पीछे छोड़ आएंगे नए चेहरे?
Ramanand Tiwari | May 30, 2026, 23:08 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान तेज हो गया है। दिग्गज नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दोनों पार्टियां 2028 के समीकरण साधने के लिए पुराने दिग्गजों को छोड़कर नए चेहरों को मौका देकर चौंका सकती हैं।
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में नेताओं की सक्रियता बढ़ी हुई है, दावेदार अपने-अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर रहे हैं और समर्थक माहौल बनाने में जुटे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, टिकट भी उन्हीं को मिलेगा?
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इस बार मामला उतना सीधा नहीं दिख रहा, जितना पिछले चुनावों में रहा है। भाजपा जहां 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखकर फैसला कर सकती है, वहीं कांग्रेस भी ऐसा नाम सामने ला सकती है जिसकी अभी खुलकर चर्चा नहीं हो रही। ऐसे में दोनों दलों के भीतर दावेदारों और उनके समर्थकों की बेचैनी बढ़ गई है।
एक नजर में एमपी के
मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं, अंततः उन्हीं में से किसी को राज्यसभा भेज दिया जाता है। लेकिन इस बार हालात अलग नजर आ रहे हैं।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल संगठनात्मक और चुनावी रणनीति को प्राथमिकता देते दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि चर्चित दावेदारों के साथ-साथ कुछ ऐसे नाम भी चर्चा में हैं जो अभी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा नहीं बने हैं।
पार्टी नेतृत्व यह भी देख रहा है कि आने वाले नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव में कौन सा चेहरा सबसे ज्यादा राजनीतिक लाभ दिला सकता है। यही वजह है कि जातीय, क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर गहन मंथन चल रहा है।
भाजपा में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें शामिल हैं: लाल सिंह आर्य,डॉ. नरोत्तम मिश्रा,कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी, रंजना बघेल। इनमें से कई नेता पिछले दिनों दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व, संगठन पदाधिकारियों और प्रभावशाली नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।
भाजपा का राजनीतिक इतिहास बताता है कि पार्टी कई बार अंतिम समय में ऐसे नाम सामने लाती है जिनकी पहले ज्यादा चर्चा नहीं होती। इसी कारण पार्टी के भीतर भी यह भरोसे के साथ नहीं कहा जा रहा कि वर्तमान में चर्चा में चल रहे सभी बड़े नेताओं में से ही अंतिम चयन होगा। सूत्रों का दावा है कि संगठन कुछ ऐसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है जिन्हें अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया गया है।
अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य का नाम भी प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। भाजपा यदि दलित वोट बैंक को लेकर बड़ा संदेश देना चाहती है तो आर्य की दावेदारी मजबूत हो सकती है। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका भी उनके पक्ष में मानी जा रही है।
पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। ABVP और संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले भदौरिया को संगठन का मजबूत कार्यकर्ता माना जाता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि उन्हें संगठन या संसद में बड़ी भूमिका दी जा सकती है।
पूर्व गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा और वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नाम भी लगातार चर्चा में हैं। दोनों नेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है और दोनों हाल के दिनों में केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला संगठनात्मक जरूरतों और राजनीतिक गणित पर निर्भर करेगा।
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है और पार्टी को नया प्रतिनिधि चुनना है।
हालांकि, अभी तक कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किसी नाम को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। राजनीतिक गलियारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
दोनों नेताओं को अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले ही सार्वजनिक रूप से अपनी दावेदारी से दूरी बनाने की बात कह चुके हैं।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन फिलहाल इन नामों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं दे रहे।
कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी चर्चा में चल रहे नेताओं में से किसी एक पर भरोसा करेगी या फिर नेतृत्व किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाएगा? पार्टी का हालिया राजनीतिक इतिहास बताता है कि कई बार फैसले अंतिम समय में बदले हैं।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के चयन से लेकर कई संगठनात्मक नियुक्तियों तक ऐसे निर्णय हुए हैं, जिन्होंने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंकाया है। इसी वजह से कांग्रेस के भीतर भी यह संभावना जताई जा रही है कि अंतिम सूची में ऐसा नाम सामने आ सकता है जिसकी अभी खुलकर चर्चा नहीं हो रही।
भाजपा की तरह कांग्रेस में भी राज्यसभा टिकट को लेकर सक्रियता बढ़ी हुई है। अलग-अलग नेताओं के समर्थक अपने-अपने स्तर पर पैरवी में जुटे हैं। दिल्ली में संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के साथ लगातार संवाद हो रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस की एकमात्र सीट को लेकर भी उतनी ही उत्सुकता है, जितनी भाजपा की दो सीटों को लेकर दिखाई दे रही है।
फिलहाल मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति एक बड़े सवाल पर आकर टिक गई है। क्या भाजपा में नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, लाल सिंह आर्य, अरविंद भदौरिया जैसे चर्चित नामों पर मुहर लगेगी? और क्या कांग्रेस अरुण यादव या विक्रांत भूरिया जैसे दावेदारों पर भरोसा करेगी? या फिर दोनों दल अपने-अपने 'सरप्राइज कार्ड' से राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ देंगे?
