एमपी राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, द सूत्र ने पहले ही बताया था संकट में मीनाक्षी
Sanjay Dhiman | Jun 09, 2026, 18:39 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। भाजपा की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच कर कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया है।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। राज्य में चल रहे राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान मंगलवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया गया है। इसके बाद इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे। इसकी अधिकृत घोषणा 11 जून की शाम को होगी।
मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई जब नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) के दौरान भाजपा की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन फॉर्म को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। भाजपा के कानूनी दल और प्रतिनिधियों ने फॉर्म में कुछ तकनीकी कमियों और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी।
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1- शपथ पत्र अधूरा था नामांकन के Form 26 में उन्होंने एक न्यायालयीन प्रकरण (मुकदमा) का उल्लेख नहीं किया, जबकि वे उसमें प्रतिवादी हैं।
2- मुकदमा सक्रिय है, उन्हें पता था न्यायालय ने उन्हें समन जारी किया, उन्होंने जवाब दावा भी दाखिल किया, यानी जानकारी छिपाना जानबूझकर था।
BNS धारा 356 लागू होती है जिस मुकदमे का ज़िक्र नहीं किया, उसमें 2 साल तक की सज़ा का प्रावधान है- इसलिए उसे Form 26 में दर्ज करना अनिवार्य था।
निर्वाचन आयोग के निर्देशों और Returning Officer Handbook अध्याय 6, बिंदु 10(x.iii) के तहत मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त।
यह है पूरा मामला:
इधर भाजपा ने रिटर्निंग अफसर के सामने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन फार्म पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। पार्टी का आरोप लगाया था कि नटराजन ने फार्म में तेलंगाना की एक अदालत में चल रहे मामले की जानकारी जानबूझकर छुपाई है।
दरअसल, हैदराबाद की चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में पूर्व कॉर्पोरेटर ए. श्रीलता ने नटराजन के खिलाफ एक याचिका दायर कर रखी है। श्रीलता का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने कुंभम शिव कुमार रेड्डी नाम के व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण दिया, जिन पर खुद श्रीलता ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने के संगीन इल्जाम लगाए हैं।
इस मामले में BNS की धारा 356, 61, 45, 46 और 79 जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
कांग्रेस का पलटवार- नोटिस और केस में फर्क करो!
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा की आपत्ति को "जबरन की गई राजनीति" करार दिया। उनका कहना है-
"नटराजन के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है। उन्हें केवल एक कोर्ट नोटिस मिला है। चुनाव आयोग के निर्देश साफ हैं- नामांकन में जानकारी तब देनी होती है जब केस दर्ज हो, नोटिस मिलने पर नहीं।"
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इधर कांग्रेस विधायक बैंगलुरु जाने की तैयारी में, उधर मीनाक्षी नटराजन के फार्म पर संकट!
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भाजपा की आपत्ति पर हुई कार्रवाई
यह है रिटर्निंग अधिकारी का आदेश
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रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने क्या पाया?
तीन तथ्य निर्णायक रहे:
2- मुकदमा सक्रिय है, उन्हें पता था न्यायालय ने उन्हें समन जारी किया, उन्होंने जवाब दावा भी दाखिल किया, यानी जानकारी छिपाना जानबूझकर था।
BNS धारा 356 लागू होती है जिस मुकदमे का ज़िक्र नहीं किया, उसमें 2 साल तक की सज़ा का प्रावधान है- इसलिए उसे Form 26 में दर्ज करना अनिवार्य था।
अंतिम निर्णय
यह है पूरा मामला: नामांकन फार्म पर भाजपा की आपत्ति
दरअसल, हैदराबाद की चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में पूर्व कॉर्पोरेटर ए. श्रीलता ने नटराजन के खिलाफ एक याचिका दायर कर रखी है। श्रीलता का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने कुंभम शिव कुमार रेड्डी नाम के व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण दिया, जिन पर खुद श्रीलता ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने के संगीन इल्जाम लगाए हैं।
इस मामले में BNS की धारा 356, 61, 45, 46 और 79 जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
कांग्रेस का पलटवार- नोटिस और केस में फर्क करो!
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा की आपत्ति को "जबरन की गई राजनीति" करार दिया। उनका कहना है-
"नटराजन के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है। उन्हें केवल एक कोर्ट नोटिस मिला है। चुनाव आयोग के निर्देश साफ हैं- नामांकन में जानकारी तब देनी होती है जब केस दर्ज हो, नोटिस मिलने पर नहीं।"
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