एमपी रिंग रोड परियोजना से उद्योगों को मिलेगी रफ्तार, छह शहरों में बनेगी नई सड़क
Jitendra Shrivastava | Jun 09, 2026, 19:44 IST
Photograph: (Thesootr)
मध्य प्रदेश रिंग रोड परियोजना अब रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जैसे छोटे शहरों तक पहुंचेगी। इससे ट्रैफिक जाम घटेगा और उद्योगों को नई रफ्तार मिलेगी।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- रतलाम, देवास, सागर में बनेंगे नए रिंग रोड।
- ट्रैफिक जाम घटेगा, यात्रा का समय कम होगा।
- उद्योग और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार।
- जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन डेढ़ साल में पूरे।
- इंदौर रिंग रोड 2029 तक पूरा होने की उम्मीद।
छोटे शहरों तक पहुंची योजना
अब सरकार ने इसका दायरा और बढ़ा दिया है। रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी अब जुड़ेंगे। ये सभी तेजी से बढ़ते उभरते शहर हैं। इनमें वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी कारण यहां रिंग रोड की जरूरत महसूस हुई।
अधिकारियों के अनुसार व्यापक यातायात योजना तैयार होगी। स्थानीय निकाय और नगर निगम इसमें सहयोग करेंगे। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग भी साथ काम करेगा। जहां संभव होगा, मौजूदा बाईपास का उपयोग होगा। उन्हें विकसित कर रिंग रोड का रूप दिया जाएगा।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
लोगों का यात्रा समय भी काफी कम होगा। प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आएगी। शहर के बाहर से वाहन सीधे निकल सकेंगे। इससे मुख्य बाजारों में भीड़ कम होगी। आम नागरिकों को रोजमर्रा की बड़ी राहत मिलेगी। सड़क हादसों में भी कमी आने की उम्मीद है।
उद्योगों को मिलेगा फायदा
माल ढुलाई की लागत और समय दोनों घटेंगे। इससे निवेश के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा। व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी। छोटे शहर भी मजबूत आर्थिक केंद्र बन सकेंगे।
तीन शहरों में डेढ़ साल लक्ष्य
जबलपुर में रिंग रोड 118 किलोमीटर लंबी होगी। ग्वालियर में यह करीब 29 किलोमीटर की है। उज्जैन में इसकी लंबाई लगभग 43 किलोमीटर तय है। तीनों परियोजनाएं दिसंबर 2027 तक पूरी होंगी।
भोपाल इंदौर की बड़ी परियोजना
यह परियोजना 2029 तक पूरी हो सकती है। भोपाल पश्चिमी बाईपास भी एक अहम परियोजना है। इसकी लंबाई 35.6 किलोमीटर निर्धारित है। इस पर करीब 4,885 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अब तक 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है। इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
विकास के खुलेंगे नए द्वार
मध्य प्रदेश रिंग रोड योजना विकास के द्वार खोलेगी। इससे पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है। छोटे और बड़े शहर एक साथ आगे बढ़ेंगे। यह आधुनिक मध्य प्रदेश की मजबूत नींव बनेगी।
FAQ
- मध्य प्रदेश रिंग रोड किन नए शहरों में बनेगी?
मध्य प्रदेश रिंग रोड अब रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी में बनेगी। पहले यह योजना सिर्फ भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन तक सीमित थी। इन उभरते शहरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। - जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन रिंग रोड कब तक पूरी होंगी?
सरकार ने इन तीनों परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इन्हें अगले डेढ़ साल, यानी दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। जबलपुर में 118 किलोमीटर, ग्वालियर में 29 किलोमीटर और उज्जैन में 43 किलोमीटर लंबी रिंग रोड बनाई जाएगी। - इंदौर रिंग रोड की लंबाई और लागत कितनी है?
इंदौर रिंग रोड करीब 139 किलोमीटर लंबी है। इसकी अनुमानित लागत 5,900 करोड़ रुपए है। पश्चिमी हिस्से का निर्माण जारी है, जबकि पूर्वी हिस्से की डीपीआर तैयार हो रही है। यह परियोजना 2029 तक पूरी होने की संभावना है।
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