फास्ट ट्रैक कोर्ट से क्या होगा, पटवारी घोटाले की रिपोर्ट तक नहीं दी, पीएससी, ईएसबी के ये सारे विवाद
Sanjay Gupta | Jul 25, 2026, 16:12 IST
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दिल्ली से इंदौर तक चल रहे छात्र-युवा आंदोलन ने केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार को चिंता में डाल दिया है। सीएम मोहन यादव ने चार शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के आदेश दे दिए हैं। वहीं, अब सवाल उठ रहे हैं कि इससे होगा क्या...
परीक्षा में पेपर लीक, भर्ती घोटाले रोकने और सख्ती के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा कदम उठाया है। इंदौर के साथ भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। इंदौर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश शुभ्रा सिंह की कोर्ट होगी।
वहीं, इसी बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि इससे क्या वाकई असर होगा। पीएससी और ईएसबी के रिजल्ट, परीक्षा कैलेंडर जैसे अहम मुद्दों पर चुप्पी और गोपनीयता, भर्ती घोटालों की रिपोर्ट तक सामने नहीं आना जैसे कई सवाल खड़े हैं।
मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने इस मामले में ट्वीट कर कहा कि सरकार चार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कर रही है, लेकिन न्याय की शुरुआत पारदर्शिता से होती है, केवल घोषणाओं से नहीं। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित पटवारी भर्ती घोटाले की जांच के लिए गठित जस्टिस राजेंद्र वर्मा आयोग ने अपनी रिपोर्ट जनवरी 2024 में सरकार को सौंप दी थी।
इसके बावजूद, आज तक वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत रिपोर्ट मांगी गई, तो सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) (वाणिज्यिक गोपनीयता) और धारा 8(1)(h) (जांच/अभियोजन में बाधा) का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया।
भर्ती घोटाले की जांच रिपोर्ट में ऐसा कौन-सा व्यापारिक रहस्य छिपा है, जिसे जनता से छिपाया जा रहा है? और यदि आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर किस बात का डर है? अगर सरकार वास्तव में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के साथ न्याय चाहती है, तो सबसे पहले पटवारी भर्ती घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे। न्याय केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से नहीं, बल्कि सच सामने लाने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने से मिलता है।
ईएसबी ने इसी साल आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में 12 उम्मीदवारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इसी तरह सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर भी एफआईआर दर्ज कराई। आरोप है कि एक विशेष केंद्र में कुछ उम्मीदवारों द्वारा सांठगांठ कर अंतिम समय में पूरा पेपर सॉल्व किया गया।
इसी तरह जेल प्रहरी 2023 की परीक्षा में भी 109 उम्मीदवार संदिग्ध रहे, हालांकि इसमें ईएसबी ने मामला दर्ज नहीं करवाया।
इन मामलों में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभी तक यह सामने नहीं आया कि यह घोटाला किस तरह से हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
इसी तरह सिपाही भर्ती में आधार कार्ड वाला फर्जीवाड़ा भी हो चुका है, जिसमें कई उम्मीदवारों के आधार कार्ड में बदलाव कर दूसरों ने परीक्षा दे दी।
इसके पहले चर्चित पटवारी भर्ती परीक्षा में ग्वालियर के एक ही सेंटर से टॉप 10 में से टॉप 7 अभ्यर्थी चयनित हुए थे। जांच रिपोर्ट में क्लीन चिट दी गई, लेकिन रिपोर्ट का औपचारिक खुलासा कभी नहीं किया गया। इन सभी मामलों में आगे क्या हुआ, किसी को नहीं पता।
ईएसबी ने तो अपनी साइट से साल 2026 का परीक्षा कैलेंडर ही हटा दिया। पहले कहा गया कि जल्द आएगा, लेकिन इसके कोई अतापता नहीं है। वहीं ग्रुप वन सब-ग्रुप टू तथा ग्रुप टू सब-ग्रुप थ्री के रिजल्ट का कोई अतापता नहीं है। ईएसबी की ओर से कोई भी अधिकृत सूचना जारी नहीं होती है कि वह कब रिजल्ट देगा।
यही मामला पीएससी में भी है। पांच सदस्यीय आयोग में केवल तीन सदस्य ही हैं। इसके चलते इंटरव्यू बोर्ड ही पूरे नहीं बनते हैं। इंटरव्यू के लिए लंबी वेटिंग चल रही है। हाल यह है कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में दो से तीन साल का समय लग रहा है।