अगले कुछ दिनों में इसका जवाब सामने होगा। लेकिन मौजूदा संकेत यही बता रहे हैं कि इस बार राज्यसभा का चुनाव केवल सीट भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2028 की राजनीतिक रणनीति की शुरुआती पटकथा भी साबित हो सकता है।
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राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इस बार मामला उतना सीधा नहीं दिख रहा, जितना पिछले चुनावों में रहा है। भाजपा जहां 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखकर फैसला कर सकती है, वहीं कांग्रेस भी ऐसा नाम सामने ला सकती है जिसकी अभी खुलकर चर्चा नहीं हो रही। ऐसे में दोनों दलों के भीतर दावेदारों और उनके समर्थकों की बेचैनी बढ़ गई है।
एक नजर में एमपी के राज्यसभा चुनाव
- मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है।
- भाजपा के पास 2 और कांग्रेस के पास 1 सीट है।
- 18 जून को मतदान और परिणाम की संभावना।
- भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर लॉबिंग तेज।
- कई बड़े नेता दिल्ली में सक्रिय।
- दोनों दल अंतिम समय में सरप्राइज नाम पर दांव लगा सकते हैं।
- 2028 विधानसभा चुनाव के समीकरण भी चयन को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या इस बार बदल जाएगा राज्यसभा चयन का फॉर्मूला?
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल संगठनात्मक और चुनावी रणनीति को प्राथमिकता देते दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि चर्चित दावेदारों के साथ-साथ कुछ ऐसे नाम भी चर्चा में हैं जो अभी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा नहीं बने हैं।
भाजपा की रणनीति: 2028 का रोडमैप या तत्काल राजनीतिक संतुलन?
दिल्ली में सक्रिय भाजपा के बड़े चेहरे
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नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय भी मजबूत दावेदार
कांग्रेस में भी कम नहीं है सस्पेंस, कई नाम चर्चा में
हालांकि, अभी तक कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किसी नाम को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। राजनीतिक गलियारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
दोनों नेताओं को अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले ही सार्वजनिक रूप से अपनी दावेदारी से दूरी बनाने की बात कह चुके हैं।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन फिलहाल इन नामों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं दे रहे।
क्या कांग्रेस भी खेलेगी 'सरप्राइज कार्ड'?
मध्य प्रदेश कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के चयन से लेकर कई संगठनात्मक नियुक्तियों तक ऐसे निर्णय हुए हैं, जिन्होंने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंकाया है। इसी वजह से कांग्रेस के भीतर भी यह संभावना जताई जा रही है कि अंतिम सूची में ऐसा नाम सामने आ सकता है जिसकी अभी खुलकर चर्चा नहीं हो रही।
भाजपा की तरह कांग्रेस में भी दिल्ली दरबार पर नजर
सबसे बड़ा सवाल: क्या चर्चित नामों को मिलेगी मंजिल?-
अगले कुछ दिनों में इसका जवाब सामने होगा। लेकिन मौजूदा संकेत यही बता रहे हैं कि इस बार राज्यसभा का चुनाव केवल सीट भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2028 की राजनीतिक रणनीति की शुरुआती पटकथा भी साबित हो सकता है।
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