हालांकि परीक्षा सिस्टम और पेपर की गोपनीयता पर सवाल खड़े नहीं हुए, लेकिन इंटरव्यू के अंकों का विवाद बार-बार उठता है। यहां भी ईएसबी जैसी समस्या है- कब रिजल्ट आएंगे और कब इंटरव्यू होंगे, इसकी स्थिति साफ नहीं होती और एक-एक जानकारी के लिए उम्मीदवार परेशान होते हैं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला तब आता है जब पुलिस जांच कर चालान पेश करेगी। इस कोर्ट से यह होगा कि 30 दिन में ही फैसला होगा और तेजी से ट्रायल होगा, जो अभी सालों-साल चलते हैं। फिर भी मूल मामला रह जाता है। छात्रों की मांग है कि घोटालों पर रोक लगे और दोषियों को पकड़ा जाए। लेकिन पुलिस की जांच ही महीनों और सालों चलती है।
मामले को दबाया जाता है और ज्यादा हुआ तो केवल डमी उम्मीदवारों व छोटे लोगों पर केस कर मामले को खत्म कर दिया जाता है- चाहे वह आबकारी आरक्षक का मामला हो या फिर सिपाही भर्ती का। ऐसे में जरूरी है कि भर्ती एजेंसियां मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस को सौंपें और पुलिस इसकी प्राथमिकता से जांच कर चालान पेश करे। इसके बाद ही फास्ट ट्रैक कोर्ट का औचित्य बनता है।
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वहीं, इसी बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि इससे क्या वाकई असर होगा। पीएससी और ईएसबी के रिजल्ट, परीक्षा कैलेंडर जैसे अहम मुद्दों पर चुप्पी और गोपनीयता, भर्ती घोटालों की रिपोर्ट तक सामने नहीं आना जैसे कई सवाल खड़े हैं।
पटवारी भर्ती घोटाले की रिपोर्ट क्यों दबाई
इसके बावजूद, आज तक वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत रिपोर्ट मांगी गई, तो सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) (वाणिज्यिक गोपनीयता) और धारा 8(1)(h) (जांच/अभियोजन में बाधा) का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया।
भर्ती घोटाले की जांच रिपोर्ट में ऐसा कौन-सा व्यापारिक रहस्य छिपा है, जिसे जनता से छिपाया जा रहा है? और यदि आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर किस बात का डर है? अगर सरकार वास्तव में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के साथ न्याय चाहती है, तो सबसे पहले पटवारी भर्ती घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे। न्याय केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से नहीं, बल्कि सच सामने लाने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने से मिलता है।
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आबकारी आरक्षक, सिपाही भर्ती, जेल प्रहरी में क्या हुआ
इसी तरह जेल प्रहरी 2023 की परीक्षा में भी 109 उम्मीदवार संदिग्ध रहे, हालांकि इसमें ईएसबी ने मामला दर्ज नहीं करवाया।
इन मामलों में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभी तक यह सामने नहीं आया कि यह घोटाला किस तरह से हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
इसी तरह सिपाही भर्ती में आधार कार्ड वाला फर्जीवाड़ा भी हो चुका है, जिसमें कई उम्मीदवारों के आधार कार्ड में बदलाव कर दूसरों ने परीक्षा दे दी।
इसके पहले चर्चित पटवारी भर्ती परीक्षा में ग्वालियर के एक ही सेंटर से टॉप 10 में से टॉप 7 अभ्यर्थी चयनित हुए थे। जांच रिपोर्ट में क्लीन चिट दी गई, लेकिन रिपोर्ट का औपचारिक खुलासा कभी नहीं किया गया। इन सभी मामलों में आगे क्या हुआ, किसी को नहीं पता।
ना कैलेंडर के पते ना रिजल्ट के
पीएससी में कम सदस्य होने से परेशानी
हालांकि परीक्षा सिस्टम और पेपर की गोपनीयता पर सवाल खड़े नहीं हुए, लेकिन इंटरव्यू के अंकों का विवाद बार-बार उठता है। यहां भी ईएसबी जैसी समस्या है- कब रिजल्ट आएंगे और कब इंटरव्यू होंगे, इसकी स्थिति साफ नहीं होती और एक-एक जानकारी के लिए उम्मीदवार परेशान होते हैं।
क्या चाहते हैं युवा
- युवाओं की प्रमुख मांग है कि परीक्षाएं समय पर हों और पर्याप्त पद आएं।
- परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो और इसमें किसी तरह के घोटाले न हों।
- ईएसबी और पीएससी का परीक्षा कैलेंडर पूर्व घोषित हो और इंटरव्यू की तारीख से लेकर रिजल्ट का संभावित समय बताया जाए।
- भर्ती एजेंसी द्वारा समय-समय पर औपचारिक तरीके से सूचनाएं जारी की जाएं।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट से क्या होगा
मामले को दबाया जाता है और ज्यादा हुआ तो केवल डमी उम्मीदवारों व छोटे लोगों पर केस कर मामले को खत्म कर दिया जाता है- चाहे वह आबकारी आरक्षक का मामला हो या फिर सिपाही भर्ती का। ऐसे में जरूरी है कि भर्ती एजेंसियां मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस को सौंपें और पुलिस इसकी प्राथमिकता से जांच कर चालान पेश करे। इसके बाद ही फास्ट ट्रैक कोर्ट का औचित्य बनता है।
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